'अगर धांधली है तो चुनाव लड़ना बंद करें', अभिजीत दीपके का विपक्ष पर तीखा हमला; क्रिकेट के 'फिक्स्ड मैच' से की चुनावी व्यवस्था की तुलना

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा है कि अगर उन्हें लगता है कि चुनाव में धांधली हो रही है, तो वे चुनाव लड़ना तुरंत बंद करें।

Sep 25, 2026 - 12:12
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'अगर धांधली है तो चुनाव लड़ना बंद करें', अभिजीत दीपके का विपक्ष पर तीखा हमला; क्रिकेट के 'फिक्स्ड मैच' से की चुनावी व्यवस्था की तुलना
  • Election Commission Controversy: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों को घेरा, कहा- चुनाव लड़कर धांधली को वैधता न दें
  • CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच नया मोड़: अभिजीत दीपके बोले- 'विपक्ष पहले तय करे अपना स्टैंड, दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं'
  • Abhijeet Dipke On Opposition: 'आपकी भागीदारी ही धांधली वाले चुनावों को देती है वैधता', सीजेपी संस्थापक की विपक्षी पार्टियों को दो टूक

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी तीखी राजनीतिक बहस के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अब विपक्षी दलों के रुख पर कड़ा सवाल उठाया है। दीपके ने विपक्षी खेमे को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि यदि विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि देश की चुनावी व्यवस्था स्वतंत्र व निष्पक्ष नहीं है और चुनावों में धांधली हो रही है, तो उन्हें तुरंत प्रभाव से ऐसे चुनावों में हिस्सा लेना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब विपक्ष धांधली का आरोप लगाते हुए भी उन्हीं चुनावों में उतरता है, तो उसकी यही भागीदारी उस कथित रूप से दोषपूर्ण व्यवस्था को लोकतांत्रिक वैधता प्रदान करने का काम करती है।

अभिजीत दीपके का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब एक दिन पहले ही उनकी पार्टी ने निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी और पद न छोड़ने पर 48 घंटे के भीतर राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी थी। अब उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के राजनीतिक रुख को आड़े हाथों लिया है।

  • 'फिक्स्ड मैच' का उदाहरण देकर विपक्ष को घेरा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक बयान में अपनी बात रखते हुए दीपके ने पूरी चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष की भागीदारी की तुलना क्रिकेट के एक 'फिक्स मैच' से की। उन्होंने कहा कि किसी फिक्स्ड मैच में हर गेंद पर जानबूझकर कैच नहीं छोड़ा जाता। मुकाबले को वास्तविक और कड़ा दिखाने के लिए खेल को आखिरी ओवर तक खींचा जाता है और कुछ कैच पकड़े भी जाते हैं।

दीपके ने आरोप लगाया कि मौजूदा चुनावी ढांचे में भी विपक्ष को कुछ सीमित सीटें या जीत इसलिए मिल जाती हैं, ताकि आम जनता और मतदाताओं को यह भरोसा होता रहे कि मुकाबला निष्पक्ष है। उन्होंने कहा, "जब आप धांधली वाले चुनावों में लगातार भाग लेते हैं, तो आप केवल उस व्यवस्था को वैध ठहरा रहे होते हैं और लोगों के बीच इस भ्रम को जिंदा रखने में मदद करते हैं कि सब कुछ निष्पक्ष चल रहा है।"

  • 'अस्तित्व बचाने का डर कैसा, जब पार्टी ही टूट रही हो?'

विपक्षी पार्टियों के चुनावी निर्णयों पर सवाल उठाते हुए सीजेपी प्रमुख ने कहा कि संभवतः कई दल इसलिए चुनाव नहीं छोड़ना चाहते क्योंकि उन्हें डर है कि मैदान से बाहर होने पर उनका राजनीतिक वजूद खत्म हो जाएगा।

उन्होंने इस सोच पर प्रहार करते हुए कहा, "अगर आपके वोट चुराए जा रहे हैं, आपके विधायकों और सांसदों को तोड़कर दूसरी तरफ ले जाया जा रहा है और आपकी मूल पार्टियां ही विभाजित की जा रही हैं, तो आप किस प्रकार के अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे हैं? आप केवल एक ऐसे सिस्टम में खुद को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं जो कभी भी आपको कमजोर कर सकता है। विपक्ष को अपनी राजनीतिक उत्तरजीविता की चिंता करने से पहले देश के लोकतंत्र और पारदर्शी चुनावी व्यवस्था के बारे में सोचना चाहिए और एक मजबूत व स्पष्ट स्टैंड लेना चाहिए।" 

दीपके ने यह भी रेखांकित किया कि चुनावी निष्पक्षता और आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों का दृष्टिकोण अवसरवादी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब किसी विशेष राज्य में चुनाव परिणाम प्रतिकूल आते हैं तो दल धांधली का शोर मचाते हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में वही दल चुप्पी साध लेते हैं। उनके अनुसार, यदि व्यवस्था में खोट है तो यह सवाल हर राज्य, हर चुनाव और हर पार्टी के लिए एक समान गंभीरता का होना चाहिए। दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं कि आप व्यवस्था को अंदर से भ्रष्ट भी बताएं और उसी मंच पर जाकर वोट भी मांगें।

  • क्या है निर्वाचन आयोग से जुड़ा विवाद?

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयोग के दो अन्य सदस्यों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित रूप से असहमति या आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूचियों के प्रबंधन, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने के नियमों और आयोग के आंतरिक डेटाबेस तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल बताए गए।

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई थी। वहीं दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने इन दावों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय में आंतरिक नोट्स, विभिन्न विचार और लिखित आपत्तियां एक सामान्य व स्वस्थ निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इसे किसी संस्थागत संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

दीपके का यह ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। अब देखना होगा कि चुनाव सुधारों और बहिष्कार को लेकर दिए गए इस सीधे आह्वान पर प्रमुख विपक्षी दल क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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