मध्य प्रदेश में किसानों की बल्ले-बल्ले: गेहूं की MSP पर रू.40 प्रति क्विंटल बोनस का ऐलान, अब रू.2,625 की दर से होगी सरकारी खरीदी।
मध्य प्रदेश सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर रू.40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने का फैसला किया
- अन्नदाताओं के लिए 'किसान कल्याण वर्ष' का उपहार; मोहन यादव कैबिनेट ने सिंचाई परियोजनाओं को दी हरी झंडी, रीवा को मिली करोड़ों की सौगात।
- खेती-किसानी को नई रफ्तार: गेहूं बोनस के साथ सिंचाई नेटवर्क का होगा विस्तार, रू.2,585 के समर्थन मूल्य पर बोनस का 'टॉप-अप' देगी सरकार।
मध्य प्रदेश सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर रू.40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य रू.2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार के इस रू.40 के 'टॉप-अप' बोनस के बाद अब मध्य प्रदेश के किसानों से गेहूं की खरीदी रू.2,625 प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि यह बोनस राशि सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। इस निर्णय से प्रदेश के लाखों पंजीकृत किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा, जो उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा। किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि को भी बढ़ा दिया है। पहले यह सीमा 7 मार्च निर्धारित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 मार्च 2026 कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश का कोई भी पात्र किसान पंजीयन से वंचित न रहे। किसानों के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की सुविधा भी प्रदान की गई है, जिससे वे अपनी सुविधानुसार खरीदी केंद्र और समय का चुनाव कर सकें। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं का उपार्जन करना है, जिसके लिए प्रदेश भर में हजारों उपार्जन केंद्र सक्रिय किए गए हैं।
- चरणबद्ध तरीके से रू.2,700 का लक्ष्य
राज्य सरकार ने अपने संकल्प पत्र में गेहूं की खरीदी रू.2,700 प्रति क्विंटल करने का वादा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार इस लक्ष्य की ओर चरणबद्ध तरीके से बढ़ रही है और वर्ष 2028 तक इसे पूर्णतः लागू कर दिया जाएगा।
- रीवा की पनवार सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को मंजूरी
सिंचाई के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाने के उद्देश्य से कैबिनेट ने रीवा जिले के लिए 'पनवार सूक्ष्म सिंचाई परियोजना' (Panwar Micro Irrigation Project) को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत रू.228.42 करोड़ आंकी गई है। इस परियोजना के माध्यम से रीवा जिले की जवा और त्योंथर तहसीलों के लगभग 37 गांवों की 7,350 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) तकनीक का उपयोग होने से पानी की बर्बादी कम होगी और कम लागत में अधिक क्षेत्र में खेती संभव हो पाएगी। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगी, जो लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे थे।
- किसान कल्याण वर्ष 2026 और बिजली आपूर्ति
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में घोषित किया है। इसके तहत सरकार न केवल आर्थिक लाभ दे रही है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार कर रही है। किसानों की एक बड़ी समस्या रात में सिंचाई करने की थी, जिससे जंगली जानवरों का खतरा और ठंड की समस्या बनी रहती थी। इसे देखते हुए सरकार ने अब सिंचाई के लिए दिन के समय पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। सौर ऊर्जा और पीएम-कुसुम योजना के समन्वय से कृषि फीडरों को ऊर्जीकृत किया जा रहा है ताकि किसानों को दिन में ही निर्बाध बिजली मिल सके और वे सुरक्षित तरीके से अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें।
- सिंचाई परियोजनाओं का व्यापक विस्तार
पनवार परियोजना के अलावा, राज्य सरकार ने नर्मदा घाटी विकास और जल संसाधन विभाग के माध्यम से कई अन्य छोटी-बड़ी सिंचाई योजनाओं पर भी तेजी से काम शुरू किया है। कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के तहत भी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए रू.4,525 करोड़ के कार्यों को मंजूरी दी है, जिसमें ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाना शामिल है ताकि किसान अपनी उपज सुगमता से मंडियों तक पहुँचा सकें। केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना जैसी बड़ी अंतर-राज्यीय परियोजनाओं पर भी केंद्र के साथ मिलकर काम किया जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश के सिंचित क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
- दलहन और अन्य फसलों पर भी प्रोत्साहन
सरकार का ध्यान केवल गेहूं तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने उड़द की फसल पर भी रू.600 प्रति क्विंटल का विशेष बोनस देने की घोषणा की है, ताकि दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। मध्य प्रदेश वर्तमान में देश का अग्रणी दलहन उत्पादक राज्य है और सरकार इस स्थिति को और मजबूत करना चाहती है। विविधीकृत खेती को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यानिकी फसलों और मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन पर भी विभिन्न अनुदान योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। इससे किसानों की निर्भरता केवल एक फसल पर नहीं रहेगी और वे बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रह सकेंगे।
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