इस्लामाबाद में हिज्बुल कमांडर सज्जाद अहमद की संदिग्ध मौत: पाकिस्तान में 'अनजान हमलावरों' का खौफ गहराया।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के एक प्रमुख कमांडर सज्जाद अहमद की संदिग्ध

May 2, 2026 - 12:25
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इस्लामाबाद में हिज्बुल कमांडर सज्जाद अहमद की संदिग्ध मौत: पाकिस्तान में 'अनजान हमलावरों' का खौफ गहराया।
इस्लामाबाद में हिज्बुल कमांडर सज्जाद अहमद की संदिग्ध मौत: पाकिस्तान में 'अनजान हमलावरों' का खौफ गहराया।
  • आतंकी सुरक्षित पनाहगाहों में मची खलबली: इस्लामाबाद की सड़कों पर मारा गया हिज्बुल का शीर्ष रणनीतिकार
  • पाकिस्तानी खुफिया तंत्र और सेना के लिए पहेली बना 'नॉन गनमैन': आतंकी आकाओं की सिलसिलेवार हत्याओं से कांपी आईएसआई

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के एक प्रमुख कमांडर सज्जाद अहमद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर ने पड़ोसी मुल्क के सुरक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सज्जाद अहमद, जो लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रहा था, का शव इस्लामाबाद के एक सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में मिला। इस घटना ने एक बार फिर उन 'रहस्यमयी हत्याओं' की तरफ सबका ध्यान खींचा है, जो पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में सक्रिय आतंकियों को निशाना बना रही हैं। सज्जाद अहमद की मौत की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन जिस तरह से उसे उसके घर के पास ही निशाना बनाया गया, उसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह घटना केवल एक व्यक्तिगत हत्या नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान में पल रहे आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक प्रहार है। पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के दर्जनों शीर्ष नेता और रणनीतिकार एक-एक करके रहस्यमयी ढंग से मारे गए हैं। सज्जाद अहमद की मौत इसी कड़ी का नवीनतम हिस्सा मानी जा रही है। इस्लामाबाद जैसे शहर में, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं और जहां आतंकी आकाओं को सरकारी सुरक्षा कवच प्राप्त होता है, वहां घुसकर इस तरह की कार्रवाई ने हिज्बुल के नेतृत्व को बुरी तरह डरा दिया है। संगठन के अंदर इस समय भारी अविश्वास का माहौल है और वे इसे एक बड़ी खुफिया विफलता मान रहे हैं।

पाकिस्तान की वास्तविक सत्ता चलाने वाली जोड़ी, आईएसआई (ISI) प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, ये दोनों शीर्ष अधिकारी पाकिस्तान के अंदर सक्रिय एक 'नॉन गनमैन' या 'अनजान हमलावर' की थ्योरी से बेहद परेशान हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई यह समझने में पूरी तरह विफल रही है कि आखिर ये हमलावर कौन हैं जो आतंकियों को उनके सुरक्षित कमरों में जाकर ठिकाने लगा रहे हैं। असीम मलिक और असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना और खुफिया विभाग ने कई विशेष टीमें गठित की हैं, लेकिन अब तक वे किसी भी 'साईलेंट किलर' को पकड़ने में नाकाम रहे हैं, जिससे वहां की सेना का मनोबल काफी गिरा हुआ है। पाकिस्तान में हाल के महीनों में हुई रहस्यमयी हत्याओं की श्रृंखला में मारे गए आतंकियों की सूची लंबी होती जा रही है। इन ऑपरेशन्स की खास बात यह है कि हमलावर न तो कोई निशान छोड़ते हैं और न ही पकड़े जाते हैं। स्थानीय पुलिस और आईएसआई इन घटनाओं को 'आपसी रंजिश' का नाम देकर दबाने की कोशिश करती रही है, लेकिन अब यह सिलसिला एक बड़ी सामरिक चुनौती बन चुका है। पूर्व जासूस लकी बिष्ट ने हाल ही में अपने दावों से पाकिस्तान में चल रही इस हलचल को एक नया मोड़ दिया है। बिष्ट का कहना है कि पाकिस्तान अब आतंकियों के लिए सुरक्षित स्वर्ग नहीं रह गया है। उनका दावा है कि वहां अब एक ऐसा तंत्र सक्रिय हो चुका है जो उन आतंकियों को उनके ही बिलों में घुसकर सजा दे रहा है जो भारत या अन्य देशों के लिए खतरा बने हुए थे। बिष्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना और आईएसआई इस बात से ज्यादा परेशान हैं कि ये हत्याएं बिना किसी शोर-शराबे के हो रही हैं। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गई है क्योंकि वे अपने 'संपत्ति' (Assets) कहे जाने वाले आतंकियों को सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भी उनकी फजीहत हो रही है।

सज्जाद अहमद जैसे आतंकियों की हत्या के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे में मची खींचतान का नतीजा हो सकता है, वहीं अन्य इसे एक सुनियोजित 'सफाई अभियान' मान रहे हैं। हकीकत जो भी हो, लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान के भीतर अब आतंकी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सज्जाद अहमद की मौत के बाद इस्लामाबाद में हिज्बुल के अन्य गुर्गों को गुप्त स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। आतंकी कैंपों के अंदर अब एक-दूसरे पर शक किया जा रहा है, जिससे उनकी परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाकिस्तान का वह हिस्सा जो कभी आतंकियों के लिए अभेद्य दुर्ग था, अब उनके लिए मौत का जाल बन गया है। पाकिस्तान की सेना और आईएसआई के प्रमुखों के बीच हालिया बैठकों में भी इस मुद्दे पर काफी गंभीरता से चर्चा हुई है। असीम मुनीर और असीम मलिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो आतंकियों का पाकिस्तान पर से भरोसा उठ जाएगा और वे सरकारी नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही संकट में है और ऐसे में आंतरिक सुरक्षा की यह नई चुनौती सरकार के लिए गले की हड्डी बन गई है। इन घटनाओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युग में सीमाओं के पार जाकर अपने दुश्मनों को खत्म करने की क्षमता अब केवल कुछ खास देशों तक ही सीमित नहीं रह गई है, या फिर यह पाकिस्तान की अपनी ही एजेंसियों का बदला हुआ स्वरूप है।

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