Badrinath Dham: सांस्कृतिक उत्सव में तेज संगीत और नाच-गाने पर भारी बवाल, चमोली प्रशासन ने गढ़वाल स्काउट्स को थमाया नोटिस
बद्रीनाथ धाम में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान तेज आवाज में संगीत और नाच-गाने को लेकर विरोध तेज हो गया है। चमोली जिला प्रशासन ने गढ़वाल स्काउट्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल भू-वैकुंठ बद्रीनाथ धाम में सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान तेज आवाज में संगीत बजाने और नाच-गाने के आयोजन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। धाम परिसर और आसपास के संवेदनशील आध्यात्मिक क्षेत्र में तेज ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकरों) के प्रयोग, अत्यधिक शोर-शराबे और फिल्मी या पॉप शैली के गानों पर नृत्य को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों, पंडा समाज, साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मामले के तूल पकड़ते ही चमोली जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए भारतीय सेना की स्थानीय बटालियन 'गढ़वाल स्काउट्स' को आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में सेना की टुकड़ी से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि अत्यधिक पवित्र और शांत धार्मिक स्थल की मर्यादा के विपरीत जाकर इस प्रकार का तेज संगीत और शोर-शराबे वाला कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति किस आधार पर दी गई या ली गई। अधिकारियों ने दो टूक निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर स्थिति स्पष्ट की जाए कि नियमों और परंपराओं की अनदेखी क्यों हुई।
तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय नागरिकों का कड़ा ऐतराज
बद्रीनाथ धाम को सनातन परंपरा में मोक्ष धाम और परम शांति का केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से भगवान बद्री विशाल के शांत और भक्तिमय वातावरण में दर्शन करने पहुंचते हैं। हाल ही में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान जब आधुनिक डीजे साउंड जैसे तेज संगीत और नाच-गाने की गूंज पूरे मंदिर परिक्षेत्र में सुनाई दी, तो स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए।
बद्रीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय व्यापार मंडल का कहना है कि हिमालय के इस उच्च धार्मिक स्थल पर कभी भी फूहड़ या अत्यधिक लाउड मनोरंजन की परंपरा नहीं रही है। यहां केवल पारंपरिक शंख ध्वनि, घंटियों की नाद, वेद मंत्रोच्चार और सात्विक भजनों की ही अनुमति है। संतों और पुरोहितों का आरोप है कि इस प्रकार के आयोजनों से धाम की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को गहरी ठेस पहुंची है। विरोध के स्वर बढ़ते ही स्थानीय संगठनों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और चमोली के जिलाधिकारी से मिलकर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।
चमोली जिला प्रशासन की कार्रवाई और नोटिस का आधार
स्थानीय लोगों के भारी विरोध और सोशल मीडिया पर कार्यक्रम से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद चमोली जिला प्रशासन हरकत में आया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण और धार्मिक मर्यादा से जुड़े नियम बेहद सख्त हैं। किसी भी संस्था, विभाग या सुरक्षा बल को मंदिर परिक्षेत्र के समीप शांति भंग करने या मर्यादा के विपरीत गतिविधियों की छूट नहीं दी जा सकती।
जारी किए गए नोटिस में गढ़वाल स्काउट्स के संबंधित अधिकारियों से पूछा गया है कि कार्यक्रम के स्वरूप, ध्वनि के स्तर और स्थल चयन को लेकर पूर्व प्रशासनिक अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि अनुमति थी, तो निर्धारित शर्तों का उल्लंघन क्यों किया गया। प्रशासन ने यह भी रेखांकित किया है कि संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण और वन्यजीवों की दृष्टि से भी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उच्च डेसिबल का शोर पूरी तरह वर्जित है।
सेना की भूमिका और परंपराओं का सम्मान
भारतीय सेना, विशेषकर गढ़वाल राइफल्स और गढ़वाल स्काउट्स का बद्रीनाथ धाम और सीमांत उत्तराखंड से अत्यंत गहरा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। सेना के जवान सीमा की रक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं और यात्रा व्यवस्था में हमेशा श्रद्धालुओं की सहायता में आगे रहते हैं। भगवान बद्री विशाल को गढ़वाल रेजीमेंट का आराध्य देव भी माना जाता है।
यही कारण है कि जब गढ़वाल स्काउट्स से जुड़े कार्यक्रम में इस तरह की चूक सामने आई, तो लोगों को अधिक आघात पहुंचा। जानकारों का मानना है कि सेना के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य आमतौर पर जवानों का मनोबल बढ़ाना और स्थानीय संस्कृति को प्रोत्साहन देना होता है, परंतु धाम के अति-संवेदनशील और आध्यात्मिक दायरे में स्थल और ध्वनि के स्तर का चयन करते समय आवश्यक संवेदनशीलता का अभाव रहा। प्रशासनिक नोटिस के बाद अब सैन्य अधिकारियों द्वारा आंतरिक स्तर पर भी मामले की समीक्षा की जा रही है।
चारधाम परिक्षेत्र में कड़े दिशा-निर्देश तय करने की तैयारी
इस विवाद के सामने आने के बाद बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) और जिला प्रशासन ने भविष्य के लिए दिशा-निर्देशों को और कड़ा करने का मन बनाया है। धाम क्षेत्र में किसी भी तरह के गैर-धार्मिक या तेज ध्वनि वाले आयोजनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि चाहे कोई भी संगठन या विभाग हो, बद्रीनाथ धाम की सदियों पुरानी वैदिक मर्यादा, शांति और गरिमा सर्वोपरि है और किसी को भी इससे खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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