Bihar Politics: क्या जन सुराज में शामिल होंगे बाहुबली अनंत सिंह? प्रशांत किशोर ने दिया दो टूक जवाब

मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के जन सुराज में शामिल होने की अटकलों पर प्रशांत किशोर ने रुख साफ किया है। पीके ने कहा कि जब वे घोषणा करेंगे, तब पार्टी फैसला लेगी।

Oct 5, 2026 - 19:13
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Bihar Politics: क्या जन सुराज में शामिल होंगे बाहुबली अनंत सिंह? प्रशांत किशोर ने दिया दो टूक जवाब
  • अनंत सिंह की जन सुराज में एंट्री पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: 'पहले वे एलान करें, फिर पार्टी लेगी फैसला'
  • Prashant Kishor on Anant Singh: मोकामा के पूर्व विधायक को लेकर सियासी अटकलों पर विराम, पीके ने स्पष्ट की जन सुराज की नीति
  • जन सुराज में अनंत सिंह की एंट्री पर सस्पेंस खत्म: प्रशांत किशोर बोले- किसी के मन में क्या है हम नहीं जानते, औपचारिक कदम के बाद होगा निर्णय

पटना (बिहार)। बिहार की राजनीतिक हलचलों के बीच मोकामा के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह के जन सुराज अभियान में शामिल होने की अटकलों पर पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने औपचारिक प्रतिक्रिया दी है। राजधानी पटना में मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान जब पत्रकारों ने अनंत सिंह की संभावित राजनीतिक दिशा और जन सुराज से उनके जुड़ाव को लेकर सवाल पूछा, तो प्रशांत किशोर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक कोई नेता अपनी तरफ से कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं करता, तब तक कयासों के आधार पर बात करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि अनंत सिंह ऐसा कोई निर्णय लेते हैं या औपचारिक एलान करते हैं, तो उस स्थिति में जन सुराज पार्टी विचार कर अपना अंतिम निर्णय लेगी।

हाल के दिनों में जेल से रिहा होने और कानूनी राहत मिलने के बाद अनंत सिंह के अगले राजनीतिक कदम को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। चूंकि जन सुराज ने 2 अक्टूबर को एक औपचारिक राजनीतिक दल का रूप ले लिया है और पार्टी आगामी सभी विधानसभा सीटों पर पूरी मजबूती से चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है, इसलिए यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या मोकामा और टाल क्षेत्र के प्रभावी नेता अनंत सिंह जन सुराज का दामन थाम सकते हैं।

  • प्रशांत किशोर ने क्या कहा?

प्रेस वार्ता के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि राजनीति में कौन व्यक्ति क्या सोच रहा है या किसके मन में क्या चल रहा है, इसका अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा, "जब तक वे (अनंत सिंह) खुद कोई बात नहीं कहते या किसी बात की घोषणा नहीं करते, तब तक उस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करना केवल अटकलबाजी होगी। यदि वे खुद सामने आकर कोई एलान करते हैं, तब जन सुराज की संगठनात्मक समिति और पार्टी नेतृत्व उस पर विचार करेगा और पार्टी अपना फैसला लेगी।"

प्रशांत किशोर के इस नपे-तुले बयान से यह साफ हो गया है कि जन सुराज ने न तो सीधे तौर पर दरवाजे पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है और न ही किसी नेता को बिना औपचारिक प्रक्रिया के पार्टी में शामिल करने का कोई संकेत दिया है। पीके के इस रुख को राजनीतिक विश्लेषक रणनीतिक संतुलन के तौर पर देख रहे हैं।

  • स्वच्छ राजनीति बनाम चुनावी समीकरण की चुनौती

जन सुराज की स्थापना के समय से ही प्रशांत किशोर यह दावा करते रहे हैं कि उनकी पार्टी बिहार में पारंपरिक 'जाति-अपराध-धनबल' के गठजोड़ को तोड़कर एक नई राजनीतिक संस्कृति स्थापित करेगी। उन्होंने बार-बार दोहराया है कि जनता के बीच से निकले स्वच्छ छवि वाले और कर्मठ लोगों को ही टिकट दिया जाएगा।

दूसरी तरफ, मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह की पहचान बिहार के कद्दावर बाहुबली नेताओं के रूप में रही है। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और एक मामले में सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो चुकी है। ऐसे में यदि अनंत सिंह या उनके परिवार का कोई सदस्य जन सुराज के मंच पर आता है, तो पार्टी के लिए अपने 'दाग-मुक्त और स्वच्छ छवि' के वादे को लेकर नैतिक और वैचारिक सवालों का सामना करना पड़ सकता है। संभवतः इसी संतुलन को साधने के लिए प्रशांत किशोर ने गेंद पूरी तरह अनंत सिंह के पाले में डालते हुए कहा कि पहल होने के बाद ही पार्टी कोई निर्णय लेगी।

  • मोकामा और टाल क्षेत्र का सियासी समीकरण

मोकामा विधानसभा क्षेत्र और पटना-नालंदा से सटे टाल इलाके में अनंत सिंह का दशकों से मजबूत व्यक्तिगत प्रभाव रहा है। वे जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी नीलम देवी ने भी राजद के टिकट पर उपचुनाव जीता था, हालांकि बाद में वे सत्ता पक्ष के समर्थन में खड़ी नजर आईं।

वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) दोनों ही खेमों में सीट बंटवारे और स्थानीय समीकरणों को लेकर खींचतान बनी रहती है। ऐसे में यदि कोई तीसरा मजबूत विकल्प राज्य में उभरता है, तो क्षेत्रीय क्षत्रप अपने भविष्य के राजनीतिक अस्तित्व के लिए नए विकल्पों की तलाश करते हैं। इसी पृष्ठभूमि में अनंत सिंह और जन सुराज को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हुई थीं।

जन सुराज पार्टी के संविधान और चयन प्रक्रिया का हवाला देते हुए पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि पार्टी में किसी भी व्यक्ति का प्रवेश और चुनावी उम्मीदवारी केवल किसी एक नेता के कहने पर तय नहीं होती। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन के लिए आंतरिक सर्वे, स्थानीय जनता की राय और स्क्रीनिंग कमेटी के प्रावधान बनाए हैं।

प्रशांत किशोर कई मौकों पर कह चुके हैं कि जन सुराज का प्राथमिक लक्ष्य सत्ता तक पहुंचना मात्र नहीं, बल्कि बिहार के 13 करोड़ लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। अब देखना यह होगा कि मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह आने वाले दिनों में अपनी राजनीतिक दिशा को लेकर क्या रुख अपनाते हैं और यदि वे कोई औपचारिक कदम उठाते हैं, तो जन सुराज अपने तय मानकों के आधार पर क्या फैसला लेती है।

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