रणबीर कपूर के राम लुक पर मचे घमासान के बीच आए 'रामायण' के ओरिजिनल राम, अरुण गोविल ने आलोचना करने वालों को दिया करारा जवाब
परंपरा और आधुनिकता के बीच के इस द्वंद्व को समझाते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर दौर की अपनी एक अलग सिनेमाई भाषा, तकनीक और प्रस्तुतीकरण का तरीका होता है। आज से तीन-चार दशक पहले जब टेलीविजन पर इस महागाथा को दिखाया गया था, तब
- नितेश तिवारी की भव्य फिल्म में भगवान राम के किरदार पर उठे सवालों पर दिग्गज अभिनेता का बड़ा बयान, अभिनय क्षमता पर जताया पूरा भरोसा
- किरदार में ढलने से पहले ही कलाकारों के मूल्यांकन को अरुण गोविल ने बताया अनुचित, सिनेमाई बदलावों को खुले दिल से स्वीकार करने की दी सलाह
भारतीय सिनेमा के इतिहास में पौराणिक गाथाओं पर आधारित फिल्मों का निर्माण हमेशा से एक बेहद संवेदनशील और चर्चा का विषय रहा है। महान निर्देशक नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही आगामी मेगा-बजट फिल्म 'रामायण' इन दिनों मनोरंजन जगत की सबसे बड़ी सुर्खियों में शुमार है। इस भव्य सिनेमाई परियोजना में बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेता रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की शूटिंग शुरू होने और सेट से कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर लीक होने के बाद से ही रणबीर कपूर के लुक, उनकी शारीरिक बनावट और इस पवित्र किरदार के लिए उनके चयन को लेकर सोशल मीडिया और सिनेमाई गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। आम दर्शकों का एक बड़ा वर्ग इस बात को लेकर संशय में है कि आधुनिक किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता इस कालजयी और मर्यादा पुरुषोत्तम के चरित्र के साथ कितना न्याय कर पाएंगे। इस पूरे विवाद और सोशल मीडिया पर हो रही चौतरफा आलोचनाओं के बीच अब दूरदर्शन के ऐतिहासिक धारावाहिक में भगवान राम का कालजयी किरदार निभाने वाले दिग्गज अभिनेता अरुण गोविल का एक बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक बयान सामने आया है। दशकों से करोड़ों भारतीयों के दिलों में भगवान राम की छवि के रूप में बसे अरुण गोविल ने इस नए सिनेमाई रूपांतरण और उसमें रणबीर कपूर की भूमिका को लेकर अपना दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया है कि फिल्म के पूरी तरह से तैयार होने और पर्दे पर आने से पहले ही लोग केवल कुछ तस्वीरों के आधार पर किसी कलाकार की क्षमता का मूल्यांकन कैसे कर सकते हैं। उन्होंने इस प्रकार की जल्दबाजी में की जाने वाली टिप्पणियों को पूरी तरह से अनुचित ठहराते हुए शांत रहने की सलाह दी है।
अरुण गोविल ने रणबीर कपूर की अभिनय प्रतिभा और उनके पिछले फिल्मी करियर की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि वे एक अत्यंत समर्पित, संस्कारी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता हैं। उनके अनुसार, किसी भी अभिनेता को एक पवित्र और ऐतिहासिक चरित्र को पर्दे पर जीवंत करने के लिए समय, सही निर्देशन और रचनात्मक स्वतंत्रता की आवश्यकता होती है। रणबीर कपूर जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कलाकार के पास वह गहराई और समझ मौजूद है जो इस तरह के जटिल और पूजनीय चरित्र को निभाने के लिए बेहद जरूरी होती है। इसलिए, बिना फिल्म देखे या उनके पूरे अभिनय को समझे बिना उन पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाना या उनके लुक की आलोचना करना मनोरंजन उद्योग के रचनात्मक सिद्धांतों के खिलाफ है।
परंपरा और आधुनिकता के बीच के इस द्वंद्व को समझाते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर दौर की अपनी एक अलग सिनेमाई भाषा, तकनीक और प्रस्तुतीकरण का तरीका होता है। आज से तीन-चार दशक पहले जब टेलीविजन पर इस महागाथा को दिखाया गया था, तब तकनीक बेहद सीमित थी और प्रस्तुति का ढंग पूरी तरह से अलग था, जिसे दर्शकों ने अपार प्यार दिया। लेकिन आज का युवा दर्शक वर्ग वैश्विक स्तर के विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) और आधुनिक सिनेमाई ट्रीटमेंट को देखना पसंद करता है। नितेश तिवारी एक बेहद समझदार और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक हैं, जो भारतीय संस्कृति और मूल्यों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, ऐसे में यह पूरी तरह से तय है कि वे इस महाकाव्य की मर्यादा और पवित्रता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
दिलचस्प बात यह भी है कि अरुण गोविल खुद भी नितेश तिवारी की इस आगामी त्रिआयामी (3D) फिल्म 'रामायण' का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जहां वे अयोध्या के राजा और भगवान राम के पिता चक्रवर्ती सम्राट दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म के सेट पर रणबीर कपूर के साथ काम करने के अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सेट पर युवा अभिनेता का व्यवहार बेहद शालीन, अनुशासित और बड़ों के प्रति सम्मान से भरा होता है। वे अपने किरदार की गरिमा को समझने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और उन्होंने अपनी जीवनशैली में भी कई बड़े सकारात्मक बदलाव किए हैं। ऐसे समर्पित कलाकार पर केवल पुरानी धारणाओं के आधार पर उंगली उठाना किसी भी दृष्टिकोण से न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। फिल्म उद्योग के भीतर से आ रही खबरों के अनुसार, रणबीर कपूर इस किरदार को पूरी प्रामाणिकता देने के लिए विशेष तौर पर डिक्शन और संस्कृत उच्चारण की कक्षाएं ले रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस सात्विक भूमिका के लिए अपनी शारीरिक भाषा और खान-पान में भी व्यापक बदलाव किए हैं, जिसे फिल्म से जुड़े क्रू मेंबर्स एक बेहतरीन कड़ा अभ्यास मान रहे हैं।
धार्मिक और पौराणिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर दर्शकों की अत्यधिक संवेदनशीलता पर बात करते हुए यह भी देखा गया है कि अतीत में कई फिल्मों को लेकर बड़े विवाद खड़े हुए हैं, जिससे दर्शक अब हर नए प्रयास को बहुत ही बारीकी और संदेह की नजर से देखते हैं। अरुण गोविल ने दर्शकों की इस चिंता को पूरी तरह स्वाभाविक माना कि भगवान राम की छवि के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए, लेकिन उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस नई प्रस्तुति का उद्देश्य सनातन संस्कृति के महान संदेश को वैश्विक स्तर पर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। जब तक पूरी फिल्म सामने न आ जाए, तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना रचनात्मकता का गला घोंटने जैसा होगा और सभी को फिल्म की रिलीज का धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए।
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