भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग: भारतीय उच्चायुक्त की ढाका में अहम मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी के नए युग का आगाज़।

भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक बार फिर गर्मजोशी लौटने के संकेत मिल रहे हैं। ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा

Apr 9, 2026 - 12:48
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भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग: भारतीय उच्चायुक्त की ढाका में अहम मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी के नए युग का आगाज़।
भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग: भारतीय उच्चायुक्त की ढाका में अहम मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी के नए युग का आगाज़।
  • यूनुस शासन के बाद बदली कूटनीतिक बयार, रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए भारत और बांग्लादेश ने मिलाया हाथ
  • सीमा सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण पर बनी सहमति, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नई दिल्ली और ढाका के बीच बढ़ी सक्रियता

भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक बार फिर गर्मजोशी लौटने के संकेत मिल रहे हैं। ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार, ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. एकेएम शम्सुल इस्लाम के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों अधिकारियों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग के विभिन्न आयामों की विस्तृत समीक्षा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक संक्रमण का दौर पूरा हो चुका है और नई सरकार भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को फिर से स्थापित करने के लिए तत्पर दिखाई दे रही है। दोनों पक्षों ने माना कि भारत और बांग्लादेश के बीच अटूट बंधन है, जिसकी जड़ें 1971 के मुक्ति संग्राम के साझा बलिदानों में गहराई से समाहित हैं।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर हुई इस वार्ता में सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण पहल और दोनों देशों के रक्षा संस्थानों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। भारतीय उच्चायुक्त ने स्पष्ट किया कि भारत, बांग्लादेश की संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करते हुए एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चर्चा के दौरान द्विपक्षीय परामर्श तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने पर भी सहमति बनी, ताकि किसी भी आकस्मिक सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच वास्तविक समय में समन्वय स्थापित किया जा सके। इस वार्ता को रक्षा संबंधों के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगा।

क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए साझा सुरक्षा चुनौतियों पर भी दोनों प्रतिनिधियों के बीच विचारों का व्यापक आदान-प्रदान हुआ। आतंकवाद, सीमा पार अपराध और कट्टरपंथ जैसी समस्याओं से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। भारतीय पक्ष ने भरोसा दिलाया कि वह बांग्लादेश की नई सरकार के साथ पारस्परिक हित और लाभ के आधार पर बहुआयामी सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। रक्षा सलाहकार इस्लाम ने भी भारत के साथ सैन्य संबंधों के महत्व को स्वीकार करते हुए भविष्य में संयुक्त अभ्यासों और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में विस्तार करने की इच्छा जताई। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के हटने के बाद से ही भारतीय कूटनीति में एक नई ऊर्जा देखी जा रही है। पिछले 18 महीनों के दौरान जो कूटनीतिक दूरियां बढ़ी थीं, उन्हें अब तेजी से कम करने की कोशिश की जा रही है। नई दिल्ली में भी बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और भारतीय विदेश मंत्री के बीच हुई मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब दोनों राष्ट्र 'पीपल-टू-पीपल' कनेक्ट और रक्षा सामंजस्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले हैं।

द्विपक्षीय संबंधों के इस नए अध्याय में रक्षा संबंधों के साथ-साथ आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को भी एकीकृत किया जा रहा है। भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। रक्षा सलाहकार के साथ बैठक के दौरान यह बिंदु भी महत्वपूर्ण रहा कि एक स्थिर और सुरक्षित बांग्लादेश न केवल भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जरूरी है, बल्कि पूरे बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है। इस संदर्भ में, रक्षा संस्थानों के बीच निरंतर संवाद को एक सुरक्षा कवच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो राजनीतिक बदलावों के बावजूद संबंधों को स्थिरता प्रदान करेगा।

मुलाकात के दौरान सैन्य कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कोटा बढ़ाने और रक्षा हार्डवेयर के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को भी टटोला गया। भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत बांग्लादेश को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के लिए दी गई क्रेडिट लाइन का प्रभावी उपयोग करने का प्रस्ताव रखा। इसके माध्यम से बांग्लादेश अपने रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम को गति दे सकेगा। वार्ता में इस बात को विशेष रूप से रखा गया कि दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर विश्वास बहाली के उपाय (CBMs) न केवल सीमाओं पर तनाव कम करेंगे, बल्कि आपसी विश्वास को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहां भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं, भारत और बांग्लादेश का एक-दूसरे के करीब आना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उच्चायुक्त वर्मा ने इस बात की पुष्टि की कि भारत एक समृद्ध और आत्मनिर्भर बांग्लादेश का समर्थन करता है। रक्षा सहयोग का यह मजबूत ढांचा भविष्य में दोनों देशों के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी को और अधिक परिपक्व बनाएगा। सरकार में हुए बदलावों के बाद यह पहली बार है जब इतने उच्च स्तर पर रक्षा मामलों को लेकर स्पष्टता और प्रतिबद्धता दिखाई गई है। दोनों राष्ट्रों ने साझा हितों की रक्षा करने और क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने के लिए एक साथ मिलकर काम करने के संकल्प को दोहराया है।

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