Sajjan Kumar Death: 1984 सिख विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल में निधन

Sajjan Kumar Passes Away: 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का दिल्ली की तिहाड़ जेल में निधन हो गया है।

Aug 20, 2026 - 14:43
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Sajjan Kumar Death: 1984 सिख विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल में निधन
  • Former Congress MP Sajjan Kumar Passed Away: तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार का निधन, पढ़ें पूरी खबर
  • 1984 सिख दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में थे बंद
  • Sajjan Kumar Passed Away: पूर्व कांग्रेस सांसद और 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल में निधन

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तिहाड़ जेल में निधन हो गया है। दिल्ली छावनी क्षेत्र में हुए दंगों और पांच सिखों की हत्या के मामले में उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद वे तिहाड़ जेल में अपनी सजा भुगत रहे थे। 79 वर्षीय पूर्व सांसद लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। जेल प्रशासन द्वारा नियमानुसार आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं और मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।

वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े चर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल में निधन हो गया है। जेल अधिकारियों के अनुसार, स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें प्राथमिक चिकित्सा सहायता दी गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पूर्व सांसद पिछले कई वर्षों से जेल में बंद थे और विभिन्न स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते उनका नियमित उपचार चल रहा था।

सज्जन कुमार का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली छावनी के राज नगर इलाके में हुई पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाने की हिंसक घटना से जुड़ा था। निचली अदालत द्वारा पहले उन्हें बरी कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पीड़ितों के परिजनों ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2018 में निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को आपराधिक षड्यंत्र, दंगा भड़काने और धार्मिक उन्माद फैलाने का दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें ताउम्र जेल में रहने की सजा सुनाई थी। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उन्होंने 31 दिसंबर 2018 को दिल्ली की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था और तभी से वे तिहाड़ जेल में बंद थे। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर कई बार शीर्ष अदालत में जमानत याचिकाएं भी दाखिल की थीं, हालांकि अदालत ने उनकी अर्जियों को खारिज कर दिया था।

मामले से जुड़े मुख्य कानूनी पड़ाव

1984: तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली छावनी क्षेत्र में भड़की थी हिंसा।

2013: कड़कड़डूमा स्थित निचली अदालत ने सज्जन कुमार को संदेह का लाभ देकर बरी किया था।

2018: दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

सज्जन कुमार के निधन की खबर सामने आने के बाद कानूनी और राजनीतिक गलियारों में इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। दंगा पीड़ितों के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह मामला देश की न्याय व्यवस्था में एक मिसाल के तौर पर देखा जाएगा, जहां दशकों की लंबी लड़ाई के बाद प्रभावशाली पदों पर रहे लोगों को अदालत ने सजा दिलाई। वहीं, उनके समर्थकों और परिजनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

सज्जन कुमार के निधन के साथ ही 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील अध्याय का कानूनी पटाक्षेप जेल की सलाखों के भीतर हो गया। यह मामला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसने यह स्थापित किया कि अपराध कितना भी पुराना हो और आरोपी चाहे कितने भी ऊंचे राजनीतिक रसूखदार पद पर रहा हो, कानून के हाथ अंततः न्याय सुनिश्चित करने में सक्षम हैं।

तिहाड़ जेल प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत हिरासत में हुई मृत्यु से संबंधित सभी मजिस्ट्रियल प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के एक मेडिकल बोर्ड की निगरानी में संपन्न कराया जाएगा और इसकी पूरी वीडियोग्राफी कराई जाएगी। आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सुपुर्द कर दिया जाएगा।

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