Ram Mandir Ayodhya: राम मंदिर को कब मिलेगा नया CEO? ट्रस्ट की बैठक में फैसला, एक पद के लिए आए 5200 आवेदन
अयोध्या राम मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के एक पद के लिए 5200 आवेदन आए हैं। दान चोरी विवाद के बाद बने इस पद पर नियुक्ति एक महीने के लिए टल गई है।

- Ram Mandir CEO Appointment: दान विवाद के बाद सृजित CEO पद की नियुक्ति टली, 5200 आवेदनों की स्क्रूटनी शुरू
- राम मंदिर के CEO पद के लिए मची होड़: 1 पद और 5200 दावेदार! श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने क्यों टाली नियुक्ति?
- राम मंदिर सीईओ नियुक्ति: 5200 आवेदनों के चलते एक महीने टली नियुक्ति, ट्रस्ट की अगली बैठक में होगा अंतिम फैसला
अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक कामकाज को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सृजित किए गए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद पर नियुक्ति को फिलहाल एक महीने के लिए टाल दिया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा निकाली गई इस एक रिक्ति के लिए उम्मीद से कहीं अधिक, यानी कुल 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं। पूर्व में सामने आए दान चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट ने मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन को पेशेवर बनाने के उद्देश्य से इस नए पद को बनाने का निर्णय लिया था। इतने विशाल पैमाने पर आए आवेदनों की गहन जांच और योग्य उम्मीदवार के चयन में लग रहे समय को देखते हुए ट्रस्ट ने अगली बैठक तक नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और रोजाना आने वाले करोड़ों रुपये के दान को देखते हुए एक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हाल ही में दान राशि में अनियमितताओं और चोरी के आरोपों के सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर प्रशासन की देखरेख के लिए एक स्वतंत्र और योग्य सीईओ (CEO) नियुक्त करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।
हालांकि, इस पद की आधिकारिक घोषणा के बाद देशभर से प्रशासनिक, वित्तीय और प्रबंधन पृष्ठभूमि वाले योग्य उम्मीदवारों ने इसमें जबरदस्त रुचि दिखाई। एक अकेले पद के लिए 5200 से अधिक उम्मीदवारों का आवेदन करना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। इसी भारी संख्या के कारण ट्रस्ट प्रबंधन को पूरी चयन प्रक्रिया की समीक्षा करने और आवेदनों की विस्तृत जांच (स्क्रूटनी) के लिए अतिरिक्त समय लेना पड़ रहा है।
राम मंदिर के औपचारिक उद्घाटन के बाद से ही श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही मंदिर में प्राप्त होने वाले नकद दान, ऑनलाइन दान और भेंट वस्तुओं के प्रबंधन को लेकर चुनौतियां भी बढ़ गई थीं। जब दान प्रबंधन से जुड़ी कमियों और कथित चोरी की शिकायतें सामने आईं, तो ट्रस्ट ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाया।
ट्रस्ट ने निर्णय लिया कि मंदिर के दैनिक प्रबंधन, सुरक्षा समन्वय, वित्तीय लेनदेन और व्यवस्थागत कार्यों को संचालित करने के लिए एक योग्य मुख्य कार्यपालक अधिकारी रखा जाएगा। इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए, लेकिन अंतिम तिथि तक प्राप्त हुए आवेदनों का आंकड़ा 5200 तक पहुंच गया। आवेदकों की इस भारी संख्या को देखते हुए स्क्रीनिंग कमेटी के लिए सभी फाइलों की पड़ताल करना और उनमें से सबसे योग्य व विश्वसनीय व्यक्तियों की सूची तैयार करना एक कठिन कार्य बन गया। स्थिति की समीक्षा करते हुए ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जल्दबाजी में चयन करने के बजाय सभी पत्रों का निष्पक्ष और गहन मूल्यांकन किया जाए, जिसके चलते नियुक्ति प्रक्रिया को एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टता प्रदान की है। ट्रस्ट के प्रतिनिधियों का कहना है कि राम मंदिर जैसे वैश्विक आस्था के केंद्र के प्रशासनिक दायित्व के लिए अत्यधिक सतर्कता और पारदर्शिता जरूरी है। इतने बड़े पैमाने पर आए आवेदनों ने यह साबित किया है कि देश के अनुभवी प्रशासनिक और प्रबंधकीय पेशेवर इस सेवा से जुड़ने के इच्छुक हैं। ट्रस्ट के अनुसार, प्राप्त आवेदनों में कई पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज और प्रबंधन विशेषज्ञ शामिल हैं। ट्रस्ट का प्राथमिक उद्देश्य एक ऐसे व्यक्ति का चयन करना है जिसकी प्रशासनिक क्षमता अकाट्य हो और जिसकी छवि पूरी तरह बेदाग हो।
दूसरी ओर, स्थानीय संतों और अयोध्या के प्रबुद्ध वर्ग ने भी इस प्रशासनिक बदलाव का स्वागत किया है। उनका मानना है कि विशाल दान राशि की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए पेशेवर अधिकारी की तैनाती आवश्यक थी। नियुक्ति में हो रही देरी को संत समाज ने एक सकारात्मक कदम बताया है, ताकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचा जा सके और सही व्यक्ति को ही यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए।
सीईओ पद के सृजन और इसके लिए मिले 5200 आवेदनों से यह साफ हो गया है कि राम मंदिर का प्रशासनिक ढांचा अब पारंपरिक व्यवस्था से निकलकर अत्याधुनिक कॉर्पोरेट और पेशेवर प्रबंधन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। इस व्यवस्था के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद मंदिर के दान की हर एक पाई का हिसाब-किताब डिजिटल और ऑडिटेड होगा, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमिता या चोरी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने, वीआईपी मूवमेंट को संभालने और मंदिर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न निकायों के साथ समन्वय स्थापित करने में भी इस नए सीईओ की अहम भूमिका होगी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्क्रीनिंग कमेटी वर्तमान में सभी 5200 आवेदनों की योग्यता, अनुभव और चरित्र सत्यापन की दिशा में काम कर रही है। योग्य उम्मीदवारों को छांटकर एक छोटी सूची (शॉर्टलिस्ट) तैयार की जाएगी, जिसके बाद उन्हें साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाएगा। ट्रस्ट की आगामी बोर्ड बैठक, जो अगले एक महीने के भीतर आयोजित होने वाली है, में इन शॉर्टलिस्ट किए गए नामों पर अंतिम चर्चा होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगली बैठक के दौरान ही राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
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