Narendra Modi 25 Years in Governance: गुजरात मॉडल से 'विकसित भारत @2047' तक, 25 सालों में ऐसे बदली देश की विकास राजनीति
7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से शुरू हुआ नरेंद्र मोदी का प्रशासनिक सफर 25 वर्ष पूरे कर चुका है। जानिए गुजरात मॉडल से 'विकसित भारत @2047' तक विकास राजनीति का पूरा रूपांतरण।

- PM Modi 25 Years Journey: 7 अक्टूबर 2001 को संभाली थी गुजरात की सत्ता, जानिए सीएम से पीएम तक के ढाई दशक के बड़े नीतिगत बदलाव
- नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष: सूखे और संकट से घिरे राज्य से वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने तक का सफर
- Gujarat Model to Viksit Bharat: संकट प्रबंधन से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक, पीएम मोदी के शासन के 25 साल पूरे
नई दिल्ली: 7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी, तब शायद ही किसी ने अनुमान लगाया होगा कि यह दिन भारतीय राजनीति और प्रशासनिक दर्शन में एक नए युग की शुरुआत साबित होगा। उस समय गुजरात 26 जनवरी 2001 के विनाशकारी भुज भूकंप के मलबे, लगातार सूखे, गंभीर जल संकट, बिजली की भारी कमी और राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से जूझ रहा था। आज ठीक 25 वर्ष बाद, 7 अक्टूबर को जब उनके संवैधानिक पद पर रहते हुए ढाई दशक पूरे हो रहे हैं, तब उनकी विकासोन्मुख राजनीति का दायरा गांधीनगर के सचिवालय से निकलकर 140 करोड़ भारतीयों के 'विकसित भारत @2047' के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प तक विस्तारित हो चुका है।
गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ यह सफर मई 2014 में देश के 14वें प्रधानमंत्री बनने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आया। निरंतर 25 वर्षों तक निर्वाचित लोकतांत्रिक सरकार के मुखिया बने रहने का यह रिकॉर्ड न केवल राजनीतिक निरंतरता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे संकट प्रबंधन की राजनीति को आगे चलकर बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्रांति और आर्थिक आत्मनिर्भरता के समग्र मॉडल में बदला गया।
- 2001 का गुजरात: जब आपदा को अवसर में बदलने की नींव रखी गई
वर्ष 2001 में पदभार संभालते ही नरेंद्र मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्छ भूकंप के बाद पुनर्वास की थी। तत्कालीन सरकार ने परंपरागत राहत कार्यों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक नीतिगत योजनाएं लागू कीं:
पुनर्निर्माण और आपदा प्रबंधन: भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भूकंप-रोधी ढांचों का निर्माण और गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (GSDMA) की स्थापना की गई, जिसे बाद में संयुक्त राष्ट्र संघ से भी मान्यता मिली।
ज्योतिग्राम योजना: गुजरात के ग्रामीण अंचलों में 24 घंटे थ्री-फेज बिजली उपलब्ध कराने के लिए कृषि और घरेलू फीडरों को अलग किया गया, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कुटीर उद्योगों को नई जान मिली।
सुजलाम सुफलाम और नर्मदा जल प्रबंधन: पानी की कमी से जूझते सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के क्षेत्रों तक चेकडैम, ड्रिप इरिगेशन और नर्मदा नहर के जाल के जरिए पानी पहुंचाया गया, जिससे राज्य की कृषि विकास दर दोहरे अंकों में पहुंच गई।
वाइब्रेंट गुजरात समिट: 2003 में शुरू हुआ यह द्विवार्षिक निवेशक सम्मेलन आगे चलकर देश के सबसे बड़े औद्योगिक और निवेश मंचों में तब्दील हो गया, जिसने 'गुजरात मॉडल' की नींव रखी।
- 2014 से राष्ट्रीय मंच: 'सबका साथ, सबका विकास' का दौर
मई 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद राज्य स्तर पर आजमाए गए प्रयोगों को राष्ट्रीय पैमाने पर लागू किया गया। 2014 से 2019 के पहले कार्यकाल में सरकार ने जनकल्याण और वित्तीय समावेशन को अपनी प्राथमिकता बनाया।
वित्तीय समावेशन का आधार: प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) के माध्यम से देश के 50 करोड़ से अधिक गरीबों के बैंक खाते खोले गए, जिससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) संभव हुआ और लीकेज खत्म हुआ।
स्वच्छ भारत मिशन: खुले में शौच से मुक्ति के राष्ट्रीय अभियान ने स्वच्छता को जनआंदोलन में बदल दिया।
उज्ज्वला, आवास और सौभाग्य योजनाएं: ग्रामीण और निर्धन परिवारों को पक्के आवास, मुफ्त एलपीजी कनेक्शन और घरेलू बिजली पहुंचाकर सामाजिक सुरक्षा के दायरे को मजबूती दी गई।
2019-2024: संकट के बीच 'आत्मनिर्भर भारत' का उदय
2019 में दूसरे कार्यकाल के दौरान कोविड-19 महामारी के रूप में सदी का सबसे बड़ा संकट सामने आया। जहां वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं चरमरा रही थीं, वहीं भारत ने 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की घोषणा की।
स्वदेशी वैक्सीन और डिजिटल कोविन प्लेटफॉर्म: दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान संचालित कर देश को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: मोबाइल विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने के ठोस कदम उठाए गए।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): यूपीआई (UPI), डिजिलॉकर और ओएनडीसी (ONDC) जैसे डिजिटल नवाचारों ने देश को फिनटेक और डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बना दिया।
- विकसित भारत @2047
2024 में लगातार तीसरे कार्यकाल में शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन वर्ष 2047 तक, यानी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर, भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र (Developed Nation) के रूप में स्थापित करना है।
इस रोडमैप के चार प्रमुख स्तंभ हैं: गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी शक्ति (GYAN)। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आधुनिक एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, वंदे भारत नेटवर्क और अत्याधुनिक बंदरगाहों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, हरित ऊर्जा (Green Hydrogen व Solar Energy), अंतरिक्ष अन्वेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारत को वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में लाने के लिए नीतिगत सुधार लागू किए जा रहे हैं।
2001 में सूखे और बिजली संकट से जूझ रहे एक राज्य से शुरू हुआ यह सफर आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंचों पर एक निर्णायक आवाज के रूप में 25 वर्षों के परिवर्तन की स्पष्ट गवाही देता है।
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