Delhi CJP Protest Update: अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कोर्ट से मिली रिहाई, CJP ने लिखा- 'कॉकरोच कभी मरते नहीं'
दिल्ली की मजिस्ट्रेट अदालत ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा कर दिया है। रिहाई के बाद संगठन ने दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया।

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान के बाद शनिवार को हिरासत में लिए गए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के शीर्ष नेतृत्व को अदालत से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत ने रविवार, 11 अक्टूबर की सुबह मामले की सुनवाई करते हुए संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और प्रमुख रणनीतिकार आशुतोष रांका को तत्काल प्रभाव से औपचारिक रूप से रिहा करने का आदेश जारी कर दिया। दिल्ली पुलिस द्वारा प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक हिरासत) की धाराओं के तहत पेश किए गए इन तीनों प्रमुख चेहरों को कानूनी प्रक्रियाओं के बाद मुक्त कर दिया गया।
मजिस्ट्रेट कोर्ट से रिहाई के तुरंत बाद CJP के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक बेहद संक्षिप्त लेकिन तीखी पोस्ट साझा की गई, जिसमें लिखा गया "कॉकरोच कभी मरते नहीं।" यह पोस्ट सामने आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गई और डिजिटल समर्थकों के बीच इसे पुलिसिया पाबंदियों के खिलाफ नैतिक जीत के रूप में प्रचारित किया जाने लगा।
वहीं, हिरासत से बाहर आने के बाद संगठन के प्रमुख सहयोगी आशुतोष रांका ने मीडिया और समर्थकों से मुखातिब होते हुए घोषणा की कि दिल्ली पुलिस के अभूतपूर्व धरपकड़ अभियान, फ्लाइट के भीतर से गिरफ्तारी और आंदोलन की आगामी रणनीति को लेकर CJP आज रविवार दोपहर 2 बजे एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) आयोजित करने जा रही है।
24 घंटे के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद अदालत से राहत
अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार सुबह उस वक्त हिरासत में लिया गया था जब वे मुंबई से इंडिगो की नियमित उड़ान के जरिए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे थे। विमान के रनवे पर लैंड होते ही दिल्ली पुलिस के जवानों ने केबिन के अंदर दाखिल होकर तीनों को सीटों से हिरासत में ले लिया था और सीधे रनवे पर खड़ी पुलिस बस में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले गई थी।
शनिवार देर रात तक पुलिस पूछताछ और औपचारिक सत्यापन के बाद रविवार सुबह तीनों को सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। वकीलों की दलीलों और पुलिस के प्रिवेंटिव ग्राउंड्स की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि किसी भी गंभीर आपराधिक कृत्य के अभाव में नागरिकों को आगे हिरासत में रखना उचित नहीं है। इसके उपरांत कोर्ट ने आवश्यक विधिक मुचलके पर तीनों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया।
'कॉकरोच कभी मरते नहीं': सोशल मीडिया पर हलचल
CJP के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम हैंडल से जारी पोस्ट "कॉकरोच कभी मरते नहीं" ने पूरे डिजिटल विमर्श को गरमा दिया है।
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प्रतीकात्मक संदेश: CJP की स्थापना ही इस व्यंग्यात्मक दर्शन पर आधारित थी कि जिस तरह कॉकरोच हर तरह की विपरीत परिस्थितियों और दबाव में जीवित रह जाता है, उसी तरह आम जनता और नागरिकों की असहमति की आवाज को प्रशासनिक दमन या पाबंदियों से खत्म नहीं किया जा सकता।
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समर्थकों का रुख: ध्रुव राठी, काव्या कर्नाटक और शनिवार को हिरासत में लिए गए 150 से अधिक कार्यकर्ताओं के समर्थकों ने इस अदालती आदेश का स्वागत किया है और इसे संवैधानिक अधिकारों की पुनर्स्थापना बताया है।
दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस: किन बड़े मुद्दों पर होगा खुलासा?
रिहाई के बाद आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि संगठन रविवार दोपहर 2 बजे राष्ट्रीय राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। सूत्रों के अनुसार, इस प्रेस वार्ता में CJP निम्नलिखित अहम बिंदुओं पर अपना पक्ष रखेगी:
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फ्लाइट के भीतर डिटेंशन की वैधानिकता: टिकटधारी यात्रियों को विमान के अंदर से बिना किसी वारंट के हिरासत में लिए जाने के खिलाफ CJP दिल्ली पुलिस और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के प्रोटोकॉल पर सवाल उठाएगी।
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दिल्ली में लगाए गए अभूतपूर्व प्रतिबंध: 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने, 170 से अधिक लोकल ट्रेनों को रद्द करने और 15 जिलों में पुलिसिया छापों से आम जनता को हुई असुविधा को मुद्दा बनाया जाएगा।
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चुनाव आयोग पर मूल सवाल: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनके मूल आरोपों और मतदाता सूची विसंगतियों से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक मंच पर पेश किया जा सकता है।
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कानूनी कार्रवाई की तैयारी: दिल्ली पुलिस द्वारा की गई अवैध हिरासत के खिलाफ मानवाधिकार आयोग (NHRC) और दिल्ली उच्च न्यायालय में जाने की योजना की घोषणा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बदला प्रशासनिक रुख
उल्लेखनीय है कि शनिवार को ही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने CJP कार्यकर्ताओं पर पुलिस की भारी कार्रवाई को लेकर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि "मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।"
कानूनी जानकारों का मानना है कि शीर्ष अदालत की इस टिप्पणी और आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP) व सिविल सोसाइटी द्वारा खुलकर समर्थन में आने के बाद दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों को लंबे समय तक हिरासत में रखने का भारी कानूनी दबाव था। मजिस्ट्रेट अदालत से मिली इस रिहाई ने साबित कर दिया है कि पुलिस का प्रिवेंटिव एक्शन केवल एक दिन के मार्च को टालने का तात्कालिक उपाय था। अब सभी की निगाहें दोपहर 2 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां आंदोलन के अगले चरण का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।
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