Politics: दिल्ली में ईओएल वाहनों पर प्रतिबंध, आतिशी का बीजेपी पर 'तुगलकी फरमान' का आरोप, ऑटोमोबाइल कंपनियों से साठगांठ का दावा।
दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2025 से एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों, यानी 15 साल से पुराने पेट्रोल और सीएनजी वाहनों तथा 10 साल से पुराने डीजल वाहनों.....
दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2025 से एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों, यानी 15 साल से पुराने पेट्रोल और सीएनजी वाहनों तथा 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर ईंधन आपूर्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। इस नीति का उद्देश्य दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार करना बताया गया है, लेकिन इसने शहर में व्यापक विवाद को जन्म दिया है। आम आदमी पार्टी (आप) की वरिष्ठ नेता और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने इस नीति को "तुगलकी फरमान" करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ साठगांठ का गंभीर आरोप लगाया है। आतिशी ने दावा किया कि यह नीति 62 लाख वाहनों को सड़कों से हटाने का प्रयास है, जिससे दिल्लीवासियों को मजबूरन नई गाड़ियां खरीदनी पड़ेंगी, और इससे ऑटोमोबाइल कंपनियों को भारी मुनाफा होगा। उन्होंने बीजेपी से यह खुलासा करने की मांग की कि उसे इन कंपनियों से कितना चंदा मिला है।
दिल्ली सरकार ने इस नीति को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के दिशानिर्देशों के तहत लागू किया है। इसके अनुसार, 15 साल से पुराने पेट्रोल और सीएनजी वाहनों और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों को दिल्ली में ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह नियम 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 2014 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों पर आधारित है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया था।
1 जुलाई 2025 को इस नीति के पहले दिन, दिल्ली पुलिस, परिवहन विभाग और दिल्ली नगर निगम की 350 टीमें दिल्ली के 498 पेट्रोल पंपों पर 24 घंटे तैनात रहीं। इन टीमों ने 80 वाहनों को जब्त किया और 98 लोगों को नोटिस जारी किए, जिनके वाहनों को तुरंत जब्त नहीं किया जा सका। स्वचालित नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरों को पेट्रोल पंपों पर स्थापित किया गया है, जो वाहनों के नंबर प्लेट को स्कैन कर केंद्रीय सरकार के वाहन पोर्टल के डेटा से तुलना करते हैं। यदि वाहन ईओएल के रूप में चिह्नित है या उसके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) नहीं है, तो पेट्रोल पंप कर्मचारियों को ऑडियो अलर्ट प्राप्त होता है, और ईंधन देने से मना कर दिया जाता है।
- आतिशी और आप का विरोध
आम आदमी पार्टी ने इस नीति को "जनविरोधी" और "कॉर्पोरेट समर्थक" करार देते हुए तीखी आलोचना की है। 2 जुलाई 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आतिशी ने इसे "तुगलकी फरमान" बताया और कहा कि यह नीति दिल्ली के 62 लाख वाहनों को प्रभावित करेगी, जिसमें 40 लाख दोपहिया और 20 लाख चारपहिया वाहन शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वाहन की उम्र प्रदूषण का एकमात्र मापदंड नहीं हो सकती। अच्छी तरह से रखरखाव किए गए पुराने वाहन कम प्रदूषण फैलाते हैं, जबकि नए वाहन जो अधिक दूरी तय कर चुके हैं, अधिक प्रदूषण का कारण बन सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक सात साल पुराना वाहन जो तीन लाख किलोमीटर चल चुका है, सड़कों पर चल सकता है, लेकिन 15 साल पुराना वाहन जो केवल 50,000 किलोमीटर चला है, उसे हटा दिया जाएगा। आतिशी ने बीजेपी पर ऑटोमोबाइल कंपनियों से चंदा लेने का आरोप लगाते हुए कहा, "मैं बीजेपी को चुनौती देती हूँ कि वह दिल्ली की जनता को बताए कि उन्हें इन कंपनियों से कितना चंदा मिला है।" उन्होंने दावा किया कि यह नीति मध्यम और निम्न-आय वर्ग के लोगों, विशेष रूप से दोपहिया वाहनों पर निर्भर दैनिक यात्रियों और वरिष्ठ नागरिकों को परेशान करेगी। आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने X पर लिखा कि इस नीति के कारण दिल्लीवासी अब उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमाओं पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों में लग रहे हैं, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या बढ़ रही है।
इस नीति ने दिल्ली में व्यापक असंतोष पैदा किया है। सोशल मीडिया, विशेष रूप से X पर, लोगों ने इसे "नोटबंदी जैसा" कदम बताया, जिसमें वाहन मालिकों को अचानक नई गाड़ियां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, "अगर मैं दूसरे राज्य से दिल्ली अपनी गाड़ी में आता हूँ, तो क्या मुझे वापसी के लिए पेट्रोल साथ लाना होगा?" इस नीति के खिलाफ पेट्रोल पंप मालिकों ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें गैर-अनुपालन के लिए दंड और अभियोजन के खिलाफ सुरक्षा मांगी गई है। अदालत ने दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम से जवाब मांगा है।
इस नीति से दिल्ली के मध्यम और निम्न-आय वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होंगे, जो अपने दैनिक आवागमन के लिए पुराने दोपहिया वाहनों पर निर्भर हैं। आप का तर्क है कि यह नीति न केवल लोगों की आजीविका को प्रभावित करेगी, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हो सकती है, क्योंकि लोग अब सीमावर्ती राज्यों में ईंधन भरने के लिए लंबी दूरी तय करेंगे। इसके अलावा, दिल्ली में पहले से ही पुराने वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर पार्क करने पर प्रतिबंध है, और दोबारा उल्लंघन करने पर वाहनों को स्क्रैप किया जा सकता है। दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम का कहना है कि यह नीति वायु प्रदूषण को कम करने के लिए जरूरी है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि 90% पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे स्थापित किए गए हैं, और शेष में जल्दी ही यह सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार ने पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया है कि वे ईंधन देने से इनकार करने का लॉग रखें और इसके लिए अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें। दिल्ली में ईओएल वाहनों पर ईंधन प्रतिबंध की नीति ने पर्यावरण संरक्षण और जन सुविधा के बीच तनाव को उजागर किया है। आतिशी और आप ने इसे बीजेपी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के बीच साठगांठ का परिणाम बताया है, जबकि सरकार इसे प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम मानती है। यह नीति दिल्ली की 62 लाख गाड़ियों और लाखों परिवारों को प्रभावित कर रही है, और इसका दीर्घकालिक प्रभाव अभी देखा जाना बाकी है।
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