Human Body Third Kidney Fact: क्या इंसान के शरीर में 3 किडनी होती हैं? एक्सपर्ट मनीष आचार्य से जानिए त्वचा को 'तीसरी किडनी' कहने का सच

Is Skin The Third Kidney: क्या इंसान के शरीर में 3 किडनी होती हैं? एक्सपर्ट मनीष आचार्य ने बताया कि कैसे हमारी त्वचा (Skin) शरीर में तीसरी किडनी की तरह काम करती है।

Jul 3, 2026 - 13:11
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Human Body Third Kidney Fact: क्या इंसान के शरीर में 3 किडनी होती हैं? एक्सपर्ट मनीष आचार्य से जानिए त्वचा को 'तीसरी किडनी' कहने का सच
मानव शरीर की त्वचा की संरचना और किडनी के कार्य को दर्शाता हुआ एक इन्फोग्राफिक ग्राफिक्स
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मानव शरीर की बनावट और इसके अंगों के कार्य करने का तरीका विज्ञान जगत के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है। आमतौर पर हम सभी जानते हैं कि इंसान के शरीर में दो किडनियां होती हैं, जो रक्त को साफ करने और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती हैं। लेकिन हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञ मनीष आचार्य ने मानव शरीर में 'तीसरी किडनी' (Third Kidney) के अस्तित्व को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जैविक रूप से शरीर में कोई तीसरी किडनी नहीं होती, बल्कि हमारी त्वचा (Skin) को ही उसकी कार्यप्रणाली के कारण 'तीसरी किडनी' कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से यह अवधारणा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि त्वचा भी किडनी की तरह शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाती है। आइए जानते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है और एक्सपर्ट का इस पर क्या कहना है।

  • त्वचा को 'तीसरी किडनी' क्यों कहा जाता है?

जैविक रूप से मनुष्य के शरीर में केवल दो किडनियां होती हैं, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पेट के पिछले हिस्से में स्थित होती हैं। हालांकि, जब बात शरीर को डिटॉक्सिफाई करने या विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने की आती है, तो हमारी त्वचा का काम भी काफी हद तक किडनी जैसा ही होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मनीष आचार्य के अनुसार, त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है। जिस तरह किडनी खून को फिल्टर करके यूरिया, अतिरिक्त नमक और पानी को यूरिन के रास्ते बाहर निकालती है, ठीक उसी तरह हमारी त्वचा पसीने के माध्यम से शरीर के भीतर जमा हानिकारक केमिकल्स, सोडियम और टॉक्सिन्स को बाहर का रास्ता दिखाती है। यही वजह है कि मेडिकल साइंस की भाषा में कई बार त्वचा को 'तीसरी किडनी' के रूप में संबोधित किया जाता है।

  • किडनी और त्वचा के बीच का वैज्ञानिक संबंध

इस वैज्ञानिक तथ्य को समझने के लिए हमें शरीर के उत्सर्जन तंत्र (Excretory System) को समझना होगा। जब हमारी मुख्य किडनियां किसी वजह से पूरी तरह से काम नहीं कर पाती हैं या शरीर पर टॉक्सिन्स का लोड बढ़ जाता है, तो त्वचा बैकअप सिस्टम के रूप में काम करना तेज कर देती है।

पसीने की ग्रंथियां (Sweat glands) शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के साथ-साथ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं। जब हम हैवी वर्कआउट करते हैं या गर्म माहौल में होते हैं, तो पसीने के रूप में निकलने वाला पानी सिर्फ साधारण पानी नहीं होता, बल्कि उसमें कई प्रकार के मेटबॉलिक वेस्ट (Metabolic Waste) शामिल होते हैं। यदि त्वचा अपना काम सही तरीके से न करे, तो इन जहरीले तत्वों का असर सीधे हमारे आंतरिक अंगों पर पड़ सकता है।

इस विषय पर स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि लोगों को इस भ्रांति में नहीं रहना चाहिए कि शरीर के भीतर कोई अन्य छुपा हुआ अंग है। एक्सपर्ट मनीष आचार्य ने साफ किया कि यह केवल एक उपमा है, जो त्वचा के महत्व को दर्शाती है। उनके मुताबिक, "लोग अक्सर त्वचा को सिर्फ सुंदरता और बाहरी निखार से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह शरीर का एक बेहद सक्रिय उत्सर्जन अंग है। यदि आप अपनी त्वचा को स्वस्थ रखते हैं, तो आप अनजाने में अपनी किडनियों के काम का बोझ कम कर रहे होते हैं।"

अन्य डॉक्टरों ने भी इस बात का समर्थन किया है कि अत्यधिक पसीना आने या त्वचा के रोमछिद्र बंद होने से शरीर की अंदरूनी सफाई प्रणाली प्रभावित होती है। इसलिए त्वचा की स्वच्छता सीधे तौर पर आंतरिक स्वास्थ्य से जुड़ी है।

  • स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव और महत्व

त्वचा को 'तीसरी किडनी' मानने के इस दृष्टिकोण का सीधा प्रभाव हमारी जीवनशैली पर पड़ता है। आज के समय में खराब खान-पान और प्रदूषण के कारण शरीर में टॉक्सिन्स तेजी से जमा होते हैं।

किडनी पर दबाव कम होना: यदि त्वचा पसीने के जरिए प्रभावी रूप से कचरा बाहर निकालती है, तो मुख्य किडनियों पर काम का दबाव संतुलित रहता है।

त्वचा रोगों का संकेत: यदि किसी व्यक्ति के शरीर से टॉक्सिन्स सही से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो उसका असर चेहरे पर मुंहासे, रैशेज या एलर्जी के रूप में दिखने लगता है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर का अंदरूनी फिल्टर सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है।

  • त्वचा और किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के इस प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी आदतों को दिनचर्या में शामिल करना बेहद आवश्यक है:

भरपूर पानी पिएं: पानी पीने से किडनी और त्वचा दोनों को पर्याप्त नमी मिलती है, जिससे टॉक्सिन्स को बाहर निकालना आसान हो जाता है।

शारीरिक श्रम (Exercise): नियमित रूप से व्यायाम या योग करें ताकि शरीर से पसीना निकले और रोमछिद्र खुले रहें।

केमिकल प्रोडक्ट्स से दूरी: त्वचा पर अत्यधिक हैवी केमिकल वाले प्रोडक्ट्स लगाने से बचें, क्योंकि ये रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं जिससे प्राकृतिक उत्सर्जन रुक जाता है।
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