Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी कब है? जानिए मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन की सटीक तारीख

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। जानिए दिल्ली, मुंबई, पुणे का स्थापना मुहूर्त, पूजन विधि, सामग्री और विसर्जन की पूरी जानकारी।

Sep 6, 2026 - 19:35
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Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी कब है? जानिए मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन की सटीक तारीख
  • Ganesh Chaturthi 2026 Date Muhurat: 14 सितंबर को विराजमान होंगे गणपति बाप्पा, जानिए दिल्ली, मुंबई, पुणे और कोलकाता का स्थापना मुहूर्त
  • Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर को घर पधारेंगे विघ्नहर्ता गणेश, जानिए दोपहर में ही क्यों होती है मूर्ति स्थापना और शहरवार शुभ मुहूर्त
  • Ganesh Chaturthi 2026 Date and Shubh Muhurat: गणेश चतुर्थी की तिथि, स्थापना मुहूर्त, पूजन सामग्री और संपूर्ण विधि देखें

हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य भगवान गणेश का जन्मोत्सव यानी गणेश चतुर्थी का पावन पर्व इस वर्ष 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार को देशभर में पूरी आस्था और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाला यह 10 दिवसीय गणेशोत्सव महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना समेत भारत के कोने-कोने में श्रद्धालुओं के लिए भक्ति का विशेष अवसर लाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विघ्नहर्ता श्री गणेश दोपहर के समय अवतरित हुए थे, इसलिए घरों और पूजा पंडालों में मूर्ति स्थापना दोपहर के शुभ मुहूर्त में ही की जाती है। श्रद्धालु 14 सितंबर को शुभ समय में बाप्पा को अपने घर लाकर 25 सितंबर 2026 को गाजे-बाजे के साथ उनका विसर्जन करेंगे।

  • उत्सव की महत्ता और धार्मिक परंपरा

सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, विवाह का मंडप प्रज्वलित करने, नए व्यापार की शुरुआत या बहीखाते के प्रथम पृष्ठ पर श्रीगणेश लिखने की प्रथा युगों से चली आ रही है। भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता हैं, जो भक्तों के जीवन से सभी कष्टों को दूर करते हैं। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक के दस दिनों में भगवान गणेश प्रत्यक्ष रूप से धरती पर निवास करते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

सामान्यतः हिंदू व्रत और त्योहार सूर्योदय व्यापिनी तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, लेकिन गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना के लिए दोपहर का समय चुना जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को दोपहर काल में हुआ था, इसलिए मध्याह्न काल में ही बाप्पा की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार पूजन करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

  • तिमिंग और शहरवार मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 15 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक प्रभावी रहेगी। उदयातिथि और मध्याह्न काल के संयोग के कारण 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा।

देश के प्रमुख शहरों में स्थानीय सूर्योदय और काल गणना के अनुसार गणेश प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा। देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थापना का शुभ समय सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। वहीं महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में श्रद्धालु सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट के बीच प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं। पुणे में स्थापना का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 1 बजकर 44 मिनट तक और कोलकाता में सुबह 10 बजकर 18 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। दस दिनों के इस महाउत्सव के बाद मुख्य अनंत चतुर्दशी विसर्जन की तिथि 25 सितंबर 2026, दिन शुक्रवार को निर्धारित है।

  • गणेश स्थापना और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के ईशान कोण या पूजा स्थल को भली-भांति साफ करके उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके लकड़ी की एक साफ चौकी स्थापित करें। इस चौकी पर लाल या पीला स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और उस पर हल्दी-कुमकुम से स्वास्तिक का निर्माण करें। स्वास्तिक के मध्य में थोड़े अक्षत (चावल) रखें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।

दोपहर के शुभ मुहूर्त में बाप्पा की प्रतिमा को चौकी पर अक्षत के ऊपर स्थापित करें। मूर्ति पर गंगाजल का छिड़काव करते हुए "ऊं गम गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। इसके बाद प्रतिमा के दाहिनी ओर तांबे का कलश रखें, जिसमें शुद्ध जल, एक सिक्का, सुपारी और आम के पत्ते रखकर ऊपर नारियल स्थापित करें।

पूजा के दौरान भगवान गणेश को चंदन और रोली का तिलक लगाएं। इसके बाद मौली वस्त्र के रूप में अर्पित करें। बाप्पा को 21 पत्तियों वाली दूर्वा घास, लाल गुड़हल का फूल, अक्षत और रोली अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके पश्चात शुद्ध देशी घी का दीपक और भीमसेनी कपूर का धूप जलाकर आरती की तैयारी करें।

  • मोदक भोग और आतिथ्य नियम

भगवान गणेश को मोदक और लड्डू अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान उन्हें 21 मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके साथ ही पंचमेवा, मिश्री और ऋतु फलों का नैवेद्य अर्पित करें। पूजन के समय गणेश चतुर्थी की कथा और स्यमंतक मणि से जुड़ी पौराणिक कथा का श्रवण या वाचन करना आवश्यक माना गया है। अंत में धूप-दीप से आरती कर परिवार के कल्याण की कामना करें।

धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, जितने दिन भी भगवान गणेश आपके घर में विराजते हैं, वे परिवार के विशेष अतिथि की भांति होते हैं। इसलिए जब तक बाप्पा घर में रहें, रोजाना सुबह और शाम नियम से उनकी आरती करें और सात्विक वातावरण बनाए रखें।

  • पूजन सामग्री

गणेश चतुर्थी की पूजा को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए श्रद्धालुओं को कुछ मुख्य सामग्रियां पहले से एकत्र कर लेनी चाहिए। इसमें मुख्य रूप से भगवान गणेश की माटी की प्रतिमा, गंगाजल, तांबे का कलश, आम के पत्ते और जटावाला नारियल शामिल है। इसके अतिरिक्त रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, मौली धागा, देशी घी, भीमसेनी कपूर, धूप, सुपारी, हल्दी की गांठ, पंचमेवा, मिश्री, दूर्वा घास, लाल फूल (गुड़हल) और आरती की थाली की आवश्यकता होती है।

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