Market Crash: हफ्ते के पहले ही दिन शेयर बाजार धड़ाम, निवेशकों के ₹7 लाख करोड़ डूबे; सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट
सप्ताह के पहले ही दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली से कोहराम मच गया। बीएसई और एनएसई के प्रमुख सूचकांक लुढ़कने से निवेशकों की करीब 7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई।

- Share Market Bloodbath: 'ब्लडी मंडे' साबित हुआ कारोबारी सप्ताह का पहला दिन, बिकवाली की आंधी में लाल निशान पर बंद हुआ बाजार
- Stock Market Crash Today: बाजार में हाहाकार, 7 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा; जानिए भारी गिरावट के 4 मुख्य कारण
- Sensex Nifty Fall: चौतरफा बिकवाली से सहमा दलाल स्ट्रीट, बैंकिंग और आईटी शेयरों में भारी गिरावट से निवेशक बेहाल
मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे दलाल स्ट्रीट पर पूरी तरह 'ब्लडी मंडे' जैसी स्थिति बन गई। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की अनवरत पूंजी निकासी और भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच दोनों प्रमुख मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी शुरुआती कारोबार से ही भारी दबाव में आ गए। दिन के अंत तक बाजार में मचे हाहाकार के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग 7 लाख करोड़ रुपये घट गया।
इस चौतरफा गिरावट ने लार्ज-कैप से लेकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट तक के निवेशकों को गहरा झटका दिया है। सुबह बाजार के खुलते ही बिकवाली का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह दोपहर के सत्र तक और आक्रामक हो गया, जिससे किसी भी स्तर पर रिकवरी की गुंजाइश नहीं बनी।
- सूचकांकों का हाल: सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गोता
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार पर मंदी हावी रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से गैप-डाउन खुला और जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, नुकसान बढ़ता चला गया। प्रमुख तकनीकी स्तरों के टूटने से स्वचालित स्टॉप-लॉस ट्रिगर हुए, जिससे बिकवाली का दायरा और फैल गया।
निफ्टी भी अपने महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गया। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), ऑटोमोबाइल, मेटल और रियल एस्टेट जैसे प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में दो से चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई का मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी भारी दबाव में बंद हुआ, जिससे खुदरा (रिटेल) निवेशकों को सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
- निवेशकों के 7 लाख करोड़ रुपये कैसे हुए स्वाहा?
शेयर बाजार में पूंजी के नुकसान का सीधा पैमाना बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप होता है। पिछले कारोबारी सत्र के समापन पर बीएसई का मार्केट कैप जिस ऐतिहासिक स्तर पर था, वह सोमवार के भारी गिरावट के चलते लगभग 7 लाख करोड़ रुपये नीचे आ गया।
यह गिरावट दर्शाती है कि केवल कुछ चुनिंदा शेयरों में ही नहीं, बल्कि समूचे बाजार में संस्थागत और खुदरा दोनों स्तरों पर नकदी निकालने (Profit Booking & Panic Selling) की होड़ मची रही। ब्लूचिप कंपनियों के शेयरों में आई अचानक तेज गिरावट ने सूचकांकों को नीचे खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
- बाजार में इस बड़ी गिरावट के 4 मुख्य कारण
बाजार विश्लेषकों और वित्तीय विशेषज्ञों ने इस बिकवाली के पीछे चार प्रमुख घरेलू और वैश्विक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
कमजोर वैश्विक संकेत और मंदी की आहट: प्रमुख एशियाई बाजारों जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग में सुबह से ही भारी कमजोरी देखी गई। इसके साथ ही अमेरिकी वायदा बाजारों में गिरावट के रुझान ने घरेलू निवेशकों के विश्वास को कमजोर किया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार निकासी: विदेशी फंड्स द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली जा रही है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के कारण वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से जोखिम कम कर रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की हलचल: मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव की आशंका बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता से भारत जैसे आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ने का डर बना रहता है।
मूल्यांकन (Valuation) की चिंता और तिमाही नतीजों की पूर्व-प्रतीक्षा: भारतीय बाजार पिछले कुछ समय से प्रीमियम मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे थे। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी तिमाही वित्तीय नतीजों से पहले बाजार में सुधार (Correction) अपेक्षित था, जो इस तेज बिकवाली के रूप में सामने आया।
सेक्टरवार प्रदर्शन: कौन से शेयर सबसे ज्यादा टूटे?
सेक्टर प्रदर्शन का रुझान प्रमुख प्रभावित क्षेत्र
बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं भारी गिरावट निजी व सरकारी दोनों बैंकों में बिकवाली
आईटी (IT) सुस्त और नकारात्मक वैश्विक तकनीकी मांग पर अनिश्चितता
ऑटोमोबाइल तीव्र दबाव त्योहारी मांग के बाद आपूर्ति व बिक्री चिंताएं
मेटल और ऊर्जा लाल निशान पर वैश्विक कमोडिटी कीमतों में मंदी का असर
रियल एस्टेट मुनाफावसूली ब्याज दरों को लेकर सतर्कता से बिकवाली
बाजार में मचे इस अफरा-तफरी के बीच वित्तीय विशेषज्ञों ने आम निवेशकों को घबराहट में आकर फैसले न लेने (Panic Selling से बचने) की सलाह दी है। विश्लेषकों का कहना है कि शेयर बाजार में इस तरह के तेज करेक्शन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों को आकर्षक कीमतों पर संचित करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। दैनिक आधार पर ट्रेडिंग करने वालों को सख्त स्टॉप-लॉस बनाए रखने और उच्च लीवरेज वाले सौदों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों के प्रवाह और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
What's Your Reaction?

