Lok Sabha Adjourned: लोकसभा में हंगामे के बीच मात्र 2 मिनट में स्थगित हुई कार्यवाही, अध्यक्ष ओम बिरला ने जताई कड़ी नाराजगी 

संसद के मानसून सत्र में लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही 2 मिनट के भीतर स्थगित हो गई। विपक्ष के हंगामे पर अध्यक्ष ओम बिरला ने सख्त नाराजगी जताई।

Jul 23, 2026 - 13:57
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Lok Sabha Adjourned: लोकसभा में हंगामे के बीच मात्र 2 मिनट में स्थगित हुई कार्यवाही, अध्यक्ष ओम बिरला ने जताई कड़ी नाराजगी 
Parliament Monsoon Session adjourned
  • Parliament Monsoon Session: विपक्ष के शोर-शराबे पर भड़के ओम बिरला, 2 मिनट भी नहीं चल सकी लोकसभा की कार्यवाही 
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  • लोकसभा में भारी हंगामा: कार्यवाही शुरू होने के 2 मिनट के भीतर स्थगित, अध्यक्ष ओम बिरला ने जताई भारी नाराजगी

संसद के जारी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के इस कड़े रुख और शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही मात्र दो मिनट भी सुचारू रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी सदस्यों के वेल (सदन के बीचों-बीच) में आकर नारेबाजी करने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अत्यंत सख्त नाराजगी जाहिर की। आसन की अवहेलना और अनुशासित व्यवहार न होने पर ओम बिरला ने कड़े शब्दों में सदस्यों को चेताया और सदन का संचालन असंभव देखते हुए कार्यवाही को स्थगित करने की घोषणा कर दी।

संसद भवन में सुबह जैसे ही प्रश्नकाल या तय कामकाज निपटाने के लिए लोकसभा की बैठक शुरू हुई, वैसे ही विपक्षी गठजोड़ के सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी प्रारंभ कर दी। संसद सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर और नियमों के तहत तत्काल चर्चा कराने की जिद पर अड़ गए।

सदन की कार्यवाही शुरू हुए अभी मुश्किल से दो मिनट का समय ही बीता था कि वेल में सांसदों की भीड़ जमा हो गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर जाने का आग्रह किया, लेकिन जब सांसदों ने उनके निर्देशों को अनसुना कर दिया, तो अध्यक्ष का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सदन को स्थगित करने का आदेश दे दिया। 

सदन की बैठक शुरू होने की घंटी बजते ही अध्यक्ष ओम बिरला अपनी पीठ पर आसीन हुए। उन्होंने जैसे ही आवश्यक पत्र पटल पर रखवाने और प्रश्नकाल की शुरुआत करने की घोषणा की, वैसे ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसद अपनी जगह से उठ खड़े हुए। विपक्षी सदस्य नीट (NEET) पेपर लीक, देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों और अन्य प्रशासनिक गड़बड़ियों पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा कराने पर अड़े थे।

अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट कहा कि सदस्यों को नियम और परंपराओं के अनुसार अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, इसलिए वे अपनी सीटों पर लौटें और प्रश्नकाल चलने दें। इसके बावजूद विपक्षी सांसद हाथों में बैनर-तख्तियां लहराते हुए आसन के करीब आ पहुंचे और ज़ोर-ज़ोर से सरकार विरोधी नारे लगाने लगे।

सदन के भीतर व्यवस्था और गरिमा टूटती देख अध्यक्ष ओम बिरला का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि देश की जनता ने सांसदों को नीतिगत चर्चा और जनहित के सवाल उठाने के लिए चुना है, न कि इस तरह कार्यवाही में बाधा डालने के लिए। जब महज 120 सेकंड के भीतर हंगामा चरम पर पहुंच गया, तो उन्होंने भारी मन से सदन की बैठक को स्थगित कर दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय मर्यादाओं के बार-बार उल्लंघन पर गहरी चिंता और नाराजगी प्रकट की। उन्होंने कहा कि आसन हमेशा सभी सदस्यों की बात सुनने के लिए तैयार रहता है, लेकिन सुनियोजित तरीके से सदन की कार्यवाही शुरू होते ही वेल में आना और तख्तियां दिखाना संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने सख्त शब्दों में ताकीद की कि अगर सदस्य तख्तियां लहराना और हंगामा करना ही चाहते हैं, तो यह व्यवहार सदन के भीतर स्वीकार्य नहीं होगा।

संसदीय कार्य मंत्री और सत्ता पक्ष के नेताओं ने भी विपक्ष के इस रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष महत्वपूर्ण विधेयकों और जनता के मुद्दों पर बहस करने से भाग रहा है तथा हर दिन केवल राजनीतिक ड्रामेबाज़ी के लिए संसद का बहुमूल्य समय और टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद कर रहा है।

दूसरी तरफ, विपक्षी नेताओं का कहना था कि देश के करोड़ों युवाओं और आम नागरिकों से जुड़े संवेदनशील विषयों पर सरकार तुरंत चर्चा कराने से बच रही है। विपक्ष का तर्क है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर नियम के तहत चर्चा नहीं स्वीकार की जाती, तब तक वे अपना लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराते रहेंगे।

कार्यवाही के महज दो मिनट में स्थगित होने का सीधा असर विधायी कार्यों पर पड़ रहा है। संसद के बहुमूल्य समय के इस तरह बर्बाद होने से देश भर की जनता में निराशा बढ़ रही है। जनता के टैक्स के पैसों से चलने वाले संसद सत्र में प्रश्नकाल स्थगित होने से मंत्रालयों और सांसदों के बीच होने वाले सीधे संवाद पर ब्रेक लग गया है। इसके अलावा, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों पर भी बहस टलती जा रही है।

बार-बार हो रहे स्थगन और गतिरोध को समाप्त करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स (संसदीय दल के नेताओं) की एक आपात बैठक बुलाने का संकेत दिया है। इस बिजनेस एडवाइजरी कमेटी और सर्वदलीय बातचीत का मुख्य उद्देश्य सदन में सुचारू संचालन बहाल करना होगा। हालांकि, विपक्ष के आक्रामक रुख और सरकार के कड़े रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में भी संसद का तापमान चढ़े रहने की पूरी संभावना है।

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