Ayodhya Deepotsav Drone Show: सरयू तट के आसमान में उतरेगा त्रेतायुग, 2100 स्वदेशी ड्रोन रोशनी से उकेरेंगे रामायण के प्रसंग

अयोध्या में दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर 2100 स्वदेशी ड्रोन ने सरयू के आकाश में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत कर दिया। तकनीक और आस्था का यह दृश्य ऐतिहासिक रहा।

Nov 7, 2026 - 14:38
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Ayodhya Deepotsav Drone Show: सरयू तट के आसमान में उतरेगा त्रेतायुग, 2100 स्वदेशी ड्रोन रोशनी से उकेरेंगे रामायण के प्रसंग
  • Ayodhya Mega Drone Show: दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर नया कीर्तिमान, 2100 ड्रोन के जरिए आकाश में सजीव होगी रामकथा
  • Deepotsav Sky Show Ayodhya: लेजर लाइट और 2100 ड्रोन से जगमग हुआ आसमान, राम मंदिर से लेकर पुष्पक विमान तक के बने मनमोहक दृश्य
  • Ayodhya Drone Show Record: दीपोत्सव पर तकनीक और आस्था का अनूठा संगम, स्वदेशी ड्रोन फार्मेशन ने रचा ऐतिहासिक क्षण

अयोध्या में दीपोत्सव के अवसर पर इस बार उत्सव की छटा केवल सरयू तट, प्रमुख द्वारों और नगर की सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक और आस्था के भव्य समन्वय से आकाश भी त्रेतायुगीन वैभव से जगमगा उठा। दीपोत्सव की पूर्व संध्या पर राम की पैड़ी के ऊपर खुले आसमान में 2,100 स्वदेश निर्मित (मेड इन इंडिया) ड्रोनों ने एक साथ उड़ान भरकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस भव्य एरियल शो में समन्वित प्रकाश व्यवस्था और अत्याधुनिक फॉर्मेशन तकनीक के जरिए संपूर्ण रामकथा के महत्वपूर्ण अध्यायों को सजीव रूप में दर्शाया गया।

शनिवार शाम को जैसे ही सरयू तट पर मुख्य शो की औपचारिक शुरुआत हुई, हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की निगाहें आसमान की ओर टिक गईं। लगभग 15 से 20 मिनट तक चले इस निरंतर ड्रोन प्रदर्शन के दौरान पृष्ठभूमि में बजती चौपाइयों, मंत्रोच्चार और डिजिटल साउंड इफेक्ट्स के साथ ड्रोनों ने बारी-बारी से विभिन्न आकृतियों का निर्माण किया। हवा में तैरते इन ड्रोनों ने भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप, धनुष-बाण लिए मर्यादा पुरुषोत्तम की छवि, सीता हरण, लंका दहन, संजीवनी बूटी लाते पवनपुत्र हनुमान और चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन जैसे कालजयी प्रसंगों को प्रकाश बिंदुओं के माध्यम से उकेरा।

कार्यक्रम के तकनीकी दल और आयोजकों के अनुसार, इस पूरे प्रदर्शन में भारत में ही डिजाइन और प्रोग्राम किए गए विशेष ड्रोनों का उपयोग किया गया। इन सभी 2,100 ड्रोनों को एक केंद्रीय कंप्यूटर एल्गोरिदम और जीपीएस आधारित सटीक पोजिशनिंग प्रणाली द्वारा नियंत्रित किया गया था। हवा के झोंकों और नदी किनारे की नमी के बीच प्रत्येक ड्रोन ने अपनी निर्धारित ऊंचाई और समन्वय को बिना किसी रुकावट के बनाए रखा। हवा में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन का सिंक्रोनाइज्ड मूवमेंट भारत के उभरते ड्रोन और एविएशन टेक्नोलॉजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का भी प्रमाण बनकर उभरा।

2100 ड्रोनों के मेगा शो की रूपरेखा

ड्रोन की कुल संख्या: 2,100 पूर्णतः स्वदेशी निर्मित (Made in India) ड्रोन।

प्रदर्शन की अवधि: लगभग 18 मिनट का निरंतर सिंक्रोनाइज्ड डिस्प्ले।

तकनीकी नियंत्रण: रियल-टाइम जीपीएस नेविगेशन और केंद्रीय ऑटोमेटेड फॉर्मेशन सॉफ्टवेयर।

प्रमुख आकृतियां: भगवान राम की धनुर्धारी मुद्रा, श्री राम जन्मभूमि मंदिर का 3D स्वरूप, पुष्पक विमान, संजीवनी लाते हनुमान जी और विशाल दीया।

आयोजक निकाय: उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, अयोध्या विकास प्राधिकरण और तकनीकी विशेषज्ञ एजेंसी।

इस विशाल आयोजन को देखने के लिए राम की पैड़ी, नया घाट, गुप्तार घाट और सरयू पुल के आसपास भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से अयोध्या जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। ड्रोन उड़ान क्षेत्र के चारों ओर एक सुरक्षित एरियल कॉरिडोर बनाया गया था, जहां किसी भी अन्य निजी ड्रोन या गैर-अधिकृत उड़ने वाले उपकरण के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू था। आकाश में ड्रोन की आकृतियों के साथ-साथ सरयू के जल पर पड़ रहे उनके रंगीन प्रतिबिंब ने घाटों के संपूर्ण दृश्य को अलौकिक रूप प्रदान किया।

ड्रोन प्रदर्शन के साथ-साथ सरयू नदी के जल मंच पर विशाल लेजर लाइट एंड साउंड शो का भी आयोजन किया गया। लेजर किरणों ने जहां जल की धाराओं और मंदिर के अग्रभाग पर विविध रंग बिखेरे, वहीं ड्रोन शो ने आसमान में विशालकाय 3D आकृतियों के माध्यम से नए युग की दृश्य कला का प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के अंतिम चरण में सभी ड्रोनों ने मिलकर आकाश में भव्य राम मंदिर के शिखर और अंत में प्रज्वलित दीये के रूप में 'शुभ दीपोत्सव' की आकृति बनाई, जिसे देखकर समूचा परिसर जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा।

अयोध्या दीपोत्सव का ऐतिहासिक सफर

आरंभ वर्ष: वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दीपोत्सव की आधिकारिक शुरुआत 1.71 लाख दीयों के साथ की गई थी।

विकास क्रम: वर्ष दर वर्ष दीयों की संख्या बढ़ती गई, जो 2023 और 2024 में 22 से 25 लाख से अधिक दीयों के नए विश्व रिकॉर्ड तक पहुंची।

तकनीकी नवाचार: शुरुआती वर्षों में केवल पारंपरिक दीये जलाए जाते थे, जिसके बाद प्रोजेक्शन मैपिंग, 3D लेजर शो और अब हजारों ड्रोनों का एरियल शो इसका स्थायी हिस्सा बन चुका है।

उद्देश्य: अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना और स्थानीय हस्तशिल्प व सांस्कृतिक परंपराओं को संबल देना।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार दीपोत्सव को पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। हरित पटाखों और सीमित आतिशबाजी के विकल्प के रूप में इस प्रकार के बड़े ड्रोन शो ध्वनि और वायु प्रदूषण को न्यूनतम रखते हुए एक भव्य दृश्य अनुभव प्रस्तुत करते हैं। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता की मौजूदा संवेदनशील स्थिति के बीच प्रदूषण-मुक्त रोशनी का यह माध्यम आगंतुकों और पर्यावरणविदों दोनों के बीच एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

प्रशासनिक तैयारियों के तहत रविवार को मुख्य दीपोत्सव पर्व पर सरयू के 55 से अधिक घाटों पर लाखों मिट्टी के दीये प्रज्वलित कर नया कीर्तिमान रचने की योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों, एनसीसी कैडेट्स और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से घाटों पर दीयों की व्यवस्थित शृंखलाएं तैयार की गई हैं। पूर्व संध्या पर संपन्न हुए इस ड्रोन शो ने मुख्य पर्व की औपचारिक शुरुआत कर दी है, जिसके बाद सुरक्षा बल और प्रशासनिक अमला अगले चौबीस घंटों तक पूरे नगर क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

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