राहुल गांधी को भारतीय सेना पर टिप्पणी के मामले में मिली जमानत, कोर्ट में सेल्फी के बाद उठे सवाल। 

Lucknow News: लखनऊ में 15 जुलाई 2025 को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एमपी-एमएलए विशेष मजिस्ट्रेट...

Jul 16, 2025 - 11:42
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राहुल गांधी को भारतीय सेना पर टिप्पणी के मामले में मिली जमानत, कोर्ट में सेल्फी के बाद उठे सवाल। 
राहुल गांधी को भारतीय सेना पर टिप्पणी के मामले में मिली जमानत, कोर्ट में सेल्फी के बाद उठे सवाल। 

Lucknow News: लखनऊ में 15 जुलाई 2025 को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एमपी-एमएलए विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। यह मामला 2022 में उनकी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ कथित तौर पर की गई मानहानिकारक टिप्पणी से जुड़ा है। राहुल गांधी के कोर्ट में पेश होने के कुछ ही मिनटों बाद उनके वकील ने जमानत याचिका दायर की, जिसे अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने राहुल गांधी को 20,000 रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ जमानत दे दी। इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर खासी चर्चा बटोरी है। 

यह मानहानि का मामला भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 16 दिसंबर 2022 को राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता उदय शंकर श्रीवास्तव, जो सीमा सड़क संगठन (BRO) के पूर्व निदेशक हैं, ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 9 दिसंबर 2022 को अरुणाचल प्रदेश में हुई झड़प के बारे में गलत और अपमानजनक टिप्पणी की। श्रीवास्तव के अनुसार, राहुल गांधी का बयान न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत था, बल्कि इसने भारतीय सेना का मनोबल गिराया और सैनिकों के परिवारों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

शिकायत के मुताबिक, राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कहा था कि भारतीय सैनिकों को चीनी सैनिकों ने "पीटा" था। दूसरी ओर, सेना की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 9 दिसंबर 2022 को तवांग सेक्टर में चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सैनिकों ने नाकाम कर दिया। इस झड़प में दोनों पक्षों के कुछ सैनिकों को मामूली चोटें आई थीं, और चीनी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। श्रीवास्तव ने राहुल गांधी के बयान को सेना के सम्मान के खिलाफ बताते हुए 11 फरवरी 2023 को लखनऊ की विशेष अदालत में मानहानि की शिकायत दर्ज की।

शिकायत दर्ज होने के बाद, विशेष अदालत ने 11 फरवरी 2023 को इस मामले में संज्ञान लिया और राहुल गांधी को बतौर आरोपी तलब किया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया, जिसमें अधिकतम दो साल की सजा, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। राहुल गांधी ने इस समन के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और शिकायतकर्ता का सेना से कोई सीधा संबंध नहीं है। उनके वकील प्रशु अग्रवाल ने तर्क दिया कि शिकायत आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 199 के तहत मान्य नहीं है, क्योंकि सेना, न कि शिकायतकर्ता, कथित मानहानि का लक्ष्य थी।

हालांकि, 29 मई 2025 को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत गारंटी है, लेकिन यह उचित प्रतिबंधों के अधीन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब किसी व्यक्ति या भारतीय सेना के खिलाफ मानहानिकारक बयान देने की छूट नहीं है। उच्च न्यायालय ने श्रीवास्तव को "पीड़ित व्यक्ति" माना और राहुल गांधी को मुकदमे का सामना करने का आदेश दिया।

इसके बाद, विशेष अदालत ने राहुल गांधी को कई बार समन जारी किए, लेकिन वह पांच सुनवाइयों में पेश नहीं हुए। 15 जुलाई 2025 को कोर्ट की सख्ती के बाद राहुल गांधी लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने दिल्ली से लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पहुंचने के बाद सीधे कोर्ट की ओर रुख किया। कोर्ट में उनके साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, संगठन प्रभारी अविनाश पांडे, और अन्य नेता मौजूद थे।

कोर्ट में पेश होने के तुरंत बाद राहुल गांधी के वकील प्रशु अग्रवाल ने जमानत याचिका दायर की। वकील ने तर्क दिया कि राहुल गांधी एक सांसद हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे फरार होने का जोखिम नहीं उठाएंगे। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता के वकील विकास तिवारी ने दावा किया कि राहुल गांधी का बयान सेना का मनोबल तोड़ने वाला था और यह राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

राहुल गांधी को 20,000 रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के साथ जमानत दी गई। कोर्ट ने शर्तें लगाईं कि राहुल गांधी को सुनवाई की हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से पेश होना होगा और जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत उपस्थिति देनी होगी। अगली सुनवाई की तारीख 13 अगस्त 2025 तय की गई है। जमानत की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए राहुल गांधी को जज के चैंबर में ले जाया गया, जहां बांड और जमानतदारों से जुड़े दस्तावेज जमा किए गए। पूरी प्रक्रिया में केवल पांच मिनट लगे, जिसके बाद राहुल गांधी को रिहा कर दिया गया।

राहुल गांधी की कोर्ट में पेशी के दौरान लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था, और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के समर्थन में "जिंदाबाद" के नारे लगाए। कुछ कांग्रेस नेताओं, जैसे राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और विधायक अराधना मिश्रा, के वाहनों को कोर्ट के गेट पर रोकने पर पुलिस के साथ उनकी बहस भी हुई। कांग्रेस ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि यह राहुल गांधी की आवाज को दबाने की कोशिश है।

वहीं, सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने राहुल गांधी के बयान को सेना के खिलाफ अपमानजनक बताया, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा माना। एक एक्स पोस्ट में कहा गया कि राहुल गांधी बार-बार विवादास्पद बयान देते हैं और बाद में माफी मांग लेते हैं, जो उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

राहुल गांधी के खिलाफ यह पहला मानहानि का मामला नहीं है। वह पहले भी कई मानहानि के मामलों का सामना कर चुके हैं। उदाहरण के लिए, 2023 में सूरत में "मोदी उपनाम" से जुड़े बयान के लिए उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी। इसके अलावा, पुणे में विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ टिप्पणी के लिए भी उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज है। सुल्तानपुर में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ 2018 में दिए गए बयान के लिए भी एक और मामला लंबित है। ये मामले राहुल गांधी के राजनीतिक बयानों और उनके कानूनी परिणामों को दर्शाते हैं।

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