औरैया में अनोखी घटना: घर में चल रहा था अंतिम संस्कार के बाद 'शुद्धि' कार्य, अचानक जिंदा लौटा युवक, उड़े सबके होश
उत्तर प्रदेश के औरैया में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिस युवक को मृत समझकर परिजन अंतिम संस्कार कर चुके थे, वह 'शुद्धि' कार्यक्रम के दौरान अचानक जिंदा घर लौट आया।

- Auraiya News: शव का अंतिम संस्कार कर घर में चल रही थी 'शुद्धि', तभी दरवाजे पर जिंदा पहुंचा युवक; पुलिस-परिजन हैरान
- घर में चल रहा था अंतिम संस्कार के बाद 'शुद्धि' का काम, तभी दरवाजे पर आ खड़ा हुआ 'मृत' युवक! नजारा देख पुलिस और घरवाले सन्न
- औरैया: अंतिम संस्कार के बाद घर में चल रहे 'शुद्धि' कार्यक्रम के बीच जिंदा घर लौटा युवक, पुलिस और परिजन हैरान
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और अनोखी घटना सामने आई है। जिस युवक को अज्ञात शव की पहचान के आधार पर मृत मानकर परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया था, वह युवक घर पर चल रहे अंतिम संस्कार के बाद के 'शुद्धि' कार्यक्रम के दौरान अचानक जीवित वापस लौट आया। यह घटना हाल ही में औरैया जिले के एक ग्रामीण इलाके में घटित हुई। अपने सामने कथित 'मृत' युवक को जिंदा खड़ा देख परिजनों के साथ-साथ मौके पर मौजूद ग्रामीणों और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के होश उड़ गए। गलत पहचान (Misidentification) के कारण हुई इस घटना ने प्रशासनिक चौकसी और शिनाख्त प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब उस अज्ञात शव की नए सिरे से शिनाख्त करने और मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में जुट गई है।
औरैया जिले में घटी यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस को कुछ दिनों पूर्व एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। शिनाख्त की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय परिजनों ने हुलिए और अन्य पहचान चिह्नों के आधार पर शव को अपने लापता परिजन का बताया। पुलिस ने आवश्यक विधिक औपचारिकताएं और पोस्टमार्टम पूरा कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शव का अंतिम संस्कार कर दिया। नियम व परंपरा के मुताबिक अंतिम संस्कार के बाद घर में धार्मिक अनुष्ठान और 'शुद्धि' (शुद्धिकरण) का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान वह लापता युवक, जिसे मृत समझा जा रहा था, अचानक खुद पैदल चलकर घर पहुंच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक कुछ दिनों से बिना बताए घर से कहीं चला गया था या लापता था। परिजनों द्वारा उसकी खोजबीन की जा रही थी। इसी बीच पुलिस को एक लावारिस शव मिलने की सूचना मिली। परिजनों को जब पुलिस ने शिनाख्त के लिए बुलाया, तो उन्होंने हड़बड़ाहट और दुख के माहौल में शव की पहचान अपने लापता परिजन के रूप में कर ली।
शव मिलने के बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया और शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ दाह-संस्कार संपन्न किया। अंतिम संस्कार के अगले दिनों में घर में शोक का माहौल था और 'शुद्धि' व बाल मुंडन आदि का कार्य चल रहा था। नाते-रिश्तेदार और ग्रामीण सांत्वना देने के लिए घर पर एकत्रित थे।
अचानक दोपहर के समय वही लापता युवक सही-सलामत अपने घर के दरवाजे पर आ खड़ा हुआ। उसे सामने देख परिजनों में चीख-पुकार मच गई। पहले तो लोगों को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ और सन्नाटा पसर गया, लेकिन जब युवक ने बातचीत की तो परिजनों के आंसू छलक पड़े। खुशी और हैरानी के इस माहौल की खबर तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई।
युवक के परिजनों का कहना है कि शव की स्थिति काफी खराब थी और चेहरे में कुछ बदलाव के कारण वे भ्रम का शिकार हो गए थे। परिजनों ने ईश्वर का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बेटा जिंदा लौट आया है, जिससे उनके परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ टल गया।
दूसरी ओर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और युवक से पूछताछ की। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला पहचान में हुई चूक का है। पुलिस प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई थी।
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े किए हैं:
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पहचान प्रक्रिया पर सवाल: लावारिस या अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए केवल परिजनों के मौखिक दावे के बजाय वैज्ञानिक तरीकों (जैसे डीएनए टेस्ट या बायोमेट्रिक मिलान) की आवश्यकता रेखांकित हुई है।
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असली मृतक का रहस्य: सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया, वह कौन था और उसकी मौत स्वाभाविक थी या उसके साथ कोई अपराध हुआ था।
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कानूनी पेचीदगियां: पुलिस के सरकारी कागजों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिसे मृत दर्ज किया गया था, उसे अब रिकॉर्ड में जीवित दर्ज करने और अज्ञात शव की दोबारा जांच शुरू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया अपनानी होगी।
पुलिस ने युवक के जीवित लौटने का पंचनामा और बयान दर्ज कर लिया है। अब पुलिस के सामने दोहरी चुनौती है—पहला, जीवित लौटे युवक का आधिकारिक बयान दर्ज करना कि वह इतने दिनों तक कहां और किस परिस्थिति में था। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण कार्य, उस अज्ञात शव की सही पहचान स्थापित करना जिसका दाह-संस्कार किया गया है। पुलिस आसपास के जिलों के लापता व्यक्तियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि अज्ञात शव के असली परिजनों तक पहुंचा जा सके और मामले में यदि कोई आपराधिक पहलू है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जा सके।
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