Parliament Monsoon Session: हंगामे के साथ शुरू हुआ संसद का मॉनसून सत्र, स्पीकर ओम बिड़ला बोले- सदन नियम से चलता है

Parliament Monsoon Session: संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद विपक्ष ने जैसे ही हंगामा शुरू किया, स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि सदन नियम से चलता है।

Jul 20, 2026 - 13:16
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Parliament Monsoon Session: हंगामे के साथ शुरू हुआ संसद का मॉनसून सत्र, स्पीकर ओम बिड़ला बोले- सदन नियम से चलता है
संसद भवन के बाहर का दृश्य और अंदर की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की आसंदी पर बैठे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला
  • Lok Sabha Monsoon Session: दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद लोकसभा में भारी शोरशराबा, अध्यक्ष ने विपक्ष को टोका
  • संसद के मॉनसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत: मौन खत्म होते ही विपक्ष का शोर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने दी नसीहत
  • संसद समाचार: मॉनसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में हंगामा, स्पीकर ने कहा- नियमों के तहत ही चलेगी कार्यवाही

भारतीय संसद का मॉनसून सत्र आज नई दिल्ली स्थित लोकसभा में भारी हंगामे और शोर-शराबे के साथ शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत में नियमानुसार हाल ही में दिवंगत हुए पूर्व सदस्यों और नेताओं के सम्मान में कुछ मिनटों का मौन रखा गया। हालांकि, जैसे ही मौन अवधि समाप्त हुई, विपक्षी दलों के सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और शोर मचाना शुरू कर दिया। विपक्ष के इस आक्रामक रुख को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कड़ी आपत्ति जताई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन केवल और केवल नियमों के आधार पर संचालित होता है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते गतिरोध को देखते हुए आने वाले दिनों में सत्र के और अधिक हंगामेदार रहने के आसार हैं।


संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, सदन में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। परंपरा के मुताबिक, सबसे पहले उन दिवंगत नेताओं को याद किया गया जिनका हाल के दिनों में निधन हुआ था। पूरे सदन ने खड़े होकर शोक व्यक्त किया और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए मौन रखा। लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिकी। जैसे ही शोक सभा की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई और अध्यक्ष ने विधायी कार्यों की ओर रुख किया, विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की रणनीति के तहत जोरदार हंगामा शुरू कर दिया गया। विपक्षी सांसद अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने उन्हें नियमों की याद दिलाई।

सत्र के पहले दिन की कार्यसूची के अनुसार, सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ओम बिड़ला ने शोक प्रस्ताव पढ़ा। इसके बाद पूरे सदन ने कुछ मिनटों का मौन रखकर दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ पूरी तरह शांति रही। परंतु, मौन खत्म होते ही विपक्षी खेमे से तख्तियां लहराने और नारे लगाने का सिलसिला शुरू हो गया।

विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता और सांसद विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर अड़ गए। सदन में शोर का स्तर इतना बढ़ गया कि अध्यक्ष की आवाज भी साफ सुनाई नहीं दे रही थी। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बार-बार सांसदों से अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह किया और कहा, "सदन नियम से चलता है, किसी के दबाव या शोर-शराबे से नहीं।" उन्होंने सदस्यों को आगाह किया कि वे बिना अनुमति के बोलना बंद करें और सदन की मर्यादा बनाए रखें।

इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है।

सत्तापक्ष का रुख: सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर नियमों के तहत चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित करने का बहाना ढूंढ रहा है। शोक प्रस्ताव के तुरंत बाद इस तरह का आचरण संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

विपक्ष का रुख: दूसरी तरफ, विपक्ष के नेताओं का तर्क है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। विपक्षी दलों का आरोप है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद उन्हें बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें सदन में आवाज उठानी पड़ रही है।

सत्र के पहले ही दिन हुए इस हंगामे ने यह साफ कर दिया है कि इस बार का मॉनसून सत्र काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। इस गतिरोध के कारण जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों और विधायी कार्यों में देरी होने की आशंका बढ़ गई है। संसद के पटल पर कई वित्तीय और कानूनी सुधारों से संबंधित विधेयक लंबित हैं, जिन पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। पहले दिन के हंगामे का सीधा असर सदन की उत्पादकता (Productivity) पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जिससे जनता के पैसे और समय दोनों का नुकसान होता है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा दी गई सख्त हिदायत के बाद अब यह देखना होगा कि विपक्षी दल अपनी रणनीति में क्या बदलाव लाते हैं। यदि हंगामा इसी तरह जारी रहता है, तो अध्यक्ष के पास सदन को स्थगित करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का विकल्प बचता है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सर्वदलीय बैठक या अनौपचारिक बातचीत के जरिए बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया जा सकता है, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर स्वस्थ बहस संभव हो सके।

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