Russia Ukraine War: 'पुतिन शांति चाहते हैं, जेलेंस्की युद्ध खींचना चाहते हैं'- संघर्ष विराम पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
रूस-यूक्रेन युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप का दावा है कि पुतिन युद्ध समाप्त कर समझौता चाहते हैं, जबकि जेलेंस्की संघर्ष को लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं।

वाशिंगटन/न्यूयॉर्क। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव को समाप्त कराने के राजनयिक प्रयासों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सम्मेलन के ठीक पहले ट्रंप ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब इस युद्ध को समाप्त कर एक व्यावहारिक समझौता (डील) करने के पक्ष में हैं, जबकि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का रवैया इस संघर्ष को बेवजह लंबा खींचने और टकराव को गहराने वाला है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक संवाद में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच जारी खूनी संघर्ष को रोककर निर्दोष नागरिकों की जान बचाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर इस युद्ध को अगले दस वर्षों तक खिंचते नहीं देखना चाहता। ट्रंप के अनुसार, युद्ध के मैदान में लगातार हो रही मौतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों के बावजूद कीव का नेतृत्व युद्धविराम के व्यावहारिक प्रस्तावों पर आगे बढ़ने में हिचकिचाहट दिखा रहा है।
'पुतिन समझौता चाहते हैं, लेकिन कीव की भूमिका अड़ियल'
अमेरिकी नेतृत्व और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच हाल ही में हुए फोन संवाद और बैकचैनल कूटनीति के बाद ट्रंप ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने संकेत दिया कि जेलेंस्की के साथ हुई बातचीत उनकी अपेक्षा के अनुरूप परिणामोन्मुख नहीं रही। ट्रंप ने कहा कि रूस के रुख में समझौते की गुंजाइश दिखाई दे रही है और पुतिन संघर्ष को रोकने के लिए तैयार हैं, बशर्ते यूक्रेन भी व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाए।
ट्रंप ने दोनों राष्ट्रपतियों के बीच गहरे व्यक्तिगत अविश्वास और कटुता को शांति प्रक्रिया में सबसे बड़ा अवरोध बताया। उनका तर्क है कि जब तक दोनों देशों के नेता अपने हठ को छोड़कर यथार्थवादी जमीन पर बातचीत नहीं करेंगे, तब तक शांति स्थापित करना कठिन होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इससे न केवल यूक्रेन का बुनियादी ढांचा पूरी तरह तबाह हो जाएगा, बल्कि पश्चिमी देशों पर आर्थिक और सुरक्षा संबंधी दबाव भी असहनीय स्तर तक बढ़ जाएगा।
रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से वैश्विक संकट की चिंता
ट्रंप के इस सख्त रुख के पीछे एक बड़ा आर्थिक और ऊर्जा संबंधी कारण भी माना जा रहा है। हाल के दिनों में यूक्रेन द्वारा रूस की सीमा के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों और डिपो पर किए जा रहे लगातार ड्रोन हमलों को लेकर वाशिंगटन असहज है। ट्रंप ने चिंता जताई है कि यूक्रेन द्वारा रूसी डीजल रिफाइनरियों को निशाना बनाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों और विशेष रूप से डीजल की भारी कमी हो सकती है।
रूस दुनिया में रिफाइंड तेल उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेनी हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आई है। अमेरिकी प्रशासन को डर है कि यदि वैश्विक बाजार में आपूर्ति शृंखला बाधित हुई, तो तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं, मुद्रास्फीति और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए ट्रंप ने यूक्रेन से रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का आग्रह किया है, ताकि तनाव में कमी (डी-एस्केलेशन) की शुरुआत हो सके।
जेलेंस्की का पलटवार: 'आक्रमणकारी को भी भुगतना होगा'
दूसरी ओर, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने ट्रंप के दावों और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने के सुझावों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के पहले दिन से ही अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए लड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति की वास्तविक शुरुआत तभी हो सकती है जब रूस यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र, बंदरगाहों, नागरिक ठिकानों और खाद्य निर्यात मार्गों पर हमले पूरी तरह बंद करे।
जेलेंस्की ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब ऐसा नहीं हो सकता कि केवल हमला झेलने वाला देश ही बर्बादी का दंश सहे; जो देश आक्रमण कर रहा है, उसे भी उसकी कीमत चुकानी होगी। यूक्रेन का तर्क है कि रूसी रिफाइनरियों पर हमले युद्ध के वित्तपोषण को रोकने के लिए आवश्यक हैं। इसके साथ ही, यूक्रेन ने किसी भी ऐसे शांति समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है जिसमें उसकी जमीन पर रूस के अवैध कब्जे को मान्यता दी जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में आमने-सामने की वार्ता पर नजर
यह तीखा बयानबाजी ऐसे नाजुक मोड़ पर आई है जब वोलोदिमीर जेलेंस्की संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। इस दौरे के दौरान उनकी अमेरिकी नेतृत्व, यूरोपीय देशों के शीर्ष नेताओं और अमेरिकी सांसदों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह सार्वजनिक बयान शांति वार्ता की मेज पर कीव पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकता है। अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन क्षेत्रीय रियायतों (टेरिटोरियल कंसेशन्स) और सुरक्षा गारंटियों को लेकर अपने रुख में लचीलापन दिखाए, ताकि पुतिन के साथ त्रिपक्षीय संवाद का रास्ता खुल सके। आने वाले दिनों में न्यूयॉर्क में होने वाली ये बैठकें यह तय करेंगी कि क्या पूर्वी यूरोप में तोपों की गड़गड़ाहट थमेगी या फिर यह संघर्ष और अधिक विनाशकारी रूप अख्तियार करेगा।
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