BJP vs Congress: संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- लोकतांत्रिक जनादेश को नकार कर सत्ता परिवर्तन की हो रही कोशिश
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि देश में जनादेश को दरकिनार कर प्रायोजित सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है।

- बीजेपी का कांग्रेस पर बड़ा हमला: संबित पात्रा बोले- राहुल गांधी को सत्ता में लाने के लिए देश में प्रायोजित तख्तापलट की साजिश
- 'चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास': बीजेपी सांसद संबित पात्रा का आरोप, विदेशी ताकतों के सहारे सत्ता पाना चाहते हैं राहुल गांधी
- संबित पात्रा की प्रेसवार्ता: कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप, पूछा- देश विरोधी विमर्श से सत्ता पाने की मंशा क्यों?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने कांग्रेस और विपक्ष पर गंभीर राजनीतिक हमला बोला है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सत्ता में बैठाने के लिए देश में एक सुनियोजित और प्रायोजित सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी मैदान में लगातार पराजय का सामना करने के बाद अब लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को कमजोर करने के लिए असाधारण और बाहरी विमर्शों का सहारा लिया जा रहा है।
पात्रा ने दावा किया कि देश की जनता ने चुनावों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त किया है। इसके बावजूद कुछ ताकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अस्थिर कर सत्ता हथियाने का षड्यंत्र रच रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी दल देश की संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव प्रक्रिया और अर्थव्यवस्था की साख पर निरंतर सवाल उठाकर एक अस्थिर माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
- 'जनादेश को नकारने का सुनियोजित एजेंडा': संबित पात्रा
भाजपा सांसद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का मार्ग जनता का विश्वास और मत होता है, न कि षड्यंत्र और कृत्रिम जन-आक्रोश का निर्माण करना। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों, विदेशी संगठनों और विशिष्ट समूहों के साथ मिलकर ऐसा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है जिससे यह दर्शाया जा सके कि भारत का लोकतंत्र और संस्थाएं संकट में हैं।
संबित पात्रा के अनुसार, "यह कोई सहज राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि एक सुविचारित तंत्र के तहत चलाई जा रही मुहिम है जिसका एकमात्र उद्देश्य राहुल गांधी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब देश किसी वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक या कूटनीतिक ताकत दिखाता है, तभी इस तरह के सुनियोजित अभियान तेज कर दिए जाते हैं ताकि निवेशकों और वैश्विक समुदाय के बीच अविश्वास का माहौल बने।
- संवैधानिक संस्थाओं पर हमलों का लगाया आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी दलों द्वारा भारतीय निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर उठाए जाने वाले सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब चुनाव के नतीजे पक्ष में आते हैं तो ईवीएम और संस्थाएं सही हो जाती हैं, लेकिन पराजय मिलते ही पूरी चुनावी प्रक्रिया पर संशय खड़ा कर दिया जाता है। पात्रा ने इसे संस्थागत व्यवस्था को भीतर से कमजोर करने का खतरनाक प्रयास करार दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार की नीतियों की आलोचना करना और जनता के मुद्दे उठाना है, लेकिन वर्तमान में विपक्ष की राजनीति राष्ट्र की विश्वसनीयता को दांव पर लगाकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की हो गई है।
- कांग्रेस का पलटवार: 'विफलताओं से ध्यान भटकाने की रणनीति'
भाजपा के इन तीखे आरोपों पर कांग्रेस पार्टी ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने संबित पात्रा के बयानों को पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और हास्यास्पद बताते हुए खारिज कर दिया। मुख्य विपक्षी दल की ओर से कहा गया कि भाजपा सरकार बेरोजगारी, महंगाई, सीमा सुरक्षा और आर्थिक विषमता जैसे मूलभूत मुद्दों पर अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए अक्सर इस तरह के 'षड्यंत्रकारी सिद्धांतों' का सहारा लेती है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी संसद और सड़क दोनों जगहों पर जनहित के मुद्दे उठा रहे हैं। सरकार से सवाल पूछना और जनविरोधी नीतियों का विरोध करना संविधान सम्मत अधिकार है, जिसे सत्ता पक्ष सत्ता परिवर्तन की साजिश बताकर दबाने की कोशिश कर रहा है।
- राजनीतिक खींचतान
भारतीय राजनीति में 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों का इस्तेमाल आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के संदर्भ में किया जाता रहा है। घरेलू राजनीति में ऐसे आरोपों का खुलकर सामने आना सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास और टकराव को दर्शाता है। आने वाले समय में होने वाले विधानसभा चुनावों और आगामी संसद सत्र के दौरान यह मुद्दा और अधिक गरमाने की संभावना है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं के उल्लंघन के आरोप लगा सकते हैं।
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