Old Monk Rum FSSAI Action: 'ओल्ड मंक' समेत कई ब्रांड्स पर FSSAI का शिकंजा, फ्लेवरिंग और गलत लेबलिंग पर बिक्री पर लगी रोक

FSSAI Action On Old Monk Rum: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ओल्ड मंक रम और कई व्हिस्की ब्रांड्स की बिक्री पर रोक लगा दी है।

Aug 5, 2026 - 12:53
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Old Monk Rum FSSAI Action: 'ओल्ड मंक' समेत कई ब्रांड्स पर FSSAI का शिकंजा, फ्लेवरिंग और गलत लेबलिंग पर बिक्री पर लगी रोक
Old Monk Rum FSSAI Action
  • FSSAI Ban On Rum And Whisky: ओल्ड मंक समेत कई शराब ब्रांड्स की बिक्री पर FSSAI का एक्शन, जानें वजह
  • 'ओल्ड मंक' के शौकीनों के लिए बड़ी खबर! FSSAI की सख्त कार्रवाई, कई पॉपुलर रम और व्हिस्की की बिक्री पर लगाई रोक
  • FSSAI Action On Liquor Brands: 'ओल्ड मंक' रम और व्हिस्की के कई वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक, FSSAI ने लेबलिंग नियमों के उल्लंघन पर लिया एक्शन

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश की सबसे लोकप्रिय शराब ब्रांड्स में से एक 'ओल्ड मंक' (Old Monk) रम और कई अन्य व्हिस्की ब्रांड्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। 5 अगस्त 2026 को सामने आई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, खाद्य सुरक्षा नियामक ने फ्लेवरिंग मानकों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन के चलते इन अल्कोहल उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी है। FSSAI द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई का सीधा असर शराब निर्माण कंपनियों, विक्रेताओं और उपभोक्ताओं पर पड़ा है। नियामक ने कंपनियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जब तक सभी सुरक्षा मानकों और लेबलिंग दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन नहीं होता, तब तक प्रभावित लॉट और वेरिएंट्स का बाजार वितरण और बिक्री स्थगित रहेगी।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश के शराब उद्योग में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'ओल्ड मंक' रम का निर्माण करने वाली कंपनी मोहन मीकिन (Mohan Meakin) समेत कई अन्य डिस्टिलरीज़ के विशिष्ट उत्पादों की बिक्री और वितरण को निलंबित कर दिया है। FSSAI ने यह दंडात्मक कार्रवाई अल्कोहलिक बेवरेज रेगुलेशन के तहत तय किए गए फ्लेवरिंग एजेंट्स के इस्तेमाल और बोतलों पर दर्ज लेबलिंग मानकों में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के आधार पर की है। नियामक का मानना है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की सामग्री और उसमें मिलाए जाने वाले कृत्रिम या प्राकृतिक फ्लेवर की सटीक जानकारी मिलना अनिवार्य है, जिसमें लापरवाही पाई गई है।

FSSAI की केंद्रीय निगरानी टीमों द्वारा देश भर में अल्कोहल उत्पादों के नमूनों की नियमित जांच और लेबलिंग ऑडिट की जा रही थी। इस जांच के दौरान यह बात सामने आई कि 'ओल्ड मंक' के कुछ नए और फ्लेवर्ड वेरिएंट्स के साथ-साथ बाजार में बिक रही कुछ अन्य व्हिस्की ब्रांड्स की बोतलों पर दी गई जानकारी FSSAI के 'अल्कोहलिक बेवरेज स्टैंडर्ड्स' के अनुरूप नहीं थी।

नियमों के अनुसार, शराब में इस्तेमाल होने वाले फ्लेवरिंग सबस्टेंस और एडिटिव्स का स्पष्ट उल्लेख बोतल के मुख्य लेबल पर होना आवश्यक है। जांच में पाया गया कि कुछ बैचों में स्वीकृत सीमा से अलग या बिना उचित घोषणा के फ्लेवरिंग घटकों का प्रयोग किया गया था। इसके साथ ही लेबल पर वैधानिक चेतावनियों और पोषण/सामग्री विवरण के फॉन्ट साइज व प्लेसमेंट में भी खामियां पाई गईं। इस आधार पर FSSAI ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस थमाया और संबंधित बैच तथा वेरिएंट्स की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया।

इस सख्त कदम पर FSSAI के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि खाद्य और पेय पदार्थों की सुरक्षा तथा पारदर्शिता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, चाहे ब्रांड कितना भी पुराना या लोकप्रिय क्यों न हो। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सभी शराब निर्माताओं को सुरक्षा मानकों का 100% पालन करना होगा।

दूसरी ओर, शराब निर्माण कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह मामला मुख्य रूप से लेबलिंग की तकनीकी व्याख्या और नए नियमों के अनुपालन से जुड़ा है। कंपनियों ने आश्वासन दिया है कि वे FSSAI द्वारा उठाए गए सभी सवालों का प्राथमिकता से जवाब दे रही हैं और मानकों के अनुसार लेबल में आवश्यक संशोधन कर जल्द ही नए स्वीकृत बैच बाजार में पेश करने की प्रक्रिया पूरी कर लेंगी।

FSSAI के इस फैसले का व्यापक असर भारतीय शराब बाजार पर दिखने लगा है। 'ओल्ड मंक' की देश में विशाल फैन फॉलोइंग और मांग को देखते हुए कई राज्यों के वाइन शॉप्स और रीटेल आउटलेट्स से प्रभावित वेरिएंट्स का स्टॉक वापस लिया जा रहा है। इसका सीधा वित्तीय प्रभाव डिस्टिलरी कंपनियों के राजस्व और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से शराब उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियां अपने विनिर्माण प्रक्रिया व पैकेजिंग मानकों को लेकर अधिक सतर्क होंगी, जिससे अंततः ग्राहकों को सही और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेगा।

FSSAI ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रभावित कंपनियां अपने उत्पादों के नमूनों की दोबारा जांच कराकर संशोधित लेबल के साथ नियामक की अंतिम मंजूरी (Approval) हासिल नहीं कर लेतीं, तब तक प्रतिबंधित वेरिएंट्स की बिक्री फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य स्तरीय आबकारी विभागों को भी निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनियां जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाकर FSSAI के पास अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करेंगी।

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