भारत-ओमान के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर: 10 अरब डॉलर से अधिक के व्यापार को मिलेगी नई गति, खाड़ी क्षेत्र और अफ्रीका तक पहुंच बढ़ेगी।
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) जिसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के रूप में जाना जाता है, 18 दिसंबर 2025 को मस्कट
भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) जिसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के रूप में जाना जाता है, 18 दिसंबर 2025 को मस्कट में हस्ताक्षर होने जा रहा है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। समझौते पर हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की उपस्थिति में होगा। यह ओमान का लगभग दो दशकों में पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी और इस साल पूरी हो गई। समझौते से दोनों देशों के बीच माल, सेवाओं और निवेश में आसानी होगी।
दोनों देशों के बीच 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 10.61 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 4.1 अरब डॉलर और आयात 6.55 अरब डॉलर रहा। भारत ओमान को खनिज ईंधन, अनाज, जहाज, नावें, विद्युत मशीनरी, लोहा और इस्पात, चाय, कॉफी, मसाले, कपड़े, खाद्य सामग्री, रसायन और इंजीनियरिंग सामान निर्यात करता है। ओमान से भारत मुख्य रूप से खनिज ईंधन, उर्वरक, कार्बनिक रसायन और प्लास्टिक आयात करता है। समझौते से इन क्षेत्रों में शुल्क कम या समाप्त होने से व्यापार में वृद्धि होगी। यह समझौता कई क्षेत्रों में अवसर खोलेगा, जिनमें कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल, आभूषण, एग्रोकेमिकल, नवीकरणीय ऊर्जा और ऑटो कंपोनेंट्स शामिल हैं। ओमान की रणनीतिक स्थिति के कारण यह भारत के लिए खाड़ी सहयोग परिषद क्षेत्र, पूर्वी यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका तक पहुंच का द्वार बनेगा। दोनों देश ऊर्जा संक्रमण, खाद्य सुरक्षा, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाएंगे। नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएं संभव हैं।
समझौते से सेवाओं में भी सहयोग बढ़ेगा, जैसे पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान। ओमान में भारतीय निवेश 5 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिसमें ग्रीन स्टील, ग्रीन अमोनिया और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। भारतीय कंपनियां ओमान को लंबी अवधि का आधार मान रही हैं। यह समझौता दोनों देशों की विकास योजनाओं से जुड़ता है, जहां भारत का विकसित भारत 2047 और ओमान का विजन 2040 युवा केंद्रित विकास पर जोर देते हैं। ओमान भारत का खाड़ी सहयोग परिषद देशों में तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। भारत पहले से संयुक्त अरब अमीरात के साथ ऐसा समझौता लागू कर चुका है। यह समझौता निवेश को आकर्षित करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद करेगा। दोनों देशों के बीच 70 वर्षों की कूटनीतिक संबंधों की वर्षगांठ पर यह हस्ताक्षर विशेष महत्व रखता है। समझौते में बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, डिजिटल व्यापार और मूल नियम जैसे मुद्दे शामिल हैं। इससे छोटे-मध्यम उद्यमों को भी सहायता मिलेगी। ओमान में भारतीय संयुक्त उद्यमों की संख्या 6000 से अधिक है। समझौते से व्यापार दोगुना होने की संभावना है। दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा में सहयोग बढ़ाएंगे।
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