UP RERA Action: यूपी रेरा के रडार पर आए 76 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, बिल्डर्स पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले 76 प्रोजेक्ट्स को रडार पर लिया है। बिल्डर्स के खिलाफ सख्त एक्शन की तैयारी है।

- UP RERA Substandard Projects: यूपी में 76 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर रेरा की टेढ़ी नजर, खरीदारों की शिकायत पर जांच तेज
- घर खरीदारों के लिए बड़ी खबर: यूपी रेरा के रडार पर आए 76 प्रोजेक्ट्स, डिफॉल्टर बिल्डर्स पर कसेगा शिकंजा
- UP RERA Update: नियमों की अनदेखी करने वाले 76 प्रोजेक्ट्स पर यूपी रेरा सख्त, लग सकता है भारी जुर्माना
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने राज्य में घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। नियामक संस्था ने नियमों की अनदेखी करने, निर्माण कार्य में अत्यधिक देरी करने और आवंटियों की शिकायतों का समय पर निपटारा न करने वाले 76 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को अपने रडार पर लिया है। लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद सहित राज्य के विभिन्न प्रमुख शहरों में फैले इन प्रोजेक्ट्स के खिलाफ अथॉरिटी ने तगड़े एक्शन की रूपरेखा तैयार कर ली है। इन डिफॉल्टर परियोजनाओं की स्क्रूटनी शुरू हो चुकी है, और आने वाले दिनों में संबंधित प्रमोटरों व बिल्डर्स पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाने से लेकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द करने जैसी सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यूपी रेरा ने एक व्यापक समीक्षा बैठक के बाद 76 सक्रिय परियोजनाओं को काली सूची या विशेष निगरानी श्रेणी में डालने का निर्णय लिया है। यह कदम मुख्य रूप से उन परियोजनाओं के खिलाफ उठाया गया है जो रेरा में पंजीकृत होने के बावजूद तय समय सीमा के भीतर खरीदारों को पजेशन (कब्जा) देने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स के प्रमोटरों ने अथॉरिटी द्वारा मांगे गए त्रैमासिक प्रगति विवरण (QPR) को भी समय पर जमा नहीं किया, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है।
रेरा सचिवालय से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के पास घर खरीदारों की ओर से शिकायतों का अंबार लग गया था। शिकायतों में मुख्य रूप से प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार, घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग और रिफंड न मिलना शामिल था। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए यूपी रेरा के तकनीकी और वित्तीय सलाहकारों की एक विशेष समिति ने राज्यभर के संदेहास्पद प्रोजेक्ट्स का डेटा खंगाला।
जांच में यह बात सामने आई कि इन 76 प्रोजेक्ट्स के प्रमोटर्स ने बार-बार दिए गए नोटिस के बावजूद न तो निर्माण कार्य में तेजी दिखाई और न ही खरीदारों के फंसे हुए पैसों की वापसी का कोई ठोस खाका पेश किया। इनमें से कई बिल्डर्स ने प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए एस्क्रो अकाउंट (जिसमें खरीदारों का 70% पैसा सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है) से धन की हेराफेरी भी की है। इस वित्तीय गड़बड़ी के उजागर होने के बाद अब रेरा ने इन सभी प्रोजेक्ट्स के खातों के फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश देने का मन बना लिया है।
इस मामले में यूपी रेरा के शीर्ष प्रबंधन का रुख बेहद सख्त है। नियामक संस्था के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों की गाढ़ी कमाई को डूबने नहीं दिया जाएगा। रेरा का कहना है कि नियमों के दायरे से बाहर जाकर काम करने वाले प्रमोटरों के लिए अब नरमी का समय समाप्त हो चुका है। दूसरी तरफ, क्रेडाई (CREDAI) जैसे बिल्डर्स एसोसिएशनों ने इस पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे नियामक के नियमों का सम्मान करते हैं, लेकिन प्राधिकारियों को उन प्रशासनिक देरी (जैसे नक्शा पास होने में देरी या एनओसी न मिलना) पर भी विचार करना चाहिए, जिनकी वजह से प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाते।
यूपी रेरा की इस आक्रामक रणनीति का सीधा और सकारात्मक प्रभाव उन हजारों घर खरीदारों पर पड़ेगा जो वर्षों से अपनी जीवनभर की पूंजी लगाकर आशियाने की उम्मीद में बैठे हैं। इस कड़े कदम से रियल एस्टेट सेक्टर के अन्य प्रमोटरों में भी एक सख्त संदेश जाएगा कि वे पारदर्शिता और समय सीमा को हल्के में नहीं ले सकते। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से शॉर्ट-टर्म में भले ही कुछ परियोजनाओं में काम रुकने की स्थिति बने, लेकिन लॉन्ग-टर्म में इससे बाजार की साख मजबूत होगी और खरीदारों का भरोसा वापस लौटेगा।
आने वाले हफ्तों में यूपी रेरा इन 76 परियोजनाओं के प्रमोटरों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए समन जारी करने जा रहा है। यदि निर्धारित समय के भीतर बिल्डर्स की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर या प्रोजेक्ट पूरा करने का व्यावहारिक प्लान नहीं दिया गया, तो रेरा अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत इन प्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में ले सकता है। ऐसी स्थिति में, रेरा तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी बिल्डर) या खरीदारों के संगठन (Association of Allottees) की मदद से रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा कराने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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