Bijnor Child Murder Case: बिजनौर में 4 साल के बेटे की हत्या करने वाली मां आदेश देवी को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
Bijnor Court Verdict: बिजनौर जिला न्यायालय ने अपने 4 साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या करने वाली महिला आदेश देवी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।

- Bijnor Court Verdict: मासूम बेटे की हत्यारी मां को आजीवन कारावास, बिजनौर जिला अदालत का ऐतिहासिक फैसला
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- Bijnor News: चार साल के मासूम बेटे की हत्या के मामले में मां आदेश देवी को उम्रकैद, कोर्ट का अंतिम फैसला
उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले में एक दिल दहला देने वाले आपराधिक मामले में स्थानीय अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अपने ही 4 साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या करने की दोषी पाई गई मां आदेश देवी को माननीय न्यायालय ने आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सख्त सजा सुनाई है। यह फैसला रविवार (19 जुलाई 2026) को अदालत की कार्यवाही के दौरान सार्वजनिक हुआ, जहां अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए अकाट्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर महिला को दोषी ठहराया गया। इस खौफनाक वारदात ने जब कुछ समय पहले क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था, तब से ही आरोपी महिला न्यायिक हिरासत में थी और अब कोर्ट के इस अंतिम आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।
यह संवेदनशील मामला पारिवारिक और मानवीय रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य अपराध से जुड़ा है। बिजनौर जिले के एक गांव में रहने वाली आदेश देवी नाम की महिला ने किसी अज्ञात घरेलू या व्यक्तिगत वजह के चलते अपने सगे चार वर्षीय बेटे की गला घोंटकर या किसी अन्य क्रूर माध्यम से हत्या कर दी थी। पुलिस ने घटना के तत्काल बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की कड़ी विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से पेश किया गया, जिसके बाद न्यायाधीश ने इस कृत्य को समाज और ममता के खिलाफ एक गंभीर अपराध मानते हुए आदेश देवी को धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा और आर्थिक दंड से दंडित किया।
यह वीभत्स घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ था जब पुलिस को सूचना मिली कि एक घर में चार साल के बच्चे का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया है। शुरुआत में मामले को दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया था, लेकिन पुलिस की प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि बच्चे की प्राकृतिक मृत्यु नहीं हुई थी, बल्कि उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी।
विवेचना के दौरान जब पुलिस ने घर के सदस्यों से कड़ाई से पूछताछ की, तो परतें खुलती चली गईं। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि स्वयं सगी मां आदेश देवी ही इस कृत्य के पीछे मुख्य सूत्रधार थी। इसके बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। मामले की त्वरित सुनवाई जिला न्यायालय में हुई, जहां सरकारी वकील ने गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि दोषी महिला ने किसी भी प्रकार की दया की पात्रता नहीं छोड़ी थी, जिसके फलस्वरूप यह ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया गया।
न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले पर अभियोजन पक्ष और पुलिस प्रशासन ने संतोष व्यक्त किया है। बिजनौर पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया, "यह समाज को झकझोरने वाला अपराध था। पुलिस ने इस मामले में बिना किसी ढिलाई के साइंटिफिक एविडेंस और गवाहों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। कोर्ट का यह फैसला न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को और मजबूत करेगा।"
दूसरी ओर, दोषी महिला के वकील का कहना है कि वे इस फैसले का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट) में अपील दायर करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। वहीं, पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है, उनका कहना है कि मासूम बच्चे की आत्मा को आज जाकर सच्चा न्याय मिला है।
बिजनौर की इस अदालत के सख्त फैसले का असर पूरे सामाजिक ताने-बाने और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा दिखाई दे रहा है। एक मां द्वारा अपने ही बच्चे की हत्या के इस मामले ने समाज में मनोवैज्ञानिक विकृतियों और घरेलू तनावों के खतरनाक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। कानूनी मोर्चे पर इस फैसले ने यह नजीर पेश की है कि अपराध चाहे कितना भी व्यक्तिगत या बंद कमरों में क्यों न किया गया हो, कानून की नजरों से बच पाना नामुमकिन है। ग्रामीणों और स्थानीय समाज में इस निर्णय से एक कड़ा संदेश गया है कि रिश्तों की आड़ में किए गए किसी भी जघन्य अपराध को न्यायपालिका बर्दाश्त नहीं करेगी।
अदालत द्वारा सजा के ऐलान के बाद दोषी आदेश देवी को कड़ी सुरक्षा के बीच केंद्रीय कारागार स्थानांतरित करने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कानून के जानकारों के अनुसार, उम्रकैद की सजा पाए कैदियों को जेल मैनुअल के कड़े नियमों के तहत रहना होता है। इधर, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने इस घटना के बाद ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक परामर्श केंद्रों की आवश्यकता पर जोर देना शुरू किया है, ताकि भविष्य में सामाजिक और पारिवारिक मोर्चे पर इस तरह के खौफनाक मानसिक भटकाव और किसी मासूम की असमय जान जाने जैसी घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।
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