Kangana Ranaut Statement: 'हिमाचल में बीजेपी सरकार बनते ही खुलेंगे RSS के स्कूल', कंगना रनौत का टीएमसी पर तीखा हमला

Kangana Ranaut Remarks: बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश में संघ संचालित स्कूल खोलने का समर्थन किया है। उन्होंने टीएमसी पर राष्ट्रविरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप भी लगाया।

Sep 6, 2026 - 19:32
Sep 6, 2026 - 19:44
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Kangana Ranaut Statement: 'हिमाचल में बीजेपी सरकार बनते ही खुलेंगे RSS के स्कूल', कंगना रनौत का टीएमसी पर तीखा हमला
  • Kangana Ranaut On RSS Schools: 'आरएसएस देश के स्वाभिमान का प्रतीक', कंगना रनौत ने सुवेंदु अधिकारी के प्रस्ताव का किया समर्थन
  • 'हिमाचल में सत्ता में आते ही खोलेंगे RSS द्वारा संचालित स्कूल...' कंगना रनौत के बयान से गरमाई राजनीति, टीएमसी पर बोला हमला
  • Kangana Ranaut Remarks: कंगना रनौत ने किया संघ संचालित स्कूलों का समर्थन, कहा- हिमाचल में बीजेपी सरकार आने पर लागू करेंगे योजना

भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश में पार्टी के सत्ता में लौटने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा संचालित स्कूलों को खोलने की जोरदार वकालत की है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में आयोजित जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कंगना ने यह बयान दिया। उनका यह बयान पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के उस प्रस्ताव के समर्थन में आया है, जिसमें उन्होंने बंगाल में 1,000 विद्या भारती संस्थान स्थापित करने की मांग की थी। कंगना ने आरएसएस को देश के स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर शिक्षा प्रणाली का राजनीतिकरण करने का गंभीर आरोप लगाया।

मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शैक्षणिक शाखा विद्या भारती की कार्यशैली की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जब भी हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोबारा सत्ता में आएगी, तो वह राज्य में संघ द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार करवाने का पूरा प्रयास करेंगी। कंगना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी द्वारा राज्य में 1,000 विद्या भारती स्कूल खोलने के प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल कड़ा एतराज जता रहे हैं। कंगना ने इस पहल को राष्ट्रहित में बताते हुए हिमाचल में भी इसे लागू करने की मंशा जताई है।

मंडी में 'दिशा' बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुईं कंगना रनौत से जब पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने निसंकोच सुवेंदु अधिकारी के विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विद्या भारती और संघ से जुड़े संस्थान देश भर में गुणवत्तापूर्ण और नैतिक शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। कंगना ने तर्क दिया कि आरएसएस केवल आपदाओं या संकट के समय ही देश की सेवा नहीं करता, बल्कि उसने शिक्षा के क्षेत्र में भी अद्वितीय योगदान दिया है।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान जब उनसे तृणमूल कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे "शिक्षा के भगवाकरण" के आरोपों के बारे में पूछा गया, तो कंगना ने पलटवार करते हुए टीएमसी को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए देश में विभाजनकारी और राष्ट्रविरोधी भावनाओं को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि जो संस्थाएं राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कृति की शिक्षा देती हैं, उनका विरोध करना केवल वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है।

कंगना रनौत के इस बयान पर हिमाचल प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कंगना के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि संघ संचालित स्कूलों ने हमेशा छात्रों में देशप्रेम, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का सिंचन किया है। भाजपा का मानना है कि भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा प्रणाली हर राज्य की जरूरत है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने कंगना के इस बयान की कड़े शब्दों में आलोचना की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी विशेष वैचारिक एजेंडे को थोपना। टीएमसी नेताओं ने कंगना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा देश की शिक्षा प्रणाली का सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रही है।

कंगना रनौत के इस बयान ने हिमाचल प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक 'शिक्षा बनाम विचारधारा' की बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। हिमाचल प्रदेश में, जहां फिलहाल कांग्रेस की सरकार है, वहां इस बयान को भविष्य के चुनावी एजेंडे के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और संघ की शिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने के अपने रुख को और स्पष्ट रूप से सामने रख रही है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में विद्या भारती और संघ संचालित स्कूलों का मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। कंगना के बयान से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक मूल्यों पर हमले के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के पूरे आसार हैं। हिमाचल प्रदेश की वर्तमान राज्य सरकार और कांग्रेस संगठन इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की रणनीति बना सकते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के प्रस्ताव और उस पर कंगना के समर्थन के बाद राज्य की विधानसभा से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन और बहस देखने को मिल सकती है।

कंगना रनौत के इस स्टैंड से यह साफ हो गया है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राज्य के भावी राजनीतिक परिदृश्य में सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सुधारों को प्रमुखता से उठाने के मूड में हैं। इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों के विचार भी सामने आ सकते हैं।

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