दुबई में ट्रक ड्राइवर कुलवंत सिंह की बदली किस्मत, लकी ड्रॉ में जीते 1.3 करोड़ रुपये
दुबई में भारी वाहन चलाने वाले भारतीय प्रवासी कुलवंत सिंह ने यूएई के प्रसिद्ध लकी ड्रॉ में 1.3 करोड़ रुपये (लगभग 5.79 लाख दिरहम) का बंपर इनाम जीता है। पढ़ें उनकी सफलता की पूरी कहानी।

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- अबू धाबी बिग टिकट: दुबई में संघर्ष कर रहे भारतीय ड्राइवर ने जीता 1.3 करोड़ रुपये का बंपर प्राइज
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे एक भारतीय प्रवासी की किस्मत रातों-रात बदल गई है। दुबई में भारी वाहन (ट्रक) चालक के रूप में कार्यरत भारतीय नागरिक कुलवंत सिंह ने हाल ही में आयोजित लकी ड्रॉ में 5,79,000 दिरहम (भारतीय मुद्रा में लगभग 1.3 करोड़ रुपये) का बड़ा नकद पुरस्कार जीता है। इस जीत के साथ ही कुलवंत सिंह का नाम उन चुनिंदा भारतीय प्रवासियों की सूची में शामिल हो गया है, जिनकी जिंदगी यूएई के प्रतिष्ठित ड्रॉ ने पूरी तरह बदल दी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुलवंत सिंह लंबे समय से यूएई में रहकर ट्रक चलाने का कार्य कर रहे थे और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत थे। वे नियमित अंतराल पर दोस्तों और सहयोगियों के साथ मिलकर लकी ड्रॉ के टिकट खरीदते रहे थे। हालिया ड्रॉ में उनके टिकट नंबर का चयन शीर्ष विजेताओं में हुआ, जिससे उन्हें 1.3 करोड़ रुपये से अधिक की इनामी राशि प्राप्त हुई।
- वर्षों की मेहनत और उम्मीद का परिणाम?
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय नागरिक परिवहन, निर्माण और सेवा क्षेत्र में कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। कुलवंत सिंह भी इन्हीं प्रवासियों में से एक हैं, जो पंजाब से रोजगार की तलाश में दुबई पहुंचे थे।
जीत की सूचना मिलने के बाद कुलवंत सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे इस पुरस्कार से बेहद आभारी हैं। लंबे समय तक दिन-रात सड़कों पर ट्रक चलाने के बाद मिली इस राशि से वे अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करेंगे। उन्होंने बताया कि इस पैसे का इस्तेमाल बच्चों की उच्च शिक्षा, परिवार के कर्ज चुकाने और भारत में अपने घर को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
- यूएई के लकी ड्रॉ में भारतीयों का दबदबा
संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित होने वाले 'बिग टिकट' (Big Ticket Abu Dhabi) और 'दुबई ड्यूटी फ्री मिलेनियम मिलेनियर' जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के ड्रॉ में भारतीय नागरिकों की भागीदारी और जीत का रिकॉर्ड हमेशा मजबूत रहा है। टिकट की ऊंची लागत के कारण अक्सर कई प्रवासी श्रमिक मिलकर साझा रूप से टिकट खरीदते हैं और जीतने पर पुरस्कार राशि आपस में बांट लेते हैं। कुलवंत सिंह की यह जीत खाड़ी देशों में काम कर रहे उन तमाम ब्लू-कॉलर श्रमिकों के लिए प्रेरणा और उम्मीद का प्रतीक बनी है, जो अपने घर-परिवार से दूर रहकर बेहतर भविष्य का सपना संजोते हैं।
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