एनसीपी-शरद पवार गुट के विधायक जितेंद्र आव्हाड का सनातन धर्म पर विवादित बयान, छत्रपति शिवाजी और संभाजी पर टिप्पणी से हंगामा।
Political News: महाराष्ट्र के मुम्बरा-कालवा से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने 2 अगस्त 2025 को....
Political News: महाराष्ट्र के मुम्बरा-कालवा से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने 2 अगस्त 2025 को सनातन धर्म को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया, जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी। पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान आव्हाड ने कहा कि सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद कर दिया और ऐसा कोई धर्म कभी था ही नहीं, जिसे सनातन धर्म कहा जाए। उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को रोका और छत्रपति संभाजी महाराज को बदनाम किया। इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP), विश्व हिंदू परिषद (VHP), और शिवसेना (शिंदे गुट) ने तीखी प्रतिक्रिया दी, इसे सनातन धर्म और हिंदू भावनाओं पर हमला करार दिया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमाया, और कई लोगों ने आव्हाड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
2 अगस्त 2025 को पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में जितेंद्र आव्हाड ने सनातन धर्म को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म नाम की कोई चीज कभी थी ही नहीं। हम हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। यह तथाकथित सनातन धर्म ही था, जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को रोका। यही वह धर्म था, जिसने छत्रपति संभाजी महाराज को बदनाम किया। इसने भारत को बर्बाद कर दिया।” आव्हाड ने यह भी कहा कि सनातन धर्म की अवधारणा को कुछ लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, और यह समाज में बराबरी और प्रगति के खिलाफ है।
आव्हाड ने अपने बयान में यह दावा भी किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज को ब्राह्मणों ने उनके राज्याभिषेक के समय अपमानित किया, क्योंकि वे क्षत्रिय नहीं माने गए। उन्होंने संभाजी महाराज के बारे में कहा कि उन्हें भी सनातन धर्म के कुछ कट्टर अनुयायियों ने बदनाम किया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। आव्हाड ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि वह इतिहास के तथ्यों के आधार पर बोल रहे हैं और उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।
आव्हाड के बयान में छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का जिक्र महाराष्ट्र में विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि दोनों मराठा साम्राज्य के संस्थापक और महाराष्ट्र की शान माने जाते हैं। शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक 1674 में रायगढ़ में हुआ था, लेकिन इतिहासकारों के अनुसार, कुछ ब्राह्मणों ने उनकी क्षत्रिय जाति पर सवाल उठाए थे, जिसके कारण गागा भट्ट नामक विद्वान को उनके लिए विशेष वैदिक अनुष्ठान करना पड़ा था। संभाजी महाराज के बारे में भी कुछ इतिहासकारों ने लिखा है कि उनके शासनकाल में कुछ धार्मिक समूहों ने उनके खिलाफ अफवाहें फैलाई थीं।
हालांकि, आव्हाड का यह दावा कि सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद किया, इतिहासकारों और धार्मिक नेताओं के बीच विवाद का विषय बन गया है। सनातन धर्म को हिंदू धर्म का मूल आधार माना जाता है, जो वेदों, उपनिषदों, और अन्य प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। कई लोगों का मानना है कि आव्हाड का बयान सनातन धर्म को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है और धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।
आव्हाड के बयान पर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (BJP, शिवसेना-शिंदे, और एनसीपी-अजित पवार) ने तीखा विरोध जताया। BJP विधायक राम कदम ने कहा, “जितेंद्र आव्हाड बार-बार हिंदू धर्म और सनातन धर्म को अपमानित करते हैं। पहले भगवान राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी, और अब यह। सरकार को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।” विश्व हिंदू परिषद ने पुणे में आव्हाड के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनके बयान को “सनातन धर्म पर हमला” करार दिया।
शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता संजय शिरसाट ने कहा, “छत्रपति शिवाजी और संभाजी महाराज महाराष्ट्र के गौरव हैं। उनके नाम पर सनातन धर्म को बदनाम करना अस्वीकार्य है। आव्हाड को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।” दूसरी ओर, एनसीपी (शरद पवार) के कुछ नेताओं ने आव्हाड का बचाव किया। एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता रोहित पवार ने कहा, “आव्हाड ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखी है। हमें इतिहास को समझने की जरूरत है, न कि भावनाओं में बहकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।”
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमाया। कुछ यूजर्स ने आव्हाड के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास और जातिगत भेदभाव पर सवाल उठाया है। एक यूजर ने लिखा, “आव्हाड ने सच बोला। सनातन धर्म के नाम पर कुछ लोग जातिवाद और रूढ़ियों को बढ़ावा देते हैं।” वहीं, कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला बताया और #ArrestJitendraAwhad ट्रेंड करने लगा।
जितेंद्र आव्हाड एनसीपी (शरद पवार) के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और मुम्बरा-कालवा से विधायक हैं। वह शरद पवार के करीबी माने जाते हैं और पहले भी अपने बयानों के कारण विवादों में रहे हैं। जनवरी 2024 में उन्होंने भगवान राम को मांसाहारी बताते हुए कहा था कि राम ने वनवास के दौरान शिकार किया और मांस खाया। इस बयान पर मुंबई और पुणे में उनके खिलाफ IPC की धारा 295A (धार्मिक भावनाएं आहत करने) के तहत दो FIR दर्ज की गई थीं। आव्हाड ने बाद में माफी मांगी थी, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका बयान वाल्मीकि रामायण पर आधारित था।
इसके अलावा, जुलाई 2025 में आव्हाड ने बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर महिलाओं की तस्करी का आरोप लगाया था, जिसे शास्त्री ने खारिज कर दिया था। इन विवादों ने आव्हाड को महाराष्ट्र की राजनीति में एक ध्रुवीकरण करने वाली शख्सियत बना दिया है। उनके समर्थक उन्हें निडर और प्रगतिशील नेता मानते हैं, जबकि विरोधी उन्हें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हैं।
यह उल्लेखनीय है कि आव्हाड का यह बयान लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर रविकांत चंदन के हालिया बयान से कुछ हद तक मेल खाता है। रविकांत ने भी धीरेंद्र शास्त्री पर महिलाओं की तस्करी का आरोप लगाया था, जिसके कारण वह भी विवादों में घिर गए थे। दोनों बयानों में धार्मिक नेताओं और सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों को उठाया गया, जिसने सामाजिक और राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। हालांकि, आव्हाड के बयान का दायरा रविकांत के बयान से कहीं अधिक व्यापक है, क्योंकि इसमें सनातन धर्म और मराठा इतिहास के प्रतीकों को सीधे निशाना बनाया गया है।
आव्हाड के बयान के बाद पुणे और मुंबई में उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई हैं। विश्व हिंदू परिषद के गौतम रावरिया ने पुणे के बंड गार्डन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसमें IPC की धारा 295A के तहत कार्रवाई की मांग की गई। पुलिस ने कहा कि वह शिकायत की जांच कर रही है, और अगर जरूरी हुआ तो FIR दर्ज की जाएगी। इससे पहले 2024 में भगवान राम पर बयान के बाद भी आव्हाड के खिलाफ इसी धारा में केस दर्ज हुआ था।
राजनीतिक रूप से, यह बयान एनसीपी (शरद पवार) के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। महाराष्ट्र में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में एनसीपी (एसपी) को केवल 10 सीटें मिली थीं, जबकि अजित पवार की एनसीपी ने 41 सीटें जीती थीं। आव्हाड का बयान महायुति गठबंधन को विपक्ष पर हमला करने का मौका दे सकता है। BJP और शिवसेना ने इसे MVA (महा विकास अघाड़ी) की “हिंदू विरोधी” मानसिकता करार दिया है।
एनसीपी (शरद पवार) ने अभी तक आव्हाड के बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि शरद पवार इस मामले में सावधानी से कदम उठा रहे हैं, क्योंकि यह धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। पार्टी पहले ही 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में टूट का सामना कर चुकी है, और विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद वह अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश में है।
जितेंद्र आव्हाड का सनातन धर्म और छत्रपति शिवाजी-संभाजी पर दिया गया बयान महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में एक नया तूफान खड़ा कर गया है। उनके दावे कि सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद किया और मराठा शासकों को अपमानित किया, ने धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाओं को आहत किया है। यह बयान न केवल धार्मिक समुदायों, बल्कि मराठा समुदाय के बीच भी गुस्सा पैदा कर सकता है, जो शिवाजी और संभाजी को अपने गौरव का प्रतीक मानता है। आव्हाड के पहले के विवादित बयानों, जैसे भगवान राम और धीरेंद्र शास्त्री पर टिप्पणियां, ने उनकी छवि को एक निडर, लेकिन विवादास्पद नेता के रूप में स्थापित किया है।
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