भाई ने अपनी बहन का 1.5 करोड़ रुपये से मायरा भरा, नगद और गहने के तौर पर क़रीब 1.56 करोड़ रुपये की सम्पत्ति दी। 

राजस्थान के बीकानेर जिले में एक परिवार ने परंपरा और स्नेह की अनोखी मिसाल कायम की है। दो भाइयों ने अपने दो भांजों को विवाह के अवसर पर कुल डेढ़ करोड़ रुपये

Nov 5, 2025 - 12:24
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भाई ने अपनी बहन का 1.5 करोड़ रुपये से मायरा भरा, नगद और गहने के तौर पर क़रीब 1.56 करोड़ रुपये की सम्पत्ति दी। 
भाई ने अपनी बहन का 1.5 करोड़ रुपये से मायरा भरा, नगद और गहने के तौर पर क़रीब 1.56 करोड़ रुपये की सम्पत्ति दी। 

बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले में एक परिवार ने परंपरा और स्नेह की अनोखी मिसाल कायम की है। दो भाइयों ने अपने दो भांजों को विवाह के अवसर पर कुल डेढ़ करोड़ रुपये का मायरा भरा दिया। यह मायरा नगद नोटों, सोने-चांदी के गहनों और अन्य उपहारों से सजा था। समारोह के दौरान नोटों से भरी थालियां देखकर सभी मेहमान हैरान रह गए। यह घटना बीकानेर के नोखा क्षेत्र में हुई और अब पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है। समाचार एजेंसी लाइव हिंदुस्तान और न्यूज18 हिंदी की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़े मायरा समारोहों में से एक माना जा रहा है। परिवार की यह उदारता न केवल सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करती है, बल्कि सामाजिक बंधनों की मजबूती को भी दर्शाती है।

यह समारोह 1 नवंबर 2025 को बीकानेर के नोखा उपखंड के एक गांव में आयोजित हुआ। मायरा देने वाले भाई रामलाल जांगिड़ और उनके छोटे भाई ओमप्रकाश जांगिड़ हैं। रामलाल एक सफल व्यवसायी हैं, जो बीकानेर में रियल एस्टेट और कृषि व्यापार से जुड़े हैं। ओमप्रकाश सरकारी नौकरी में हैं। दोनों भाइयों ने अपने दो भांजों - रामलाल के भांजे रवि जांगिड़ और ओमप्रकाश के भांजे रोहित जांगिड़ - के विवाह के लिए यह भव्य मायरा तैयार किया। मायरा राजस्थानी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां भाई या मामा अपनी बहन या भांजी को विवाह के समय उपहार देकर आशीर्वाद देते हैं। लेकिन यहां यह भांजों को दिया गया, जो परंपरा को नया आयाम देता है। कुल मूल्य 1.56 करोड़ रुपये आंका गया, जिसमें 1.2 करोड़ नगद, 25 लाख के सोने के गहने और 11 लाख की चांदी की वस्तुएं शामिल थीं।

समारोह की शुरुआत सुबह से हुई। गांव में विशेष सजावट की गई थी। मंडप में फूलों की मालाओं से सजा हुआ था और पारंपरिक लोक संगीत बज रहा था। दोपहर में मायरा वितरण का मुख्य समारोह शुरू हुआ। रामलाल और ओमप्रकाश ने थालियों में नोटों की बंडिलें भरीं। एक थाली में 50 लाख के नोट थे, जो चमचमाते सिक्कों और गहनों से सजी थी। जब भाईयों ने भांजों को थाली सौंपी, तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। मेहमानों ने कहा कि इतनी बड़ी राशि देखकर आंखें फटी की फटी रह गईं। रवि और रोहित के चेहरे पर खुशी की लहर थी। उन्होंने अपने मामा और चाचा को पैर छूकर आशीर्वाद लिया। समारोह में 500 से ज्यादा रिश्तेदार और ग्रामीण शामिल हुए। स्थानीय पंडित ने मंत्रोच्चार के साथ रस्में पूरी कीं।

मायरा का विवरण देखने लायक था। नगद राशि 1.2 करोड़ रुपये थी, जो 500 और 2000 के नोटों में दी गई। सोने के गहनों में हार, चूड़ियां, अंगूठियां और मंगलसूत्र शामिल थे, जिनका वजन करीब 200 ग्राम था। चांदी की थालियां, बर्तन और सिक्के भी उपहार में दिए गए। इसके अलावा, पारंपरिक वस्त्र, घोड़ी और बैंड की व्यवस्था भी भाइयों ने की। रामलाल ने बताया कि यह मायरा हमारी मां की याद में दिया गया है। वे हमेशा कहती थीं कि भांजों को कभी कमी न महसूस हो। ओमप्रकाश ने कहा कि यह स्नेह का प्रतीक है, न कि दिखावा। हमारा परिवार कृषि और व्यापार से समृद्ध है, इसलिए हमने जो संभव था, वह किया। भांजों के विवाह अगले महीने होने हैं, लेकिन मायरा पहले ही भरा गया ताकि वे निश्चिंत रहें।

यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। समारोह का एक छोटा वीडियो, जिसमें नोटों की थाली दिखाई दे रही है, को न्यूज18 लोकल ने शेयर किया। वीडियो को 2 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। लोग इसे शेयर करते हुए कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि यह राजस्थान की समृद्धि और भाईचारे की मिसाल है। दूसरे ने कहा कि मायरा परंपरा को जीवित रखना सराहनीय है। लेकिन कुछ ने सवाल भी उठाए कि इतनी बड़ी राशि खर्च करना उचित है या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि मायरा दहेज से अलग है, क्योंकि यह स्वैच्छिक स्नेह का प्रतीक है। राजस्थान में मारवाड़ी और जाट समुदायों में यह रिवाज सदियों पुराना है। बीकानेर के लोक इतिहासकार डॉ. रामनिवास ने बताया कि 19वीं सदी में राजपूत राजाओं के समय से यह प्रथा चली आ रही है। तब मायरा में घोड़े, ऊंट और भूमि दी जाती थी। आज यह नकद और आभूषणों में बदल गया है।

राजस्थान में मायरा की परंपरा गहरी जड़ों वाली है। नागौर जिले में 2023 में चार भाइयों ने अपनी बहन को 8 करोड़ का मायरा दिया था, जिसमें 100 बीघा जमीन, सोना और ट्रैक्टर शामिल थे। यह खबर पूरे देश में सुर्खियां बनी। इसी तरह, 2025 में नागौर में तीन भाइयों ने बहन को 1.51 करोड़ नगद, सोना और प्लॉट दिए। लेकिन बीकानेर का यह मायरा भांजों को होने से खास है। परिवार ने कहा कि यह निर्णय महीनों पहले लिया गया था। भांजों के पिता की असमय मृत्यु के बाद भाईयों ने उनकी जिम्मेदारी संभाली। रवि एक इंजीनियर है, जबकि रोहित किसान। दोनों के विवाह शादीयों में बड़े पैमाने पर होंगे। समारोह के बाद गांव में उत्सव चला। महिलाओं ने लोकगीत गाए और पुरुषों ने पारंपरिक नाच किया।

यह घटना सामाजिक बहस भी छेड़ रही है। कुछ लोग इसे धन प्रदर्शन मानते हैं, जबकि अन्य इसे सकारात्मक देखते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मीरा बाई ने कहा कि मायरा अगर बिना दबाव के हो तो ठीक है, लेकिन दहेज जैसी कुरीतियों को बढ़ावा न दे। राजस्थान सरकार ने दहेज निषेध अधिनियम के तहत सख्ती बरती है, लेकिन मायरा को प्रोत्साहन दिया जाता है क्योंकि यह सांस्कृतिक है। बीकानेर जिला प्रशासन ने समारोह को वैध बताया। एसपीओ ने कहा कि कोई शिकायत नहीं मिली। परिवार ने आयकर नियमों का पालन किया। नगद लेन-देन बैंक के माध्यम से हुआ।

बीकानेर राजस्थान का एक समृद्ध जिला है। यहां कृषि, डेयरी और पर्यटन मुख्य व्यवसाय हैं। जांगिड़ परिवार जैसे कई परिवार परंपराओं को निभाते हैं। यह मायरा न केवल परिवार का गौरव बढ़ाएगा, बल्कि गांव की एकता को मजबूत करेगा। भांजों ने कहा कि यह उपहार उनकी जिंदगी बदलेगा। वे अब उच्च शिक्षा और व्यवसाय पर फोकस करेंगे। समारोह के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हैं। लोग इसे देखकर प्रेरित हो रहे हैं।

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