प्रयागराज POCSO कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR दर्ज करने का दिया आदेश, नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप में शंकराचार्य की मुश्किलें बढ़ीं
सीडी साक्ष्य के रूप में पेश की गई जिसमें कथित तौर पर घटना से जुड़े सबूत हैं। अदालत ने इन बयानों और साक्ष्यों की जांच के बाद फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया है कि आरोप गंभीर हैं और भारतीय न्याय संहिता की धारा ६९, ७४, ७५, ७६, ७९, १०९ तथा POCSO एक्ट की धारा ३, ५, ९ और १७ के तहत संज्ञेय अपराध बनते
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में विशेष POCSO अदालत ने शनिवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोपों पर आधारित है। अदालत के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी पुलिस स्टेशन के प्रभारी को निर्देश दिया कि आरोपों के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और जांच शुरू की जाए।
आरोपों की शिकायत शाकंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने की है। उन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी जिसमें दावा किया गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने आश्रम में कम से कम दो नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया। पीड़ित बच्चों की उम्र 14 और 17 वर्ष बताई गई है। शोषण माघ मेला के दौरान उनके शिविर में 'गुरु सेवा' के बहाने किया गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दो नाबालिग बच्चों को पेश किया जिनके बयान कैमरे की मौजूदगी में दर्ज किए गए। बच्चों ने आरोपों की पुष्टि की। साथ ही एक सीडी साक्ष्य के रूप में पेश की गई जिसमें कथित तौर पर घटना से जुड़े सबूत हैं। अदालत ने इन बयानों और साक्ष्यों की जांच के बाद फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया है कि आरोप गंभीर हैं और पुलिस को इन धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया गया है। शिकायतकर्ता ने पहले पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत ने पुलिस की जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यह फर्जी मुकदमा है और आरोप लगाने वाले व्यक्ति की खुद आपराधिक पृष्ठभूमि है। उन्होंने दावा किया कि आरोपों का कोई आधार नहीं है और जांच में सच्चाई सामने आएगी। आदेश के बाद झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पुलिस अब जांच में शामिल होगी जिसमें पीड़ितों के बयान, साक्ष्यों की जांच और अन्य गवाहों से पूछताछ शामिल होगी। यह मामला धार्मिक गुरुओं से जुड़े विवादों में नया मोड़ लाया है। आरोप माघ मेला के दौरान शिविर में लगाए गए हैं जहां कई बच्चे 'बटुक' के रूप में सेवा करते हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि ऐसे 20 से अधिक बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।
अदालत ने पुलिस को विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके। मामला POCSO एक्ट के तहत संवेदनशील है जिसमें बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिरमठ के शंकराचार्य हैं और विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। यह घटना उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का नया चरण है। जांच की प्रक्रिया अब शुरू होगी और आगे के विकास पर नजर रहेगी। पुलिस को आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश है।
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