Petrol Diesel Price Today: दिल्ली, यूपी, मुंबई से राजस्थान तक, जानिए आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
Petrol Diesel Price Today 23 June 2026: दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता और राजस्थान समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव जारी।

- पेट्रोल डीजल की नई दरें जारी: नोएडा, लखनऊ, कोलकाता और पुणे सहित देश के प्रमुख शहरों में ईंधन का ताजा भाव
- पेट्रोल-डीजल के दाम में उतार-चढ़ाव, जानिए आज आपके शहर में किस भाव मिल रहा है तेल
- Fuel Price Update: देश के प्रमुख शहरों और राज्यों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी, देखें पूरी लिस्ट
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने आज, 23 जून 2026 को देश के प्रमुख शहरों और राज्यों में पेट्रोल और डीजल के ताजा भाव जारी कर दिए हैं। दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, मुंबई, कोलकाता, पुणे और चेन्नई जैसे महानगरों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा और हरदोई में भी ईंधन की कीमतों में मामूली स्थानीय बदलाव देखे गए हैं। इसके अतिरिक्त असम, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी वैट (VAT) और माल ढुलाई शुल्क के अंतर के कारण तेल की कीमतों में विविधता दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मांग और आपूर्ति के आधार पर इन दामों में और बदलाव होने की संभावना बनी हुई है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों और विदेशी मुद्रा विनिमय दर के आधार पर प्रतिदिन सुबह 6 बजे किया जाता है। देश की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) वैश्विक रुझानों की समीक्षा के बाद घरेलू बाजार के लिए नई दरें लागू करती हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क (Excise Duty) तय किए जाने के बाद भी अलग-अलग राज्यों में स्थानीय बिक्री कर या वैट (VAT) और डीलर कमीशन अलग होने की वजह से हर शहर में उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल अलग-अलग कीमतों पर मिलता है।
आज सुबह जारी की गई दरों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में ईंधन की कीमतें स्थिर या आंशिक बदलाव के साथ बनी हुई हैं। महानगरों की बात करें तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ईंधन की कीमतें सबसे नियंत्रण में दिख रही हैं, वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में करों के ऊंचे ढांचे के कारण दरें देश में सबसे अधिक बनी हुई हैं। कोलकाता और चेन्नई जैसे तटीय व प्रमुख महानगरों में भी स्थानीय परिवहन खर्चों के समायोजन के बाद मामूली अंतर देखने को मिला है। औद्योगिक शहर पुणे में भी दरें मुंबई के करीब ही दर्ज की जा रही हैं।
| शहर/जगह | पेट्रोल भाव | डीजल भाव |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| नोएडा | 102.08 | 95.50 |
| लखनऊ | 102.05 | 95.55 |
| कानपुर | 101.59 | 95.43 |
| बरेली | 101.97 | 95.30 |
| शाहजहांपुर | 102.01 | 95.17 |
| बाराबंकी | 102.40 | 95.68 |
| मुरादाबाद | 102.10 | 95.40 |
| आगरा | 101.54 | 95.02 |
| हरदोई | 102.24 | 95.66 |
| कोलकाता | 113.47 | 99.82 |
| पुणे | 111.52 | 98.37 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| असम (औसत) | 106.42 | 94.50 |
| चेन्नई | 107.76 | 99.55 |
| तमिलनाडु (औसत) | 108.95 | 99.80 |
| मध्य प्रदेश (औसत) | 115.43 | 100.49 |
| राजस्थान (औसत) | 112.70 | 97.78 |
उत्तर प्रदेश के परिदृश्य पर नजर डालें तो लखनऊ और नोएडा के बीच का अंतर मुख्य रूप से स्थानीय करों पर निर्भर करता है। इसके अलावा कानपुर, बरेली, मुरादाबाद और आगरा जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में माल ढुलाई शुल्क (Freight Charges) के कारण कीमतों में कुछ पैसों का हेरफेर देखा गया है। शाहजहांपुर, बाराबंकी और हरदोई जैसे ग्रामीण व अर्ध-शहरी जिलों में भी आपूर्ति केंद्रों से दूरी के आधार पर तेल की कीमतें तय की गई हैं। पूर्वोत्तर के राज्य असम और पश्चिमी राज्य राजस्थान के विभिन्न जिलों में राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले करों के कारण तेल की कीमतें पड़ोसी राज्यों की तुलना में अलग हैं।
तेल की इन कीमतों पर आम उपभोक्ताओं, ट्रांसपोर्टरों और डीलरों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि डीजल की कीमतों में स्थिरता रहने से माल ढुलाई की लागत पर अचानक कोई अतिरिक्त दबाव नहीं आया है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरावट का लाभ घरेलू उपभोक्ताओं को और अधिक ट्रांसफर किया जाए, तो लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ी राहत मिल सकती है।
पेट्रोल पंप डीलरों का कहना है कि दैनिक आधार पर होने वाले आंशिक बदलावों से इन्वेंट्री प्रबंधन में थोड़ी सतर्कता बरतनी पड़ती है। आम उपभोक्ताओं, विशेषकर नौकरीपेशा वर्ग और दैनिक यात्रियों का मानना है कि पेट्रोल के दाम बजट को सीधे प्रभावित करते हैं, इसलिए सरकार को करों में कटौती कर कीमतों को और अधिक तर्कसंगत बनाना चाहिए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति संतुलित होने के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में कोई बड़ा उछाल देखने को नहीं मिल रहा है।
पेट्रोल और डीजल केवल वाहन ईंधन नहीं हैं, बल्कि वे पूरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। डीजल की कीमतों में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र (पंपसेट और ट्रैक्टर संचालन) और माल ढुलाई उद्योग को प्रभावित करता है। यदि तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो इससे थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर महंगाई दर को स्थिर रखने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, यदि किसी राज्य में वैट बढ़ने के कारण कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तो वहां स्थानीय स्तर पर फल, सब्जियां और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं महंगी होने लगती हैं। वर्तमान परिदृश्य में, देश के अधिकांश हिस्सों में कीमतों के दायरे में रहने से बाजार पर कोई नकारात्मक दबाव नहीं दिख रहा है।
आने वाले हफ्तों में ईंधन की कीमतों का रुख मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करेगा पहला, ओपेक (OPEC) देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर लिए जाने वाले फैसले और दूसरा, वैश्विक स्तर पर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहता है, तो भारतीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बेहद कम है। उपभोक्ता अपनी जेब पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तरफ भी तेजी से रुख कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक ईंधन की मांग पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
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