Abhishek Banerjee House Attack Row: कालीघाट आवास पर देर रात हंगामे के बाद तनाव, टीएमसी सांसद ने बीजेपी पर लगाया जानलेवा हमले का आरोप
कोलकाता के कालीघाट में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर देर रात टीएमसी और बीजेपी समर्थकों में झड़प हुई। अभिषेक ने हमले का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने इसे खारिज किया।

- Bengal Politics Kalighat Clash: आधी रात को टीएमसी-बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी झड़प, अभिषेक बनर्जी बोले- 6 महीने में 7वीं बार निशाना बनाने की कोशिश
- TMC vs BJP Kolkata Row: अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर हिंसक टकराव, बीजेपी ने आरोपों को नकारा और बताया राजनीतिक ड्रामा
- Abhishek Banerjee Security Controversy: जन्मदिन के मौके पर आवास के बाहर नारेबाजी और पथराव, पुलिस ने संभाली स्थिति और बढ़ाई सुरक्षा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार तड़के उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के दक्षिण कोलकाता स्थित कालीघाट आवास के बाहर भारी हंगामा और झड़प हुई। घटना 6 और 7 नवंबर की दरमियानी रात करीब दो बजे की बताई जा रही है, जब अभिषेक बनर्जी के जन्मदिन के अवसर पर उनके आवास के बाहर तृणमूल कार्यकर्ताओं का जमावड़ा था। टीएमसी सांसद ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं पर अपने घर के मुख्य द्वार पर हमला करने, पोस्टर-बैनर फाड़ने और उनके समर्थकों पर ईंट-पत्थर फेंकने का सीधा आरोप लगाया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सहानुभूति बटोरने के लिए गढ़ा गया राजनीतिक ड्रामा करार दिया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, रात करीब दो बजे कालीघाट स्थित शांति निकेतन बिल्डिंग के बाहर दोनों राजनीतिक दलों के समर्थकों का आमना-सामना हुआ। यह परिसर न केवल अभिषेक बनर्जी का आवास है बल्कि तृणमूल कांग्रेस के पुराने संगठनात्मक दफ्तरों में से भी एक है। घटना के कुछ ही घंटों बाद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कई वीडियो फुटेज साझा किए। वीडियो में कुछ लोग एक इमारत के लोहे के गेट पर बांस के डंडों से प्रहार करते और बाहर लगे होर्डिंग्स तथा पोस्टर्स को फाड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। सांसद ने दावा किया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और पिछले दो दिनों से अज्ञात लोग उनके दफ्तर व आवास की रेकी कर रहे थे।
अभिषेक बनर्जी ने बयान जारी करते हुए कहा कि उनके समर्थकों पर हमला किया गया, जिसमें कम से कम दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि एक कार्यकर्ता के चेहरे पर गंभीर चोट आई है और दूसरे की आंख के निचले हिस्से की हड्डी टूट गई है। उन्होंने इसे पिछले छह महीनों में अपनी जान लेने की सातवीं कोशिश बताया। टीएमसी सांसद ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय पुलिस बल और न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों ने उपद्रव किया और प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। घटना के बाद अभिषेक बनर्जी खुद अपने आवास से बाहर निकले और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों तथा प्रदर्शनकारियों से तीखी बहस की।
प्रमुख कड़ियां और टीएमसी के आरोप
तारीख और समय: 6-7 नवंबर 2026 की दरमियानी रात करीब 2:00 बजे।
स्थान: कालीघाट, दक्षिण कोलकाता स्थित अभिषेक बनर्जी का आवास सह पुराना पार्टी कार्यालय।
टीएमसी के दावे: दो दिनों से आवास और कार्यालय की रेकी की जा रही थी; हथियारबंद लोगों ने गेट पर हमला किया, ईंट-पत्थर फेंके और बैनर फाड़े।
सांसद का बयान: पिछले 6 महीनों के भीतर जान लेने का यह 7वां प्रयास बताया और पुलिस व अदालतों की निष्क्रियता का आरोप लगाया।
शिकायत का स्तर: मामले को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में लाने की बात कही गई।
इन आरोपों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी और पूरे मामले को तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक राजनीति व जनता का ध्यान भटकाने की साजिश बताया। बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आधी रात को फुटपाथ पर जन्मदिन मनाकर उपद्रव पैदा किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के कुछ कार्यकर्ता काली पूजा की मूर्ति लाने के लिए कुमारटोली की तरफ जा रहे थे, जहां रास्ते में टीएमसी समर्थकों द्वारा रास्ता रोके जाने को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। घोष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी के पास अभिषेक बनर्जी पर हमला करने या उनकी जान लेने की कोशिश करने का समय नहीं है, और टीएमसी नेता राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए ऐसे मनगढ़ंत दावे कर रहे हैं।
कोलकाता पुलिस के प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, रात में हुई इस झड़प की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग करके स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधात्मक नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली है और वीडियो की फोरेंसिक व तकनीकी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक हथियारों के इस्तेमाल या किसी सुनियोजित हमले के आरोपों पर आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
बीएनएसएस धारा 163: कालीघाट इलाके में निषेधाज्ञा (पहले सीआरपीसी 144) को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था: आवास के बाहर अतिरिक्त पुलिस पिकेट और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) तैनात किए गए।
जांच का दायरा: रात के समय की सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का मिलान।
विपक्ष का रुख: बीजेपी ने पूरे विवाद को जन्मदिन समारोह के दौरान सड़क अवरुद्ध होने से उपजा तात्कालिक विवाद बताया।
अभिषेक बनर्जी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पिछले कुछ महीनों की अन्य घटनाओं का भी हवाला दिया। उन्होंने 19 जून की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह दिल्ली से लौट रहे थे, तब सोनारपुर इलाके में हथियारबंद लोगों ने उन्हें निशाना बनाने का प्रयास किया था, जिन्हें उनके सुरक्षाकर्मियों और कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस को सौंपा था। सांसद ने आरोप लगाया कि लिखित शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद जांच एजेंसियों ने कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्रालय और पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक से पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषियों की पहचान सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच पहले से ही विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर टकराव जारी है। कालीघाट की इस घटना ने राज्य के राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे इस तरह के झूठे मुकदमों और आरोपों के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार गश्त की जा रही है और औपचारिक शिकायत मिलने के बाद कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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