Dharmendra Pradhan on NEET: 'राहुल-खरगे की रैली से छूटी बच्चों की परीक्षा', शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस को घेरा
NEET Re-Exam 2026: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के कारण कई छात्रों की परीक्षा छूट गई।

- NEET Re-Exam पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा हमला, कहा- री-एग्जाम की सफलता से निराश है कांग्रेस
- "NEET री-एग्जाम की सफलता से कांग्रेस निराश..." राहुल-खरगे की रैली पर भड़के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, लगाया बड़ा आरोप
- NEET Exam Controversy: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस पर तीखा तंज, राहुल-खरगे की रैली को बताया परीक्षा छूटने की वजह
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर जारी सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी पर एक बेहद तीखा और बड़ा हमला बोला है। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि हाल ही में आयोजित हुए NEET री-एग्जाम की सफलता से कांग्रेस पूरी तरह निराश और हताश हो चुकी है। धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की राजनीतिक रैली के कारण देश के कई केंद्रों पर बच्चों की महत्वपूर्ण परीक्षा छूट गई। जून 2026 के इस सियासी घटनाक्रम के बाद अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छात्रों के भविष्य और परीक्षा की शुचिता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के आयोजन और उसके बाद उठे विवादों के निवारण के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा कुछ प्रभावित छात्रों के लिए री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) का आयोजन किया गया था। सरकार और शिक्षा मंत्रालय का दावा है कि इस परीक्षा को देश भर में पूरी शुचिता और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच सफलतापूर्वक संपन्न करा लिया गया। इसी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की हालिया रैली को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राजनीतिक जमावड़े और उसके कारण लगे ट्रैफिक या अन्य अव्यवस्थाओं की वजह से कई परीक्षार्थी समय पर केंद्र नहीं पहुंच सके और उनकी परीक्षा छूट गई।
नीट परीक्षा को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से देश का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। विपक्ष लगातार संसद से लेकर सड़क तक पेपर लीक और अन्य विसंगतियों को लेकर सरकार को घेर रहा था। इसी पृष्ठभूमि में कुछ केंद्रों और विशिष्ट छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था।
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पुनः परीक्षा का सफल आयोजन: शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, री-एग्जामिनेशन को पूरी तरह से पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय किए गए थे। परीक्षा केंद्रों पर जैमर्स, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और कड़े नियमों का पालन कराया गया। सरकार का मानना है कि इस सफल आयोजन ने विपक्ष के उन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें पूरी व्यवस्था के ठप होने की बात कही जा रही थी।
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रैली और छात्रों की परेशानी का मुद्दा: शिक्षा मंत्री ने अपने बयान में जिस घटना का उल्लेख किया, वह कांग्रेस की एक बड़ी राजनीतिक रैली से जुड़ी है। आरोप है कि इस रैली के मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था के कारण परीक्षा के दिन कई शहरों में भारी जाम की स्थिति पैदा हो गई। समय पर रिपोर्टिंग न कर पाने के कारण परीक्षा केंद्रों के गेट बंद हो गए और कई छात्र अपने भविष्य की इस महत्वपूर्ण परीक्षा में बैठने से वंचित रह गए।
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धर्मेंद्र प्रधान का तीखा हमला: शिक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का प्रयास करती रही है। जब परीक्षा का सफल संचालन हो गया, तो कांग्रेस को अपनी राजनीति डूबती नजर आ रही है, जिसके कारण संगठन के भीतर भारी निराशा का माहौल है।
इस पूरे विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "NEET री-एग्जाम की सफलता से कांग्रेस निराश है। वे नहीं चाहते कि देश की शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चले। राहुल-खरगे की रैली से कई बच्चों की परीक्षा छूटी है, जिसकी जिम्मेदारी कांग्रेस को लेनी चाहिए। राजनीतिक लाभ के लिए देश के होनहार छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ कतई स्वीकार्य नहीं है।"
दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी और मुख्य विपक्षी नेताओं ने शिक्षा मंत्री के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और अपनी नाकामियों को छिपाने का बहाना बताया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार मूल मुद्दे यानी पेपर लीक की मुख्य जांच और एनटीए के लचर तंत्र से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष पर मनगढ़ंत आरोप मढ़ रही है। रैली का आयोजन पहले से तय था और प्रशासन को इसके रूट की पूरी जानकारी थी।
आगामी सत्रों में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच और अधिक तीखी झड़प देखने को मिल सकती है, जिससे विधायी कार्यों में बाधा आने की आशंका है। राजनीतिक दलों की इस बयानबाजी के बीच असली नुकसान उन छात्रों का हो रहा है जिनकी परीक्षाएं छूट गई हैं। छात्रों और अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि क्या उन्हें दोबारा मौका मिलेगा या उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। री-एग्जाम भले ही सफल रहा हो, लेकिन पूरी परीक्षा प्रणाली और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सुप्रीम कोर्ट और आम जनता के बीच अभी भी चर्चाएं और समीक्षाएं जारी हैं।
शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। प्रभावित छात्र और उनके अभिभावक अब कानूनी रास्ता अपनाने या दोबारा परीक्षा की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि वह भविष्य की सभी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को फुलप्रूफ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए इसरो के पूर्व प्रमुख की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर देशव्यापी प्रदर्शनों को और तेज करने की रणनीति बना रहा है।
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