काशीपुर में 'आई लव मोहम्मद' जुलूस के दौरान भीड़ का हंगामा, पुलिसकर्मी पर हमला- वीडियो वायरल, जांच तेज
पुलिस ने पहले ही जुलूस के रूट पर बैरिकेडिंग लगाई थी और पर्याप्त संख्या में जवान तैनात किए थे। एसएसपी उधम सिंह नगर ने बताया कि जुलूस को अनुमति दी गई थी, लेकिन
उत्तराखंड के काशीपुर शहर में रविवार शाम को 'आई लव मोहम्मद' जुलूस के दौरान एक बड़ा हंगामा हो गया। जुलूस में शामिल सैकड़ों लोग सड़क पर इकट्ठा हुए थे, लेकिन बात थोड़ी देर में बेकाबू हो गई। भीड़ ने सड़कों पर तोड़फोड़ शुरू कर दी और उपद्रव मचाया। इस दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौजूद एक पुलिसकर्मी पर हमला बोल दिया गया। उपद्रवियों ने पुलिसकर्मी को घेर लिया और जमकर पिटाई कर दी। पूरा वाकया किसी ने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे भीड़ पुलिसकर्मी को लाठियों और मुक्कों से पीट रही है, जबकि वह खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।
काशीपुर उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले का एक व्यस्त शहर है, जहां विभिन्न समुदायों के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं। 'आई लव मोहम्मद' जुलूस पैगंबर मोहम्मद के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए निकाला जाता है। यह जुलूस हर साल विभिन्न शहरों में निकाला जाता है, लेकिन इस बार काशीपुर में यह शांतिपूर्ण नहीं रह सका। स्थानीय लोगों के अनुसार, जुलूस शाम करीब सात बजे शुरू हुआ था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। लोग नारे लगाते हुए और झंडियां लहराते हुए आगे बढ़ रहे थे। लेकिन जैसे ही जुलूस मुख्य बाजार क्षेत्र से गुजरा, कुछ युवकों ने सड़क पर कब्जा जमा लिया और आवाज तेज करने लगे। इससे ट्रैफिक रुक गया और आसपास के दुकानदारों में नाराजगी फैल गई।
पुलिस ने पहले ही जुलूस के रूट पर बैरिकेडिंग लगाई थी और पर्याप्त संख्या में जवान तैनात किए थे। एसएसपी उधम सिंह नगर ने बताया कि जुलूस को अनुमति दी गई थी, लेकिन शर्तें स्पष्ट थीं कि कोई उपद्रव नहीं होगा। फिर भी, कुछ लोग बेकाबू हो गए। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी जुलूस को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा था। वह भीड़ को पीछे हटने के लिए कह रहा था, लेकिन उपद्रवियों ने उसे पकड़ लिया। दर्जनों लोग उसके चारों ओर घेरा बनाकर खड़े हो गए। कोई लाठी चला रहा था, तो कोई मुक्के मार रहा था। पुलिसकर्मी जमीन पर गिर पड़ा और चिल्ला रहा था, लेकिन भीड़ रुकने का नाम नहीं ले रही थी। आसपास के लोग डर के मारे चुपचाप खड़े हो गए। वीडियो करीब 30 सेकंड का है, लेकिन इतने में ही पूरा दृश्य साफ हो जाता है।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो रविवार रात से ही शेयर हो रहा है। शुरुआत में न्यूज डिगी जैसे पेज ने इसे पोस्ट किया, जिसमें लिखा था कि काशीपुर में जुलूस के दौरान पुलिसकर्मी की पिटाई हुई। इसके बाद हजारों यूजर्स ने इसे रीपोस्ट किया। कुछ लोग पुलिस की तारीफ कर रहे हैं कि उन्होंने धैर्य बनाए रखा, तो कुछ उपद्रव की निंदा कर रहे हैं। ट्विटर पर #KashipurViolence और #PoliceAttack जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। वीडियो देखने वालों की संख्या लाखों में पहुंच गई है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जुलूस शांतिपूर्ण कैसे नहीं रहा। एक यूजर ने लिखा कि धार्मिक आयोजनों में शांति जरूरी है, वरना समाज बंट जाता है।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। एसएसपी उधम सिंह नगर ने कहा कि वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। रविवार रात को ही दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। सोमवार सुबह एक टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही थी। पुलिसकर्मी को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन वह ड्यूटी पर लौट चुका है। एसएसपी ने बताया कि जुलूस के आयोजकों से पूछताछ की गई है। वे कह रहे हैं कि भीड़ में कुछ बाहरी तत्व घुस आए थे, जिन्होंने हंगामा किया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 147 (दंगा भड़काना), 323 (मारपीट) और 353 (सरकारी काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया है। अगर जरूरी हुआ तो धारा 307 (हत्या का प्रयास) भी जोड़ी जा सकती है। शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि तनाव न फैले।
स्थानीय लोग इस घटना से दुखी हैं। एक दुकानदार ने बताया कि बाजार में घंटों ट्रैफिक जाम लगा रहा। बच्चे स्कूल से लौट रहे थे, उन्हें परेशानी हुई। एक महिला ने कहा कि धार्मिक जुलूस अच्छे हैं, लेकिन उपद्रव क्यों? हम सब एक साथ रहते हैं, ऐसे हादसे न हों। काशीपुर में पहले भी जुलूसों के दौरान छोटे-मोटे विवाद हुए हैं, लेकिन इतना बड़ा हंगामा कम ही देखा गया। 2023 में एक जुलूस में पथराव हुआ था, लेकिन पुलिस ने तुरंत काबू कर लिया था। इस बार वीडियो वायरल होने से मामला ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया ने पुलिस को सतर्क कर दिया है। पहले ऐसे मामले दब जाते थे, अब वीडियो सबूत बन जाता है।
'आई लव मोहम्मद' अभियान की शुरुआत कुछ साल पहले हुई थी। इसका मकसद पैगंबर के प्रति मोहब्बत फैलाना है। देशभर में लाखों लोग इसमें हिस्सा लेते हैं। लेकिन कुछ जगहों पर विवाद भी होता है। कानपुर में अप्रैल 2025 में इसी अभियान के जुलूस पर पथराव हुआ था, जिसमें कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। तब ओवैसी जैसे नेताओं ने पुलिस पर सवाल उठाए थे। काशीपुर की घटना भी उसी कड़ी का हिस्सा लग रही है। आयोजकों का कहना है कि वे शांति चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग गड़बड़ी फैलाते हैं। पुलिस ने आयोजकों को चेतावनी दी है कि भविष्य में सख्ती बरती जाएगी।
यह घटना समाज के लिए सबक है। धार्मिक आयोजन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन कानून सबके ऊपर है। उपद्रव से कोई फायदा नहीं। काशीपुर जैसे शहरों में विभिन्न धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते हैं। ऐसे हादसे सद्भाव बिगाड़ते हैं। उम्मीद है कि जांच में दोषी पकड़े जाएंगे और सजा मिलेगी। इससे भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी। पुलिसकर्मी का साहस सराहनीय है। वह ड्यूटी निभा रहा था, फिर भी हमला झेला। समाज को ऐसे योद्धाओं का सम्मान करना चाहिए। वीडियो वायरल होने से सच सामने आया, जो अच्छी बात है। अब न्याय हो, यही सबकी कामना है।
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