UP Coaching Institute Checking: लखनऊ अग्निकांड के बाद सीएम योगी का बड़ा एक्शन, यूपी भर में कोचिंग सेंटरों की जांच का महाअभियान शुरू
UP Coaching Center Inspection: लखनऊ हादसे के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में कोचिंग संस्थानों की जांच का महाअभियान शुरू हुआ।

- UP Coaching Centers Safety Audit: उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों पर कसा शिकंजा, सुरक्षा मानकों की जांच के लिए दौड़ीं संयुक्त टीमें
- यूपी में कोचिंग सेंटरों पर सीएम योगी का बड़ा हंटर: हर जिले में शुरू हुआ महाअभियान, नियमों की अनदेखी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
- यूपी में बड़ा प्रशासनिक ऐक्शन: लखनऊ हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश के कोचिंग संस्थानों में व्यापक सुरक्षा ऑडिट शुरू
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए दुखद कोचिंग अग्निकांड के बाद राज्य सरकार बेहद सख्त रुख अपना रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े और सीधे आदेश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में संचालित होने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ एक व्यापक और सघन निरीक्षण महाअभियान की शुरुआत कर दी गई है। बुधवार को राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस, स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड), विकास प्राधिकरणों और विद्युत सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने संयुक्त टीमें बनाकर कोचिंग सेंटरों पर धावा बोला। इस बड़े अभियान का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक इमारतों में चल रहे शिक्षण केंद्रों में सुरक्षा मानकों की जमीनी ह
इस महाअभियान को लेकर विभिन्न पक्षों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। प्रयागराज में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों का कहना है कि कई नामचीन कोचिंग संस्थान भारी-भरकम फीस तो वसूलते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर खिड़की तक नहीं होती।
दूसरी ओर, कोचिंग संचालकों के संगठनों का कहना है कि वे प्रशासन की इस कार्रवाई में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें आवश्यक सुधार करने के लिए थोड़ा व्यावहारिक समय दिया जाना चाहिए। वहीं, गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा साफ है; बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और जो मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें तुरंत सील किया जाएगा।
कीकत को जांचना और नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों को चिह्नित करना है। आने वाले दिनों में इस जांच की रिपोर्ट सीधे शासन स्तर पर भेजी जाएगी, जिसके आधार पर अवैध और असुरक्षित संस्थानों को पूरी तरह बंद करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी, जिसके बाद छात्रों की सुरक्षा को लेकर पूरे राज्य में आक्रोश का माहौल था। इस दुखद हादसे का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने आपातकालीन बैठक बुलाई। 'UP Coaching Center Inspection' के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों (डीएम) और पुलिस कप्तानों (एसपी/एसएसपी) को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा ऑडिट कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस महाअभियान के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों से उत्तर प्रदेश के शैक्षिक हब में पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राओं को एक सुरक्षित माहौल मिल सके।
राजधानी के अलीगंज में हुए हादसे के बाद बुधवार सुबह से ही पूरे उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक अमला सड़कों पर नजर आया। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ और झांसी जैसे बड़े शैक्षिक केंद्रों में संयुक्त टीमों ने सुबह ही अलग-अलग कोचिंग इलाकों की घेराबंदी कर ली।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों की टीमों ने कोचिंग संस्थानों में प्रवेश और निकास द्वारों की चौड़ाई, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था, आग बुझाने वाले उपकरणों (फायर एक्सटिंग्विशर) की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की बारीकी से जांच की। इसके अलावा, कई जगहों पर बेसमेंट या तंग गलियों में चल रहे क्लासरूम को लेकर अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई। विद्युत सुरक्षा विभाग के इंजीनियरों ने इमारतों की वायरिंग, लोड क्षमता और ट्रांसफार्मर की दूरी को भी मापा, क्योंकि शुरुआती रिपोर्टों में शॉर्ट सर्किट को ही हादसों की मुख्य वजह माना जाता रहा है। वर्षों से सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर चल रहे कोचिंग संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है और लोग अपनी इमारतों में फायर अलार्म और एग्जिट गेट दुरुस्त करवा रहे हैं। संकरी गलियों और बिना नक्शा पास कराए व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त इमारतों पर विकास प्राधिकरणों की नजरें टेढ़ी हो गई हैं। बच्चों को दूर दराज के जिलों से भेजने वाले माता-पिता में इस सरकारी हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा को लेकर थोड़ा भरोसा जागा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह अभियान केवल एक या दो दिन की औपचारिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि अगले एक सप्ताह तक यह निरंतर जारी रहेगा। सभी जनपदों की टीमों को एक विस्तृत चेकलिस्ट दी गई है, जिसे भरकर उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से शासन को सौंपना होगा। जिन कोचिंग संस्थानों में गंभीर कमियां पाई गई हैं, उन्हें तत्काल नोटिस थमाकर तीन से सात दिनों के भीतर कमियां दूर करने का समय दिया जा रहा है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुरक्षा इंतजाम पुख्ता नहीं किए गए, तो उन संस्थानों के पंजीकरण को रद्द करने के साथ-साथ उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
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