S Jaishankar on Terrorism: 'एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है?' पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर भड़के विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद पर सवाल उठाने वाले एक पाकिस्तानी पत्रकार को तीखा जवाब देते हुए कहा कि एक आतंकवादी देश भारत से सवाल पूछने की हैसियत में नहीं है।

- S Jaishankar Pakistan: आतंकवाद पर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा था पाकिस्तानी पत्रकार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूं की बोलती बंद
- Jaishankar Slams Pakistan: अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को फिर दिखाया आईना, विदेश मंत्री बोले- आतंकवाद फैलाने वाले सवाल न पूछें
- Foreign Minister S Jaishankar: भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाने वाले पाकिस्तानी रिपोर्टर को जयशंकर का दो टूक जवाब, वैश्विक मंच पर हुई किरकिरी
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विदेश नीति को बेबाकी से रखने वाले विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। एक वैश्विक कार्यक्रम के दौरान जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने का बेबुनियाद आरोप लगाते हुए सवाल पूछा, तो विदेश मंत्री ने बिना किसी झिझक के उसे तुरंत आईना दिखा दिया। पत्रकार ने पूछा था कि भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देना कब बंद करेगी। इस पर डॉ. जयशंकर ने सीधे पलटवार करते हुए दो टूक लहजे में कहा, "एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है?"
विदेश मंत्री के इस संक्षिप्त और बेहद तीखे प्रतिप्रश्न ने पूरे सभागार को स्तब्ध कर दिया और सवाल पूछने वाले रिपोर्टर की बोलती पूरी तरह बंद हो गई। कूटनीतिक हलकों में डॉ. जयशंकर के इस बयान को भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का स्वाभाविक और सशक्त विस्तार माना जा रहा है, जहां भारत अपने खिलाफ लगाए जाने वाले किसी भी झूठे प्रचार को बिना देरी के खारिज करता है।
- सवाल के पीछे की दुर्भावना और जयशंकर का प्रहार
प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तानी पत्रकार का इरादा यह धारणा बनाना था कि सीमा पार अस्थिरता के लिए भारत जिम्मेदार है। इस तरह के निराधार आक्षेप लगाकर वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने भारत को असहज करने की कोशिश कर रहा था। पत्रकार के सवाल में शब्दों का चयन पूरी तरह से प्रायोजित और आक्रामक था।
डॉ. जयशंकर ने इस लंबे और दुर्भावना से भरे सवाल पर कोई लंबा स्पष्टीकरण देने के बजाय सीधे उसकी मूल सच्चाई पर चोट की। उन्होंने सवाल के बुनियादी तर्क को ही खारिज करते हुए याद दिलाया कि दशकों से वैश्विक आतंकवाद की नर्सरी के रूप में कुख्यात देश का कोई प्रतिनिधि भारत की संप्रभु और जिम्मेदार साख पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखता। विदेश मंत्री का यह रुख स्पष्ट करता है कि भारत अब रक्षात्मक मुद्रा में जवाब देने के दौर से बहुत आगे निकल चुका है।
- वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड
पाकिस्तान लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दों पर झूठे नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, तथ्य हमेशा इसके विपरीत रहे हैं। वैश्विक स्तर पर वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की निगरानी से लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की लंबी फेहरिस्त तक, पाकिस्तान का नाम हमेशा सीमा पार आतंकी फंडिंग और प्रशिक्षण से जुड़ा रहा है।
भारत हमेशा से इस बात को रेखांकित करता रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे दुर्दांत संगठनों के सरगना खुलेआम पाकिस्तानी धरती पर संरक्षण पाते रहे हैं। 26/11 मुंबई हमला, पठानकोट, उरी और पुलवामा जैसी घटनाओं के प्रत्यक्ष प्रमाण पूरी दुनिया के सामने मौजूद हैं। जब ऐसा देश खुद को आतंकवाद के पीड़ित या उपदेशक के रूप में पेश करने की कोशिश करता है, तो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उसकी विश्वसनीयता शून्य मानी जाती है।
- भारत की आक्रामक और स्पष्ट कूटनीति का नया दौर
डॉ. एस. जयशंकर का कार्यकाल भारतीय विदेश नीति में स्पष्टवादिता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में उभरा है। चाहे पश्चिमी देशों द्वारा रूस से तेल खरीद पर उठाए गए सवाल हों या फिर चीन और पाकिस्तान से जुड़े सीमा और सुरक्षा मुद्दे, जयशंकर हमेशा तथ्यों और तर्कों के साथ भारत का पक्ष सामने रखते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक कूटनीति में अक्सर कठोर सवालों पर कूटनीतिक चुप्पी या गोलमोल जवाब दिए जाते थे। लेकिन वर्तमान भारतीय नेतृत्व ने यह तय किया है कि देश की छवि पर झूठे आक्षेप लगाने वालों को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जो वैश्विक समुदाय में गूंजे। विदेश मंत्री का यह संक्षिप्त जवाब दुनिया भर के उन नीति निर्माताओं के लिए भी एक सीधा संदेश है जो आतंकवाद के स्रोत और उसके शिकार के बीच फर्क को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं।
भारत का आधिकारिक रुख बिल्कुल स्पष्ट रहा है कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। नई दिल्ली ने कई बार दोहराया है कि किसी भी प्रकार की वार्ता या सामान्य रिश्ते तभी संभव हैं जब इस्लामाबाद अपनी जमीन से चलने वाले आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह और सत्यापन योग्य तरीके से समाप्त करे।
पाकिस्तानी पत्रकार को दिया गया यह करारा जवाब केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत के उस अडिग संकल्प को दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस तरह की त्वरित और सटीक प्रतिक्रियाएं विरोधी देशों के उन प्रयासों को विफल कर देती हैं जो गलत बयानी के जरिए वैश्विक मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश करते हैं।
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