UNGA 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा में बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण का भारी विरोध, कई देशों के राजनयिकों ने किया वॉकआउट
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने वॉकआउट किया। नेतन्याहू ने विरोधियों को नैतिक कायर करार दिया।

- UN General Assembly: नेतन्याहू के पोडियम पर पहुंचते ही खाली हुआ हॉल, इजरायली पीएम ने बाहर जाने वालों को कहा ‘नैतिक कायर’
- संयुक्त राष्ट्र में इजरायल का कड़ा रुख: राजनयिकों के बहिष्कार के बीच गरजे नेतन्याहू, गाजा कार्रवाई और ईरान पर दी दो टूक चेतावनी
- Netanyahu UNGA Address: यूएन में भाषण के दौरान बड़ा राजनयिक बहिष्कार, विरोध के बावजूद नेतन्याहू ने सैन्य रणनीति का किया बचाव
न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान उस समय तीखा कूटनीतिक तनाव देखने को मिला, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबोधन शुरू करते ही दर्जनों देशों के राजनयिकों और प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से वॉकआउट कर दिया। जैसे ही इजरायली प्रधानमंत्री का नाम पोडियम पर आने के लिए पुकारा गया, अरब देशों, इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी), अफ्रीकी देशों और कई अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी कुर्सियां छोड़ दीं और सदन से बाहर निकल गए। इस नाटकीय विरोध के चलते सदन का एक बड़ा हिस्सा खाली नजर आने लगा और कुछ मिनटों के लिए भाषण की शुरुआत में व्यवधान भी आया।
इस अभूतपूर्व राजनयिक बहिष्कार का जवाब देते हुए बेंजामिन नेतन्याहू मंच पर असहज होने के बजाय पूरी तरह आक्रामक अंदाज में दिखे। उन्होंने बाहर जा रहे प्रतिनिधियों पर तंज कसते हुए उन्हें 'नैतिक कायर' (Moral Cowards) करार दिया और कहा कि यदि हॉल में कोई और भी ऐसा बैठा है तो वह भी बाहर जा सकता है। इसके बाद उन्होंने खाली पड़ी कुर्सियों और अपने समर्थक प्रतिनिधिमंडलों की तालियों के बीच अपना विस्तृत संबोधन शुरू किया।
- विरोध की वजह: गाजा संघर्ष और मानवाधिकार संकट
यह विरोध प्रदर्शन इजरायल द्वारा गाजा पट्टी और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में लगातार चलाए जा रहे व्यापक सैन्य अभियानों, भारी मानवीय क्षति और अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं की पृष्ठभूमि में हुआ है। फिलिस्तीनी मिशन और सहयोगी राष्ट्रों ने वैश्विक समुदाय से आह्वान किया था कि वे इजरायल के सैन्य कदमों के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए संबोधन का औपचारिक बहिष्कार करें।
राजनयिकों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे सर्वोच्च वैश्विक मंच पर सामूहिक वॉकआउट एक शांतिपूर्ण लेकिन कड़ा कूटनीतिक संदेश देने का तरीका है। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे विरोध देखे गए हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा के मुख्य हॉल में नेतन्याहू के भाषण के वक्त हुआ यह वॉकआउट वैश्विक राजनीति में इजरायल के रुख को लेकर बंटे मतों को साफ उजागर करता है।
- संबोधन में नेतन्याहू का कड़ा रुख और सुरक्षा रणनीति
संयुक्त राष्ट्र के मंच से बोलते हुए इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने देश की सैन्य कार्रवाइयों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि इजरायल सात अलग-अलग मोर्चों पर अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और किसी भी परिस्थिति में अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
- नेतन्याहू ने अपने भाषण के मुख्य बिंदुओं में रेखांकित किया:
आतंकवाद के खिलाफ अभियान: उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमास और हिजबुल्लाह जैसे चरमपंथी संगठनों की क्षमताओं को नष्ट करना इजरायल की शीर्ष प्राथमिकता रही है। उन्होंने दोहराया कि कोई भी संप्रभु राष्ट्र अपने निर्दोष नागरिकों पर हुए हमलों के बाद हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकता।
ईरान पर निशाना: इजरायली प्रधानमंत्री ने ईरान और उसके क्षेत्रीय नेटवर्क को वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु और रणनीतिक ढांचे को सीमित करने के फैसले बेहद कठिन लेकिन आत्मरक्षा के लिए अनिवार्य थे। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि अपनी रक्षा करके इजरायल वास्तव में उन कई देशों की भी सुरक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधियों ने हॉल से वॉकआउट किया।
नरसंहार के आरोपों का खंडन: वैश्विक मंचों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा इजरायल पर लगाए गए नरसंहार के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक झूठ करार दिया। उन्होंने कहा कि इजरायली सेना नागरिक आबादी को बचाने के हरसंभव प्रयास करती है, जबकि विरोधी संगठन नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।
- बाहर सड़कों पर प्रदर्शन, अंदर समर्थन और तालियां
जिस समय संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल के भीतर कूटनीतिक टकराव चल रहा था, उसी दौरान मुख्यालय के बाहर न्यूयॉर्क की सड़कों पर बड़ी संख्या में युद्ध-विरोधी और फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने संघर्ष विराम और हथियारों की आपूर्ति रोकने की मांग को लेकर नारेबाजी की, जहां पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई लोगों को हिरासत में भी लिया।
वहीं, हॉल के भीतर गैलरी और इजरायल समर्थक प्रतिनिधिमंडलों ने नेतन्याहू के आक्रामक बयानों पर खड़े होकर तालियां बजाईं। अमेरिकी प्रशासन के साथ रक्षा सहयोग की सराहना करते हुए नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव या कानूनी अपीलों के बावजूद इजरायल अपनी घोषित सैन्य रणनीतियों से पीछे नहीं हटेगा।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र में हुआ यह वॉकआउट केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक मंच पर इजरायल के सैन्य कदमों को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। जहां पश्चिमी जगत के कई देश इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं, वहीं ग्लोबल साउथ, अरब और अफ्रीकी देश तत्काल संघर्ष विराम और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना पर अड़े हैं। इस गहरे ध्रुवीकरण के बीच संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कूटनीतिक वार्ताओं की प्रभावशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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