प्रवर्तन निदेशालय ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले में की बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में 2.2 करोड़ रुपये नकद जब्त। 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे भूमि मुआवजा घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। 6 फरवरी 2026 को

Feb 10, 2026 - 11:53
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प्रवर्तन निदेशालय ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले में की बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में 2.2 करोड़ रुपये नकद जब्त। 
प्रवर्तन निदेशालय ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले में की बड़ी कार्रवाई, छापेमारी में 2.2 करोड़ रुपये नकद जब्त। 
  • ट्रांस-अरुणाचल हाईवे घोटाला: ED की छापेमारी में फर्जी लाभार्थी के ठिकाने से करोड़ों का कैश बरामद, 44 करोड़ का सरकारी नुकसान
  • ED की मेजर रेड ट्रांस-अरुणाचल हाईवे मुआवजा घोटाले में, 6 फरवरी को 6 ठिकानों पर छापे, 2.2 करोड़ कैश जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे भूमि मुआवजा घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में बड़ी कार्रवाई की है। 6 फरवरी 2026 को ED ने अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान फर्जी लाभार्थी के एक ठिकाने से 2.2 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई।

घोटाला ट्रांस-अरुणाचल हाईवे के पोटिन-बोपी खंड से जुड़ा है। यह खंड 157.70 किलोमीटर लंबा है। इसे प्रशासनिक रूप से याचुली (0.00-43.635 किमी), जीरो (43.635-63.700 किमी) और रागा (63.700-149.440 किमी) सेक्टरों में विभाजित किया गया है। भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। इनमें मूल्यांकन, प्रमाणीकरण और वितरण की प्रक्रिया में गड़बड़ियां शामिल हैं। जांच में पता चला कि जीरो के तत्कालीन उपायुक्त ने पूरे पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपये का मुआवजा अनुमान तैयार किया था। हालांकि राज्य स्तर की बैठक में मुआवजा पैकेज को फ्रीज कर दिया गया और कुल 198.56 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया गया। इसके बावजूद वितरण प्रक्रिया के दौरान बड़ी राशि बचत खातों में डायवर्ट की गई। कई चेक फर्जी लाभार्थियों को जारी किए गए।

  • सरकारी खजाने को नुकसान

इन अनियमितताओं से सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। फर्जी लाभार्थियों को मुआवजा दिया गया जिनके पास सड़क के अधिकार क्षेत्र में कोई संरचना नहीं थी। गैर-मौजूद संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों को शामिल किया गया। सार्वजनिक सेवकों और निजी लाभार्थियों के बीच मिलीभगत से अपराध की आय उत्पन्न हुई और उसे धोया गया। छापेमारी अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर की गई। इनमें ईटानगर और उसके आसपास के इलाके, लिखाबाली (लोअर सियांग जिला) और आलो (वेस्ट सियांग जिला) शामिल हैं। ठिकानों में तत्कालीन उपायुक्त, जिला भूमि राजस्व एवं बंदोबस्त अधिकारी (DLRSO), मूल्यांकन अधिकारी, निजी लाभार्थी और बिचौलियों के आवास शामिल थे। उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल सबूत हासिल करना था। साथ ही अपराध की आय से अर्जित चल और अचल संपत्तियों की पहचान करना था। एक फर्जी लाभार्थी के ठिकाने से 2.2 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।

यह जांच धन शोधन के मामलों पर केंद्रित है। ED ने दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए। आगे की जांच जारी है। घोटाला भूमि अधिग्रहण मुआवजे में फर्जी लाभार्थियों को शामिल करने, गलत मूल्यांकन और अधिकारियों-निजी लोगों की सांठगांठ से जुड़ा है। इससे अपराध की आय उत्पन्न हुई जो धोई गई। कुछ रिपोर्टों में कुल जब्त राशि 2.62 करोड़ रुपये बताई गई। इसमें से 2.40 करोड़ रुपये एक निजी लाभार्थी लिखा माज के आवास से और 22 लाख रुपये तदार बाबिन के आवास से बरामद हुए। तदार बाबिन और भारत लिंगू (पूर्व DLRSO, जीरो) के बैंक खातों में जमा करीब 1.77 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए। ED ने पहले ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है। जांच जारी है और आगे के ठिकानों पर कार्रवाई संभव है। ट्रांस-अरुणाचल हाईवे परियोजना राज्य के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन मुआवजा प्रक्रिया में अनियमितताओं ने इसे प्रभावित किया।

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