Bihar Flood Relief: क्लासरूम छोड़ बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे खान सर, बोट और वॉकी-टॉकी से संभाली राहत की कमान
बिहार में भीषण बाढ़ के बीच प्रसिद्ध शिक्षक खान सर खुद नाव पर सवार होकर पीड़ितों तक राशन और दवाएं पहुंचाने उतरे हैं। वॉकी-टॉकी से राहत अभियान संभालते उनका वीडियो वायरल हुआ।

पटना। बिहार में गंगा, कोसी और गंडक समेत प्रमुख नदियों के उफान के चलते राज्य के दर्जनों जिले गंभीर बाढ़ की त्रासदी झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में लगभग 49.74 लाख लोग बाढ़ के पानी से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। हजारों गांवों का सड़क संपर्क टूट चुका है और लोग छतों, बांधों तथा ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। संकट की इस विकट घड़ी में जब आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है, तब राजधानी पटना के प्रसिद्ध शिक्षक और सोशल मीडिया पर करोड़ों युवाओं के चहेते 'खान सर' (Khan Sir) अपने क्लासरूम से बाहर निकलकर सीधे जलमग्न इलाकों में ग्राउंड जीरो पर राहत कार्य की कमान संभालते नजर आए हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो और तस्वीरों में खान सर साधारण कपड़े पहने, पसीने से तर-बतर होकर खुद नावों पर अनाज के बोरे, सूखे खाद्य पदार्थ, पेयजल और प्राथमिक जीवनरक्षक दवाइयां लादकर बाढ़ प्रभावित सुदूर इलाकों तक पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं। उनके इस मानवीय प्रयास ने इंटरनेट और सोशल मीडिया मंचों पर व्यापक प्रशंसा बटोरी है, जहां लोग उन्हें 'सच्चा शिक्षक' और 'जमीनी मसीहा' कहकर सैल्यूट कर रहे हैं।
वॉकी-टॉकी और बोट्स के साथ सुव्यवस्थित राहत मिशन
बाढ़ के दौरान राहत सामग्री वितरण में अक्सर अव्यवस्था और भगदड़ की स्थिति बन जाती है। इस जोखिम से निपटने के लिए खान सर ने अपनी पूरी टीम के साथ एक बेहद योजनाबद्ध और हाईटेक तरीका अपनाया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वे कई नावों के बेड़े (फ्लीट) का नेतृत्व कर रहे हैं और आपस में त्वरित संवाद बनाए रखने के लिए वायरलेस वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक वायरल वीडियो में खान सर शाम ढलने के बाद अपनी टीम को वॉकी-टॉकी पर स्पष्ट निर्देश देते सुनाई देते हैं "राहत सामग्री अब कल सुबह बांटी जाएगी। रात हो चुकी है और अंधेरे में वितरण करना उचित नहीं है। गांवों के छोटे बच्चे पानी में कूद सकते हैं जिससे हादसा हो सकता है। शाम के समय कोई भी बोट पानी में नहीं रहेगी। सभी बोट्स बेस स्टेशन पर वापस लौटें। तीन नंबर सप्लाई बोट, रिटर्न टू बेस स्टेशन। ऑल स्टेशन रिपोर्ट।"
इस तरह के पेशेवर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। राहत कार्य के दौरान खान सर का एक ऐसा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे दिनभर की कड़ी मेहनत और भारी सामान ढोने के बाद राहत सामग्री की बोरियों पर ही थके-हारे विश्राम करते दिखाई दे रहे हैं।
जनता बोली- 'न कोई पद, न कोई स्वार्थ; सिर्फ इंसानियत'
खान सर के इस कदम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब और फेसबुक पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। बड़ी संख्या में यूजर्स ने लिखा कि जब जनप्रतिनिधि, मंत्री और कई बड़े नेता केवल हेलिकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण करने तक सीमित रहते हैं या कमरों में बैठकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करते हैं, तब एक शिक्षक का बिना किसी राजनीतिक पद के गंदे और गहरे पानी में उतरकर लोगों की जान बचाना और पेट भरना सच्चे समाज निर्माण का परिचायक है।
कई नागरिकों ने याद दिलाया कि खान सर केवल आपदा में ही आगे नहीं आते, बल्कि वे लंबे समय से गरीब बच्चों को न्यूनतम फीस या मुफ्त में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने, ब्लड बैंक संचालन और चिकित्सालय निर्माण जैसे सामाजिक कार्यों में भी अपना संसाधन लगाते रहे हैं। हालांकि, इंटरनेट पर कुछ आलोचकों ने इसे पब्लिसिटी और कैमरों के सामने की गई गतिविधि भी करार दिया, लेकिन आम जनता और स्थानीय पीड़ितों का कहना है कि जब लोग दाने-दाने को मोहताज हों, तब जमीनी स्तर पर पहुंची वास्तविक मदद ही सबसे बड़ी सच्चाई होती है।
बिहार के 15 से अधिक जिलों में त्राहिमाम की स्थिति
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस समय प्रदेश के 15 से अधिक प्रमुख जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
निचले और दियारा क्षेत्रों में पानी भर जाने से लाखों हेक्टेयर में खड़ी खरीफ फसलें नष्ट हो चुकी हैं। पशुओं के लिए चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से राहत शिविर और सामुदायिक रसोइयां (कम्युनिटी किचन) संचालित की जा रही हैं और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन आपदा का दायरा इतना विशाल है कि कई दूरदराज के मजरों तक सरकारी अमला समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में नागरिक संगठनों और व्यक्तिगत स्तर पर की जाने वाली मदद जीवनदायिनी साबित हो रही है।
समाज के लिए प्रेरणा बना शिक्षक का यह प्रयास
खान सर का यह राहत अभियान केवल कुछ बोरियां राशन बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकट के समय नागरिक जिम्मेदारी का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। शिक्षाविदों का मानना है कि एक सच्चे शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देना नहीं होता, बल्कि समाज को संवेदना, सेवा और मानवीय मूल्यों का व्यावहारिक पाठ पढ़ाना भी होता है।
बाढ़ की विनाशलीला के बीच खान सर द्वारा प्रस्तुत इस मिसाल ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं और सक्षम लोगों को आगे आकर आपदा पीड़ितों के आंसू पोंछने के लिए प्रेरित किया है।
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