Giriraj Singh on Rahul Gandhi: 'राहुल गांधी पर चले देशद्रोह का मुकदमा', प्रदर्शन को लेकर बरसे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल पर संविधान की गरिमा गिराने का आरोप लगाया।

- 'संविधान की गरिमा तार-तार की', राहुल गांधी के रवैये पर भड़के गिरिराज सिंह; दी देशद्रोह के केस की सलाह
- 'राहुल गांधी का आचरण खतरनाक, चले देशद्रोह का मुकदमा': लोकसभा में विपक्ष के नेता के प्रदर्शन पर भड़के गिरिराज सिंह
- गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर बड़ा हमला: बोले- 'संविधान की गरिमा तार-तार की, चलना चाहिए देशद्रोह का मुकदमा'
संसद और देश की राजनीति में पक्ष-विपक्ष का घमासान एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी के आचरण और प्रदर्शन को लेकर उन पर सीधा और तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने संवैधानिक पद पर रहते हुए संविधान की गरिमा को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी के आचरण को देश के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए मांग की कि उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के इस कड़े बयान के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा हालिया मुद्दों और विभिन्न विषयों को लेकर किए जा रहे विरोध प्रदर्शन तथा बयानों को लेकर सत्ता पक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की कार्यशैली और प्रदर्शन के तरीके पर कड़ा ऐतराज जताया है।
गिरिराज सिंह का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदार संवैधानिक दर्जा होता है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का पालन करे। हालांकि, गिरिराज सिंह के मुताबिक राहुल गांधी का हालिया व्यवहार और विरोध प्रदर्शन का तरीका संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला है।
राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी के हालिया प्रदर्शनों और बयानों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इसी कड़ी में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान जब केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से राहुल गांधी के प्रदर्शन और आचरण के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
गिरिराज सिंह ने कहा, "राहुल गांधी ने संवैधानिक पद पर रहकर संविधान की गरिमा को तार-तार किया है। उनका यह आचरण बहुत खतरनाक है। राहुल गांधी के ऊपर तो देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।"
गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाकर देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि विपक्ष का काम सवाल पूछना और विरोध करना है, लेकिन विरोध की आड़ में देश की व्यवस्था और संविधान का अनादर स्वीकार्य नहीं हो सकता।
केंद्रीय मंत्री के इस आक्रामक बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
सत्ता पक्ष (बीजेपी) का रुख: बीजेपी नेताओं का कहना है कि गिरिराज सिंह की टिप्पणी विपक्ष की गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का सच दिखाती है। सत्ता पक्ष के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद भी राहुल गांधी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और राजनीतिक लाभ के लिए देश की गरिमा को दांव पर लगा रहे हैं।
विपक्ष (कांग्रेस) का पक्ष: दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी और विपक्षी सहयोगियों ने गिरिराज सिंह के बयान की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे अनर्गल और असंसदीय बयानों का सहारा ले रही है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी जनता, किसानों और युवाओं की आवाज बुलंद कर रहे हैं और उनके इस अधिकार को देशद्रोह का नाम देना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।
गिरिराज सिंह द्वारा देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग किए जाने के बाद संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। इस तीखे बयान का प्रभाव संसदीय कार्यवाही पर भी पड़ने की संभावना है, जहां विपक्षी दल इस बयान को लेकर हंगामा कर सकते हैं। वहीं, यह बयान इस बात का भी संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव और भी ज्यादा आक्रामक होने वाला है।
इस राजनीतिक बयानबाजी के बाद कांग्रेस पार्टी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या बयान जारी कर गिरिराज सिंह और बीजेपी पर पलटवार कर सकती है। इसके साथ ही, संसद के आगामी सत्र या दैनिक कार्यवाहियों के दौरान भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दे सकती है। देखना होगा कि क्या बीजेपी इस मांग को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई रुख अपनाती है या यह केवल एक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है।
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