सीने में दर्द गैस है या हार्ट अटैक: तीन सरल तरीकों से पहचानें अंतर और जान बचाएं।

सीने में अचानक उठने वाला दर्द अक्सर लोगों को परेशान कर देता है। ज्यादातर लोग इसे गैस की समस्या समझकर घरेलू उपचार करते हैं या अनदेखा कर देते हैं। लेकिन यह दर्द

Oct 16, 2025 - 10:37
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सीने में दर्द गैस है या हार्ट अटैक: तीन सरल तरीकों से पहचानें अंतर और जान बचाएं।
सीने में दर्द गैस है या हार्ट अटैक: तीन सरल तरीकों से पहचानें अंतर और जान बचाएं।

सीने में अचानक उठने वाला दर्द अक्सर लोगों को परेशान कर देता है। ज्यादातर लोग इसे गैस की समस्या समझकर घरेलू उपचार करते हैं या अनदेखा कर देते हैं। लेकिन यह दर्द हृदयाघात का संकेत भी हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय रोग दुनिया में मौत का प्रमुख कारण है, और भारत में हर साल लाखों लोग इससे प्रभावित होते हैं। मेयो क्लिनिक और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जैसे विश्वसनीय स्रोत बताते हैं कि गैस और हार्ट अटैक के दर्द में सूक्ष्म अंतर होते हैं। समय पर पहचान से जीवन बचाया जा सकता है। इस लेख में हम तीन मुख्य तरीकों से बताएहदीप्ते हैं कि कैसे इन दोनों में फर्क किया जाए। याद रखें, कोई भी संदेह हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सबसे पहले दर्द की प्रकृति और स्थान पर ध्यान दें। गैस का दर्द आमतौर पर पेट की एसिडिटी या अपच से जुड़ा होता है। यह दर्द सीने के बीच में या ऊपरी पेट में महसूस होता है, जो जलन जैसा या फूलने वाला लगता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिपोर्ट कहती है कि गैस का दर्द खाने के बाद बढ़ता है, खासकर मसालेदार या तला हुआ भोजन करने पर। यह दर्द कभी-कभी पीठ या कंधों तक फैल सकता है, लेकिन यह स्थिर नहीं रहता। आप झुकने, लेटने या खांसने पर बदलता है। अगर दर्द कुछ मिनटों में कम हो जाता है या डकार आने से राहत मिलती है, तो यह गैस की संभावना ज्यादा है। इसके विपरीत, हार्ट अटैक का दर्द सीने के केंद्र में दबाव या भपन जैसा महसूस होता है, मानो कोई भारी वजन रखा हो। क्लेवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह दर्द बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलता है। यह अचानक शुरू होता है और 5 मिनट से ज्यादा रहता है। आराम करने पर भी कम नहीं होता। महिलाओं में यह दर्द हल्का या असामान्य हो सकता है, जैसे मतली या सांस फूलना।

दूसरा तरीका है साथ आने वाले लक्षण symptoms पर नजर रखना। गैस के दर्द में पेट फूलना, डकार आना, उल्टी या दस्त जैसे पाचन संबंधी लक्षण दिखते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, गैस का कारण अनियमित भोजन, ज्यादा चाय-कॉफी या स्मोकिंग हो सकता है। अगर दर्द खाने के तुरंत बाद आता है और एंटासिड गोली खाने से कम होता है, तो यह गैस है। लेकिन हार्ट अटैक में सांस लेने में तकलीफ, पसीना आना, चक्कर आना या कमजोरी जैसे संकेत मिलते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन बताता है कि हार्ट अटैक के दौरान त्वचा ठंडी पड़ जाती है और दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। अगर दर्द व्यायाम या तनाव के दौरान बढ़ता है, तो यह हृदय संबंधी समस्या का इशारा है। भारत में इंडियन हार्ट एसोसिएशन की स्टडी कहती है कि 50 प्रतिशत हार्ट अटैक के मरीज पहले गैस समझकर देरी करते हैं, जिससे खतरा बढ़ जाता है।

तीसरा तरीका है दर्द की अवधि और प्रतिक्रिया का परीक्षण। गैस का दर्द आमतौर पर 30 मिनट से 2 घंटे तक रहता है और स्थिति बदलने से राहत मिलती है। अगर आप चलते हैं या पानी पीते हैं तो कम हो सकता है। लेकिन हार्ट अटैक का दर्द 20 मिनट से ज्यादा रहता है और बढ़ता जाता है। मेयो क्लिनिक सलाह देती है कि अगर दर्द के साथ उल्टी, बेहोशी या तेज पसीना हो, तो इमरजेंसी कॉल करें। एस्पिरिन की गोली चबाने से हार्ट अटैक में थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन गैस में नहीं। घर पर टेस्ट के लिए गहरी सांस लें: अगर दर्द बढ़ता है तो हार्ट की समस्या हो सकती है। लेकिन यह पक्का तरीका नहीं, डॉक्टर की ईसीजी या ट्रोपोनिन टेस्ट जरूरी है।

भारत में हृदय रोग बढ़ रहे हैं। लैंसेट जर्नल की 2024 रिपोर्ट कहती है कि 30-50 आयु वर्ग में हार्ट अटैक के मामले 20 प्रतिशत बढ़े हैं। कारण हैं मोटापा, डायबिटीज, स्मोकिंग और तनाव। गैस की समस्या भी आम है, खासकर फास्ट फूड कल्चर से। डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सीने के दर्द को कभी हल्के में न लें। अगर परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, तो ज्यादा सतर्क रहें। महिलाओं में लक्षण अलग होते हैं, जैसे थकान या जी मिचलाना। पुरुषों में दर्द तेज होता है।

रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। रोज व्यायाम करें, संतुलित भोजन लें। फल, सब्जियां और फाइबर ज्यादा खाएं गैस से बचने के लिए। धूम्रपान छोड़ें, वजन नियंत्रित रखें। नियमित चेकअप कराएं। अगर दर्द हो तो 108 एंबुलेंस कॉल करें। अस्पताल में ईसीजी, ब्लड टेस्ट और एंजियोग्राफी से पक्का पता चलता है। गैस के लिए एंटासिड या योगासन जैसे भुजंगासन मदद करते हैं। लेकिन सेल्फ मेडिकेशन न करें।

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