INS विक्रांत पर पीएम मोदी का सैनिकों संग दिवाली समारोह: ऑपरेशन सिंदूर की यादें ताजा कर पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर 2025 को गोवा और कर्णाटक के करवार तट के पास अरब सागर में तैनात भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर भारतीय नौसेना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर 2025 को गोवा और कर्णाटक के करवार तट के पास अरब सागर में तैनात भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर भारतीय नौसेना के बहादुर जवानों के साथ दिवाली का पर्व मनाया। यह परंपरा प्रधानमंत्री मोदी की 2014 से चली आ रही है, जब वे हर वर्ष दिवाली को देश के सैनिकों के बीच मनाते हैं। इस बार का समारोह खास इसलिए था क्योंकि कुछ महीनों पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में INS विक्रांत की भूमिका ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया था। समुद्र की लहरों पर सूर्य की किरणें चमक रही थीं, और जवानों द्वारा जलाए गए दीये उन किरणों की तरह जगमगा रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दृश्य अनंत क्षितिज, अनंत आकाश और अनंत शक्ति का प्रतीक है।
INS विक्रांत भारत की रक्षा क्षमता का एक चमकदार उदाहरण है। यह 262 मीटर लंबा और लगभग 45,000 टन वजन का विशालकाय पोत है, जो चार गैस टरबाइनों से संचालित होता है और 28 नॉट की अधिकतम गति प्राप्त कर सकता है। इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में हुआ, जिसकी कुल लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये रही। यह पोत 30 विमानों को समायोजित कर सकता है और उच्च स्तर की स्वचालन प्रणाली से लैस है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जब विक्रांत को राष्ट्र को सौंपा गया, तो नौसेना ने औपनिवेशिक काल के प्रतीक ध्वज को अलविदा कह दिया और छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित नया ध्वज अपनाया। यह बदलाव भारत की स्वतंत्र पहचान को मजबूत करता है। विक्रांत न केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक है, बल्कि मेक इन इंडिया की सफलता की कहानी भी बयां करता है। भारत अब दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो स्वदेशी विमानवाहक पोत बना सकता है।
समारोह की शुरुआत सुबह हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी रविवार रात से ही पोत पर पहुंच चुके थे। उन्होंने रात भर जवानों के बीच समय बिताया और कहा कि यह अनुभव अविस्मरणीय है। सुबह के समय एयर पावर डेमो का आयोजन किया गया, जिसमें नौसेना के लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टरों ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसमें जवानों ने देशभक्ति गीत गाए। प्रधानमंत्री ने इन गीतों में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र सुनकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जब जवानों ने गीतों के माध्यम से ऑपरेशन की कहानी बयां की, तो युद्धक्षेत्र में खड़े सैनिक की भावनाओं का अहसास हुआ। यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का साधन था, बल्कि सैनिकों के जोश और एकता को दर्शाता था।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सबसे पहले दिवाली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हर कोई अपने परिवार के साथ दिवाली मनाना चाहता है, और वे भी ऐसा ही करते हैं। लेकिन उनके लिए सैनिक ही असली परिवार हैं। 2014 से वे हर दिवाली सैनिकों के बीच बिताते हैं, चाहे वह सियाचिन की बर्फीली चोटियां हों, लद्दाख की ऊंचाइयां हों या कच्छ की सीमा हो। इस बार नौसेना के जवान उनके परिवार बने। उन्होंने कहा कि विक्रांत पर बिताई रात शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। जवानों की ऊर्जा और उत्साह देखकर नींद जल्दी आ गई। यह बात सुनकर सभी हंस पड़े। प्रधानमंत्री ने जवानों की अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये बड़े जहाज, तेज विमान और पनडुब्बियां अपनी ताकत के साथ-साथ सैनिकों के साहस से और मजबूत होते हैं।
संबोधन का मुख्य हिस्सा ऑपरेशन सिंदूर पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले ही हमने देखा कि विक्रांत ने अपने नाम से ही पूरे पाकिस्तान की नींद उड़ा दी थी। जिसका नाम ही दुश्मन के साहस का अंत कर दे, वह है INS विक्रांत। ऑपरेशन सिंदूर भारत की तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रमाण था। सेना, नौसेना और वायुसेना के समन्वय ने पाकिस्तान को इतनी जल्दी घुटनों पर ला दिया। प्रधानमंत्री ने तीनों सेनाओं को सलाम किया और कहा कि जब दुश्मन सामने हो, तो आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी सेना ही जीतती है। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल का भी जिक्र किया, जिसके नाम से शत्रु कांपते हैं। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में था, जिसमें भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विक्रांत जैसी ताकतें भारत को मजबूत बनाती हैं और दुश्मनों को सोचने पर मजबूर करती हैं।
प्रधानमंत्री ने नौसेना की मानवीय भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि नौसेना भारतीय महासागर की रक्षक है। यह न केवल द्वीपों की सुरक्षा करती है, बल्कि संकट के समय मदद भी पहुंचाती है। श्रीलंका, इंडोनेशिया, म्यांमार, मेडागास्कर और मालदीव जैसे देशों में आपदा राहत में नौसेना ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। मालदीव में साफ पानी पहुंचाने का काम भी इसी का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नौसेना का यह कार्य भारत की वैश्विक जिम्मेदारी को दर्शाता है। उन्होंने जवानों से कहा कि आपकी मेहनत से भारत न केवल सुरक्षित है, बल्कि दुनिया में सम्मानित भी है।
दिवाली समारोह में पारंपरिक तरीके से दीये जलाए गए। जवानों ने रंगोली बनाई और मिठाइयां बांटीं। प्रधानमंत्री ने हर जवान से बात की और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दिवाली प्रकाश का त्योहार है, जो अंधकार को दूर करता है। सैनिकों की तरह यह प्रकाश देश को मजबूत बनाता है। समारोह में एक्स पर प्रधानमंत्री ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें एयर पावर डेमो और सांस्कृतिक कार्यक्रम के हाइलाइट्स दिखाए गए। उन्होंने लिखा कि विक्रांत पर दिवाली मनाना सौभाग्य का विषय है। देशवासियों को भी स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आह्वान किया।
इस समारोह ने न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि पूरे देश को प्रेरित किया। प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले 125 जिले नक्सल प्रभावित थे, अब केवल 11 बचे हैं और उनमें से सिर्फ तीन में सक्रियता है। इन जिलों में पहली बार दिवाली खुशी से मनाई गई। यह सैनिकों की कुर्बानी का फल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत नक्सल-माओवादी आतंक से मुक्ति के कगार पर है। यह उपलब्धि तीनों सेनाओं के समर्पण से संभव हुई।
INS विक्रांत का महत्व केवल सैन्य ही नहीं, आर्थिक भी है। इसका निर्माण हजारों नौकरियां पैदा करने वाला था। कोचीन शिपयार्ड ने इसे बनाकर भारत को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण से आयात कम हुआ और निर्यात बढ़ा। भारत अब ड्रोन, मिसाइल और जहाज निर्यात करने लगा है। विक्रांत जैसी परियोजनाएं युवाओं को प्रेरित करती हैं।
समारोह के अंत में प्रधानमंत्री ने जवानों को गले लगाया और कहा कि आप मेरा परिवार हैं। उन्होंने देशवासियों को दिवाली की बधाई दी और कहा कि यह पर्व सुख, समृद्धि और सौहार्द लाए। गोवा और करवार के तट पर यह समारोह समुद्र की लहरों के साथ गूंजा। जवानों ने राष्ट्रगान गाया और प्रधानमंत्री ने तिरंगा लहराया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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