Sonam Wangchuk Ends Hunger Strike: 26 दिनों बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार के आश्वासन पर तोड़ा व्रत

सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार से प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद यह कदम उठाया गया।

Jul 24, 2026 - 14:57
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Sonam Wangchuk Ends Hunger Strike: 26 दिनों बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार के आश्वासन पर तोड़ा व्रत
Sonam Wangchuk Medanta Hospital
  • सोनम वांगचुक ने 26वें दिन तोड़ा अनिश्चितकालीन अनशन, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सरकार के आश्वासन के बाद लिया फैसला
  • 26 दिनों के अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा व्रत, मेदांता अस्पताल में सरकार की ओर से मिला ठोस आश्वासन
  • Sonam Wangchuk News: प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त किया

प्रसिद्ध पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने लद्दाख की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को लेकर जारी अपना 26 दिनों का अनिश्चितकालीन अनशन अंततः समाप्त कर दिया है। गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने केंद्र सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और मांगों पर ठोस कार्रवाई के वादे के बाद यह निर्णय लिया। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत अधिकार देने और पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम मुद्दों को लेकर वे पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे। अनशन समाप्त होने के बाद अब सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच आगे की औपचारिक वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

लद्दाख के भविष्य, उसकी सांस्कृतिक पहचान और संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए लंबे समय से आवाज उठा रहे सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों से जारी अनशन खत्म कर दिया है। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। सरकार के उच्च प्रतिनिधियों द्वारा उनकी मुख्य मांगों पर विचार करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने जूस पीकर अपना व्रत खोला। इस फैसले से लद्दाख में चल रहे जनांदोलन के समर्थकों को बड़ी राहत मिली है।

लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही स्थानीय निवासी अपने अधिकारों और स्वायत्तता को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसी क्रम में सोनम वांगचुक ने लद्दाख की मुख्य मांगों जैसे छठी अनुसूची का दर्जा, राज्य का दर्जा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन की शुरुआत की थी।

अनशन के लगातार लंबे खिंचने से वांगचुक के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने लगा था। उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। अनशन के 26वें दिन सरकार के शीर्ष स्तर से उनसे संपर्क किया गया और उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करने तथा बातचीत का दौर जारी रखने का आश्वासन दिया गया। सरकार की ओर से मिली इस सकारात्मक पहल के बाद वांगचुक और उनके सहयोगियों ने अनशन स्थगित करने का निर्णय लिया।

अनशन समाप्ति के बाद विभिन्न पक्षों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आईं:

सोनम वांगचुक और उनके प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह अनशन केवल अस्थायी रूप से समाप्त किया गया है, क्योंकि सरकार ने लद्दाख की मांगों को सुनने और उन पर आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया है। उनका कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य लद्दाख के संवेदनशील पर्यावरण को बचाना और स्थानीय लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित करना है।

दूसरी ओर, प्रशासनिक और सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार लद्दाख के विकास और वहां के पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का हमेशा से मानना रहा है कि सभी मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण बातचीत और संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है। गृह मंत्रालय की ओर से लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों के दौर को जारी रखने की बात भी कही गई है।

सोनम वांगचुक के इस 26 दिवसीय अनशन ने न केवल लद्दाख बल्कि पूरे देश का ध्यान हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता की ओर आकर्षित किया है। देशभर में पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। अनशन के समाप्त होने से केंद्र सरकार और लद्दाख के स्थानीय निकायों के बीच बने तनावपूर्ण माहौल में कमी आई है। इससे दोनों पक्षों के बीच अब तक रुके हुए संवाद के दोबारा शुरू होने के रास्ते खुल गए हैं।

अनशन समाप्त होने के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं पर टिकी हैं। सोनम वांगचुक के अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद आधिकारिक बैठकों की रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद है। यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता में लद्दाख की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक और दूरगामी फैसले लिए जाते हैं, तो यह क्षेत्र के स्थायी विकास और शांति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।

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