KEC International Share Crash - पश्चिम एशिया तनाव से लगा ₹600 करोड़ का फटका, KEC इंटरनेशनल ने घटाया गाइडेंस; शेयर 8% टूटा

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के चलते KEC इंटरनेशनल को लगभग ₹600 करोड़ का झटका लगा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 का रेवेन्यू गाइडेंस घटा दिया, जिससे शेयर 8% तक गिर गया।

Nov 3, 2026 - 14:01
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KEC International Share Crash - पश्चिम एशिया तनाव से लगा ₹600 करोड़ का फटका, KEC इंटरनेशनल ने घटाया गाइडेंस; शेयर 8% टूटा
  • KEC International Q2 Results - दूसरी तिमाही में शुद्ध मुनाफा 81.5% लुढ़का, कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के रेवेन्यू टारगेट में की कटौती
  • West Asia Conflict Impact On Stocks - युद्ध और सप्लाई चेन संकट का असर, KEC इंटरनेशनल के शेयरों में भारी बिकवाली
  • Stock Market Loss - ₹600 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर पड़ा भू-राजनीतिक असर, KEC इंटरनेशनल के मार्जिन और मुनाफे में भारी गिरावट

ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर ईपीसी (Engineering, Procurement, and Construction) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी KEC इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक रुकावटों के चलते कंपनी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कंपनी प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि क्षेत्रीय तनाव के कारण उसके लगभग 600 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स और रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ा है।

इसके चलते प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने वार्षिक राजस्व वृद्धि अनुमान (रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस) को पहले के 12-15 प्रतिशत से घटाकर 8-10 प्रतिशत कर दिया है। इस घोषणा के बाद बाजार में घबराहट फैल गई और कंपनी के शेयर इंट्रा-डे कारोबार में लगभग 8 फीसदी तक टूट गए।

दूसरी तिमाही में शुद्ध मुनाफे में 81.5% की भारी गिरावट

कंपनी द्वारा जारी वित्तीय नतीजों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर मार्जिन दबाव और सप्लाई चेन में व्यवधान का बड़ा असर देखा गया है।

शुद्ध मुनाफा (PAT): कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार (YoY) पर करीब 81.5 प्रतिशत घटकर 29.7 करोड़ रुपये रह गया।

मार्जिन पर असर: माल ढुलाई की लागत (फ्रेट ओवरहेड्स) में बढ़ोतरी, ट्रांजिट में देरी और मिडिल ईस्ट क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की अस्थायी कमी के कारण परिचालन मार्जिन (EBITDA Margin) में भारी संकुचन दर्ज किया गया है।

एग्जीक्यूशन में देरी: पश्चिम एशिया के संवेदनशील इलाकों में चल रहे पावर ट्रांसमिशन और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ने से बिलिंग चक्र पर असर पड़ा है।

मजबूत ऑर्डर बुक के बावजूद चुनौतियां

हालांकि, कंपनी के पास 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की मजबूत ऑर्डर बुक और एल1 (L1) बैकग्राउंड मौजूद है, और घरेलू पावर ट्रांसमिशन व ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से नए टेंडर्स का फ्लो बना हुआ है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले भू-राजनीतिक जोखिमों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

विश्लेषकों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में परिस्थितियां सामान्य नहीं होतीं और आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक कंपनी के विदेशी प्रोजेक्ट्स के निष्पादन (एग्जीक्यूशन) और वर्किंग कैपिटल साइकिल पर दबाव बना रह सकता है। दूसरी छमाही में प्रोजेक्ट्स की रफ्तार और मार्जिन रिकवरी पर ही अब आगे की वित्तीय स्थिति निर्भर करेगी।

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