Petrol Diesel Prices Today: 22 जुलाई 2026 को आपके शहर में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? देखें पूरी रेट लिस्ट
22 जुलाई 2026 को देश भर में पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी हो गए हैं। दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई और कोलकाता समेत प्रमुख शहरों की ताजा दरें यहां देखें।

- Petrol Diesel Rate Today 22 July 2026: दिल्ली से मुंबई और यूपी तक ईंधन की दरें जारी, जानें लेटेस्ट फ्यूल प्राइज
- पेट्रोल-डीजल के नए भाव जारी: दिल्ली-यूपी में सस्ता तो एमपी-राजस्थान में महंगा, चेक करें अपने शहर की रेट लिस्ट
- पेट्रोल-डीजल की ताजा दरें जारी: दिल्ली में ₹102.12 तो मुंबई में ₹111.21 प्रति लीटर, चेक करें राज्यवार रेट
देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने बुधवार, 22 जुलाई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की ताजा दरें जारी कर दी हैं। आज राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन के दामों में कुल मिलाकर स्थिरता देखी जा रही है, हालांकि विभिन्न राज्यों में वैट (VAT) और स्थानीय परिवहन शुल्क के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में बड़ा अंतर बना हुआ है। जहां दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल अपेक्षाकृत काफी सस्ता मिल रहा है, वहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान, कोलकाता और मुंबई जैसे राज्यों तथा महानगरों में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इस मूल्य भिन्नता का सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक बजट, लंबी दूरी के यात्रियों और फ्रेट ट्रांसपोर्टेशन की लागत पर पड़ रहा है।
तेल कंपनियों द्वारा 22 जुलाई 2026 के लिए जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की आधार कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसके बावजूद राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय वैट (Value Added Tax) और माल ढुलाई (Freight Charges) के कारण विभिन्न राज्यों के बीच ईंधन के दामों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
उत्तर भारत के बड़े हिस्से जैसे दिल्ली और उत्तर प्रदेश में जहां ईंधन की दरें नियंत्रण में हैं, वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में वैट की दरें ऊंची होने के कारण उपभोक्ताओं को अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है।
देशभर के प्रमुख शहरों और राज्यों में 22 जुलाई 2026 को लागू पेट्रोल और डीजल की दरें निम्नवत हैं:
| शहर/राज्य | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| नोएडा | 101.96 | 95.44 |
| लखनऊ | 101.86 | 95.36 |
| कानपुर | 101.86 | 95.36 |
| बरेली | 101.86 | 95.36 |
| शाहजहांपुर | 101.86 | 95.36 |
| बाराबंकी | 101.86 | 95.36 |
| मुरादाबाद | 101.86 | 95.36 |
| आगरा | 101.86 | 95.36 |
| हरदोई | 101.86 | 95.36 |
| कोलकाता | 113.51 | 99.82 |
| पुणे | 112.02 | 97.83 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| असम | 105.73 | 97.23 |
| चेन्नई / तमिलनाडु | 107.76 | 99.55 |
| मध्य प्रदेश | 114.54 | 99.64 |
| राजस्थान | 113.50 | 98.25 |
आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, आगरा, बरेली और शाहजहांपुर में यूनिफॉर्म रेट (लगभग ₹101.86/लीटर) लागू है, जो दिल्ली-एनसीआर की दरों के काफी करीब है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में पेट्रोल की कीमत ₹114.54 प्रति लीटर और राजस्थान में ₹113.50 प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।
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ट्रांसपोर्टर्स और लॉजिस्टिक्स एसोसिएशन: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में डीजल के ऊंचे दाम लंबी दूरी के ट्रक ट्रांसपोर्टर्स के लिए चिंता का विषय हैं। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है, जिसका असर अंततः सब्जियों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
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आम उपभोक्ताओं की राय: दिल्ली और यूपी के वाहन चालकों ने कीमतों में बनी स्थिरता पर संतोष व्यक्त किया है। हालांकि, राजस्थान और एमपी के निवासियों का कहना है कि राज्य सरकारों को वैट में कटौती कर आम जनता और किसानों को राहत प्रदान करनी चाहिए, क्योंकि कृषि कार्यों में डीजल की खपत सर्वाधिक होती है।
ईंधन दरों में क्षेत्रीय विषमता का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है:
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पारिवारिक बजट पर असर: दिल्ली, नोएडा और यूपी में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने से दैनिक यात्रियों और निजी वाहन मालिकों को राहत मिल रही है।
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माल ढुलाई और महंगाई: कोलकाता, मुंबई, एमपी और राजस्थान में डीजल की दरें ₹98 से ₹99.82 के बीच रहने से अंतरराज्यीय परिवहन महंगा हो रहा है।
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कृषि लागत: मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों में महंगे डीजल का असर सीधे किसानों के सिंचाई और जुताई के बजट पर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की वैश्विक कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर आगामी दिनों में भारतीय तेल कंपनियों का रुख निर्भर करेगा। यदि वैश्विक कच्चे तेल के भाव में स्थिरता बनी रहती है, तो घरेलू बाजार में भी दरें स्थिर रहने की संभावना है। हालांकि, राज्यों के बीच टैक्स दरों के बड़े अंतर को कम करने के लिए जीएसटी के दायरे में पेट्रोलियम उत्पादों को लाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ सकती है।
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