वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल पहले हमास की तरह ड्रोन और रॉकेट से हमले की थी साजिश, NIA की जांचे में हुआ बड़ा खुलासा। 

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। यह एक कार बम धमाका था, जिसमें एक आत्मघाती

Nov 18, 2025 - 15:16
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वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल पहले हमास की तरह ड्रोन और रॉकेट से हमले की थी साजिश, NIA की जांचे में हुआ बड़ा खुलासा। 
वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल पहले हमास की तरह ड्रोन और रॉकेट से हमले की थी साजिश, NIA की जांचे में हुआ बड़ा खुलासा। 

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। यह एक कार बम धमाका था, जिसमें एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इस घटना में 15 लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल हुए। शुरुआत में इसे एक साधारण दुर्घटना समझा गया, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गहन जांच ने एक भयानक साजिश का पर्दाफाश किया है। जांच में पता चला कि यह हमला एक 'व्हाइट कॉलर' आतंकवादी मॉड्यूल का हिस्सा था, जो शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम लोगों से बना था। यह गिरोह हमास के 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर किए गए हमले की नकल करने की योजना बना रहा था। वे ड्रोन और रॉकेट से हमला करना चाहते थे, ताकि शहर में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकें। एनआईए ने दो प्रमुख संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, और जांच अभी जारी है।

यह घटना दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में हुई, जहां लाल किला पर्यटकों और स्थानीय लोगों से हमेशा गुलजार रहता है। सुबह के समय एक सफेद रंग की ह्युंडई आई20 कार लाल किले के मुख्य द्वार के पास रुकी। अचानक जोरदार धमाका हुआ, जो आसपास की दुकानों और सड़कों को हिला गया। धमाके से कार के परखच्चे उड़ गए, और आग की लपटें चारों तरफ फैल गईं। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 13 लोग मारे गए थे, लेकिन बाद में अस्पतालों में दो और घायलों की मौत हो गई, जिससे संख्या 15 हो गई। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके को घेर लिया। फॉरेंसिक टीमों ने साइट से सबूत इकट्ठा किए, जिनमें धातु के टुकड़े, विस्फोटक के अवशेष और एक शव शामिल था।

एनआईए को केस सौंपा गया क्योंकि यह आतंकवाद से जुड़ा लग रहा था। जांच एजेंसी ने पाया कि कार बम में लगभग 20 किलोग्राम विस्फोटक भरा गया था, जो आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का रूप था। धमाके के केंद्र में मिले अवशेषों से पुष्टि हुई कि यह आत्मघाती हमला था। डीएनए टेस्ट से पता चला कि हमलावर डॉक्टर उमर उन नबी था, जो जम्मू-कश्मीर का निवासी था। उमर एक मेडिकल प्रैक्टिशनर था और जयश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़ा हुआ था। एनआईए के अनुसार, उमर ने तुर्की में रेडिकल विचारों को अपनाया था, जहां वह पढ़ाई के लिए गया था। एक वीडियो भी बरामद हुआ है, जिसमें उमर आत्मघाती हमलों को 'शहादत का ऑपरेशन' बताते हुए दिखता है। यह वीडियो जांच में बड़ा सबूत साबित हुआ।

जांच आगे बढ़ी तो एनआईए को एक बड़े नेटवर्क का पता चला। यह मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर' था, यानी इसमें पढ़े-लिखे पेशेवर लोग शामिल थे, जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ। वे सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए संपर्क में थे। एनआईए ने खुलासा किया कि इस गिरोह ने मूल रूप से ड्रोन और रॉकेट से हमला करने की योजना बनाई थी। वे दिल्ली और अन्य शहरों में भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाना चाहते थे। ड्रोन को हथियारबंद करने के लिए बड़े बैटरी और कैमरे लगाए जा रहे थे, ताकि वे भारी बम ले जा सकें। छोटे रॉकेट भी तैयार किए जा रहे थे, जो सीरियल ब्लास्ट के लिए इस्तेमाल होते। लेकिन किसी कारण से यह योजना टल गई, और उन्होंने कार बम का सहारा लिया।

यह योजना हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले से प्रेरित थी। उस दिन हमास ने इजरायल पर रॉकेट बरसाए और ड्रोन से हमले किए, जिसमें हजारों लोग मारे गए। एनआईए के सूत्रों के मुताबिक, आतंकवादी इस हमले की वीडियो और रिपोर्ट्स देखकर ट्रेनिंग ले रहे थे। वे ड्रोन को बम गिराने वाले हथियार में बदलना चाहते थे, जैसा हमास ने किया। भारत में ड्रोन तकनीक का दुरुपयोग पहले भी देखा गया है, लेकिन इस पैमाने पर पहली बार। एनआईए ने कहा कि गिरोह ने जम्मू-कश्मीर से सामग्री मंगवाई थी और दिल्ली में टेस्टिंग की कोशिश की।

पिछले दो दिनों में एनआईए ने दो महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां कीं। पहली गिरफ्तारी अमीर राशिद अली की हुई, जो पुलवामा जिले का निवासी है। अमीर ने कार खरीदने और उमर के लिए दिल्ली में ठिकाना जुटाने में मदद की। कार उसके नाम पर रजिस्टर्ड थी, जो ह्युंडई आई20 मॉडल की थी। एनआईए ने अमीर को 10 दिनों की कस्टडी में लिया है। दूसरी गिरफ्तारी जसिर बिलाल वानी उर्फ डेनिश की हुई, जो अनंतनाग जिले के काजीगुंड का रहने वाला है। डेनिश एक ड्रोन विशेषज्ञ था, जिसने ड्रोन को मॉडिफाई करने का काम किया। एनआईए के बयान में कहा गया कि डेनिश ने तकनीकी सहायता दी, जिसमें ड्रोन में विस्फोटक फिट करना और रॉकेट बनाना शामिल था। श्रीनगर में छापेमारी के दौरान उसे पकड़ा गया। इनके अलावा, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आठ अन्य लोगों को हिरासत में लिया है।

एनआईए की टीम अब कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में छापे मार रही है। जांच में पता चला कि मॉड्यूल में दो कश्मीरी डॉक्टर शामिल थे- उमर उन नबी और डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई। दोनों तुर्की में रेडिकल हुए थे। एक अन्य आरोपी डॉ. उमर अल-फलाह भी जांच के दायरे में है। एनआईए को 9 एमएम की कारतूसें और विस्फोटक बनाने के सामान भी मिले हैं। गिरोह ने फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के आसपास भी गतिविधियां की थीं। जांच एजेंसी अब सभी पहलुओं पर नजर रख रही है, जिसमें विदेशी फंडिंग और ऑनलाइन प्रोपेगैंडा शामिल हैं।

यह साजिश दिल्ली जैसे हाई-सिक्योरिटी शहर के लिए खतरे की घंटी है। लाल किला एक संवेदनशील साइट है, जहां सुरक्षा कड़ी रहती है। धमाके के बाद दिल्ली पुलिस ने अलर्ट बढ़ा दिया। एनआईए के महानिदेशक ने कहा कि यह मॉड्यूल ISIS और हमास की रणनीतियों से प्रभावित था। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन हमलों से निपटने के लिए नई तकनीक की जरूरत है। भारत सरकार ने ड्रोन रेगुलेशन सख्त किए हैं, लेकिन आतंकवादी इन्हें चकमा देने के तरीके ढूंढ लेते हैं।

घटना के बाद पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया और सुरक्षा मजबूत करने का वादा किया। एनआईए की जांच से साफ है कि आतंकवाद अब पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़ गया है। ड्रोन और साइबर टूल्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है, क्योंकि हमास कनेक्शन से मिडिल ईस्ट की घटनाओं का लिंक जुड़ गया।

एनआईए की टीम अब और सबूत जुटा रही है। वे उमर के लैपटॉप और फोन से डेटा निकाल रहे हैं। एक वीडियो में उमर हमलों को जायज ठहराता दिखता है, जो उसके कट्टरपंथ को दर्शाता है। गिरोह के सदस्यों ने सोशल मीडिया पर प्रोपेगैंडा फैलाया था। जांच में पाया गया कि वे युवाओं को भर्ती कर रहे थे।

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