Swiggy Share News: बीएनपी पारिबा और गोल्डमैन सैक्स ने स्विगी में खरीदे ₹1,041 करोड़ के शेयर, जानिए बाजार पर असर
Swiggy Share News: ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी में बीएनपी पारिबा और गोल्डमैन सैक्स ने ओपन मार्केट से 1,041 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदे हैं।

- Swiggy Shares Action: वैश्विक दिग्गजों की बड़ी एंट्री, स्विगी में ब्लॉक डील के बाद शेयरों में दिख सकता है बड़ा एक्शन
- स्विगी पर विदेशी संस्थागत निवेशकों का बड़ा दांव! BNP पारिबा और गोल्डमैन सैक्स ने खरीदे ₹1041 करोड़ के शेयर, शेयर बाजार में हलचल की संभावना
- Swiggy Block Deal Update: बीएनपी पारिबा और गोल्डमैन सैक्स ने खुले बाजार से खरीदे स्विगी के 3.76 करोड़ शेयर
ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी (Swiggy) के शेयरों में 6 सितंबर को निवेशकों की ओर से भारी हलचल और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक संस्थागत निवेशकों द्वारा ब्लॉक डील के जरिए कंपनी में की गई 1,041 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी खरीदारी है। शुक्रवार, 4 सितंबर को दिग्गज विदेशी वित्तीय संस्थानों 'बीएनपी पारिबा' और 'गोल्डमैन सैक्स' ने ओपन मार्केट ट्रांजेक्शन के माध्यम से स्विगी के करोड़ों शेयर खरीदे। यह बड़ा सौदा 276.10 रुपये प्रति शेयर के तय भाव पर संपन्न हुआ है। इस विशाल संस्थागत निवेश के बाद अब आगामी कारोबारी सत्रों में बाजार विश्लेषकों की नजर स्विगी के शेयर की चाल पर टिकी हुई है।
भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी में दिग्गज विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बड़ा भरोसा जताया है। शुक्रवार, 4 सितंबर को खुले बाजार में हुए थोक सौदों (Block Deals) के दौरान फ्रांस के प्रमुख वित्तीय संस्थान बीएनपी पारिबा (BNP Paribas) और अमेरिका की वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई ने मिलकर स्विगी के करीब 3.76 करोड़ शेयर खरीदे हैं। इस पूरे सौदे का कुल मूल्य 1,041 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है। इतनी बड़ी मात्रा में संस्थागत पूंजी प्रवाह के कारण 6 सितंबर को शेयर बाजार खुलते ही स्विगी के शेयरों में तीव्र हलचल और ट्रेडिंग वॉल्यूम में उछाल आने के संकेत हैं।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, यह पूरी खरीद-फरोख्त ओपन मार्केट ट्रांजेक्शन के जरिए अंजाम दी गई, जिसमें शेयरों की औसत खरीद कीमत 276.10 रुपये प्रति शेयर तय की गई थी। सौदे के ब्यौरे पर नजर डालें तो 'बीएनपी पारिबा फाइनेंशियल मार्केट्स' (BNP Paribas Financial Markets) ने 491.99 करोड़ रुपये का भारी निवेश करते हुए स्विगी के 1.78 करोड़ शेयर अपने पोर्टफोलियो में शामिल किए।
वहीं दूसरी ओर, 'गोल्डमैन सैक्स इनवेस्टमेंट्स मॉरीशस I' (Goldman Sachs Investments Mauritius I) ने इससे भी बड़ा दांव खेलते हुए 549.01 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश किया। इस राशि के बदले गोल्डमैन सैक्स ने स्विगी के 1.98 करोड़ शेयर हासिल किए। दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया यह 1,041 करोड़ रुपये का सौदा यह दर्शाता है कि दीर्घकालिक नजरिए से वैश्विक निवेशक भारत के क्विक-कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेक्टर को लेकर बेहद आशान्वित हैं।
बाजार विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि वैश्विक संस्थागत निवेशकों की यह एंट्री कंपनी के बिजनेस मॉडल और भविष्य की विकास संभावनाओं पर मुहर लगाती है। विदेशी फंड्स द्वारा 276.10 रुपये के स्तर पर इतनी बड़ी मात्रा में इक्विटी उठाना यह संकेत देता है कि वर्तमान वैल्यूएशन पर यह शेयर इन दिग्गजों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
दूसरी तरफ, खुदरा और घरेलू निवेशकों में भी इस बड़ी ब्लॉक डील को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर के बड़े एसेट मैनेजर्स किसी कंपनी में इतनी बड़ी हिस्सेदारी लेते हैं, तो उससे संबंधित शेयर में तरलता (Liquidity) बढ़ती है और मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।
इस बड़े ट्रांजेक्शन का सीधा प्रभाव स्विगी के शेयर के ट्रेडिंग वॉल्यूम और प्राइस एक्शन पर दिखाई देगा। ओपन मार्केट में भारी खरीदारी के बाद शेयर बाजार के तकनीकी संकेतकों में मजबूती देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, इस खरीदारी से भारत के क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा कर रही अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियों जैसे जोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट के सेंटीमेंट्स पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा 1,041 करोड़ रुपये का नया निवेश भारतीय प्राइमरी और सेकेंडरी इक्विटी मार्केट में विदेशी पूंजी के निरंतर प्रवाह को भी प्रदर्शित करता है। इससे व्यापक बाजार सूचकांकों को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों और ट्रेडर्स को 6 सितंबर को बाजार खुलने पर स्विगी के शेयर के ओपनिंग प्राइस, रेजिस्टेंस और सपोर्ट लेवल पर विशेष नजर रखनी होगी। इतनी बड़ी ब्लॉक डील के बाद शुरुआती सत्रों में मुनाफावसूली या ऊपरी स्तरों पर कंसोलिडेशन की स्थिति भी बन सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीएनपी पारिबा और गोल्डमैन सैक्स जैसी संस्थाएं अपनी हिस्सेदारी को और बढ़ाती हैं या अन्य घरेलू म्यूचुअल फंड्स भी इस राह पर चलते हैं। कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों और परिचालन लाभ (Operational Profitability) के आंकड़ों का भी शेयर की भावी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।
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