Delhi CPA Scam: 650 करोड़ के दवा और उपकरण घोटाले में अहम फाइलें नष्ट, ACB ने कोर्ट में किया बड़ा खुलासा
Delhi CPA Scam: दिल्ली में 650 करोड़ के दवा व मेडिकल उपकरण घोटाले की 7 अहम फाइलें नष्ट की गईं। एसीबी ने कोर्ट में सबूत मिटाने का दावा किया। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।

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- दिल्ली के 650 करोड़ रुपये के दवा घोटाले में बड़ा खुलासा: पहले गायब बताई गई 7 महत्वपूर्ण फाइलें जानबूझकर की गईं नष्ट, ACB पहुंची कोर्ट
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दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े लगभग 650 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच में बड़ा कानूनी मोड़ आया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने दिल्ली की संबंधित अदालत में औपचारिक जानकारी देते हुए दावा किया है कि इस प्रकरण से जुड़ी जिन सात महत्वपूर्ण फाइलों को पहले केवल 'लापता' माना जा रहा था, उन्हें असल में साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से नष्ट कर दिया गया है। इन दस्तावेजों में टेंडर आवंटन, सामग्री की खरीद दरें, आपूर्ति श्रृंखला और अस्पतालवार वास्तविक उपभोग के निर्णायक ब्योरे दर्ज थे। जांच एजेंसी अब इस प्रकरण में सबूत मिटाने और साजिश रचने से जुड़ी नई धाराओं के तहत जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के माध्यम से सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, सर्जिकल सामग्रियों और आधुनिक रेडियोलॉजी व एनेस्थीसिया उपकरणों की खरीद में हुए 650 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता मामले में साक्ष्य नष्ट करने का गंभीर आरोप सामने आया है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने अदालत में प्रस्तुत अपनी प्रगति रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जांच को बाधित करने और वित्तीय हेराफेरी के मूल रिकॉर्ड को छुपाने के लिए संबंधित सात फाइलों को जानबूझकर नष्ट किया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये फाइलें खरीद प्रक्रिया से लेकर अस्पतालों को वास्तविक डिलीवरी और भुगतान स्वीकृति के बीच की सबसे अहम कानूनी और वित्तीय कड़ी थीं।
जांच एजेंसी के अनुसार, शुरुआत में प्रशासनिक स्तर पर यह दावा किया गया था कि खरीद से जुड़े कुछ रिकॉर्ड और फाइलें कार्यालयीन फेरबदल के कारण नहीं मिल रही हैं। हालांकि, जब एसीबी ने आंतरिक लॉगबुक, पत्राचार और डिजिटल फुटप्रिंट्स की पड़ताल शुरू की, तो यह तथ्य उजागर हुआ कि दस्तावेजों का न मिलना आकस्मिक नहीं बल्कि जांच से बचने का सोचा-समझा प्रयास था। नष्ट की गई इन सात प्रमुख फाइलों में प्रत्येक फाइल अलग-अलग वित्तीय मदों और घपले की स्वतंत्र परत को उजागर करने वाली थी।
पहला महत्वपूर्ण दस्तावेज आवश्यक दवाओं की खरीद से संबंधित था, जिसमें करीब 400 करोड़ रुपये की जीवनरक्षक व सामान्य दवाओं का विवरण था। इस रिकॉर्ड के जरिए दवाओं की आपूर्ति करने वाली कंपनियों और अस्पतालों के स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया जाना था। दूसरा दस्तावेज 100 करोड़ रुपये से अधिक की सर्जिकल सामग्री से जुड़ा था, जिसमें टांके, कैनुला, ड्रेसिंग सामग्री और दस्तानों की खरीद दरें और अस्पतालवार आवंटन दर्ज था।
नष्ट की गई प्रमुख फाइलों में दर्ज वित्तीय ब्योरा
आवश्यक दवाओं की फाइल: लगभग 400 करोड़ रुपये की दवा खरीद, आपूर्ति कंपनियों और अस्पतालवार वितरण का लेखा-जोखा।
सर्जिकल सामग्री की फाइल: 100 करोड़ रुपये से अधिक के सर्जिकल सामान की खरीद और आवंटन का रिकॉर्ड।
लिनेन व बेडशीट फाइल: 16.67 लाख वस्त्रों की खरीद और करीब 75 करोड़ रुपये के खर्च का ब्योरा।
चिकित्सा उपकरण फाइलें: 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें, 7 सी-आर्म रेडियोलॉजी मशीनें (7.70 करोड़ रुपये) और एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन।
ओआरएस फाइल: 50 लाख सैशे की 7.50 करोड़ रुपये की खरीद और आपूर्ति का ब्योरा।
इसके अतिरिक्त, बेडशीट, पिलो कवर और लिनेन से जुड़ी फाइल में 16.67 लाख वस्तुओं की खरीद पर खर्च हुए करीब 75 करोड़ रुपये का ब्योरा था, जिससे यह साबित होता कि क्या इतनी बड़ी तादाद में कपड़े वास्तव में वार्डों तक पहुंचे या केवल कागजी खानापूर्ति की गई। वहीं ओआरएस के 50 लाख सैशे (लागत लगभग 7.50 करोड़ रुपये) की आपूर्ति का रिकॉर्ड भी गायब कर दिया गया। उपकरणों के खंड में 448 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद, उनकी कीमत, स्थापना और अस्पतालवार आवंटन से जुड़ी फाइल, सात सी-आर्म रेडियोलॉजी उपकरणों (7.70 करोड़ रुपये) की फाइल और एनेस्थीसिया वर्क स्टेशनों के निरीक्षण व इंस्टॉलेशन की फाइलें नष्ट किए जाने की सूची में शामिल हैं।
अदालत के समक्ष एसीबी के जांच अधिकारियों ने तर्क दिया कि फाइलों के नष्ट होने से सीधे तौर पर भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट के बीच की कड़ी टूट गई है, लेकिन एजेंसी सेकेंडरी साक्ष्यों, बैंक लेन-देन, संबंधित वेंडरों के खातों और डिजिटल डेटा बैकअप के जरिए मामले को साबित करने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, मामले से जुड़े प्रशासनिक विभागों के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दे रहे हैं और रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए जिम्मेदार कार्मिकों की भूमिका की विभागीय समीक्षा की जा रही है।
इस खुलासे से दिल्ली के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में खरीद और आपूर्ति प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल स्तर पर दवाओं और महंगे उपकरणों की वास्तविक मौजूदगी का भौतिक ऑडिट न हो पाने से यह आशंका गहरी हो गई है कि वित्तीय रूप से स्वीकृत सामग्री का एक बड़ा हिस्सा शायद कभी अस्पतालों के वार्डों या ऑपरेशन थिएटरों तक पहुंचा ही नहीं। इसके साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड के नष्ट होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और डिजिटल रिकॉर्ड कीपिंग की अनिवार्यता पर नए नियम लागू करने की मांग तेज हो गई है।
अदालत में यह जानकारी दर्ज कराने के बाद एसीबी अब साक्ष्य मिटाने (भारतीय कानून के तहत संबंधित धाराओं) और आपराधिक षड्यंत्र के तहत केस डायरी को विस्तारित कर रही है। जांच एजेंसी उन अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर रही है जिनके अधिकार क्षेत्र और कस्टडी में ये फाइलें अंतिम बार देखी गई थीं। इसके साथ ही संबंधित आपूर्तिकर्ताओं और सीपीए के तत्कालीन निर्णयकर्ताओं से आमने-सामने पूछताछ करने के लिए समन जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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