राजस्थान के जालोर जिले में 15 गांवों की महिलाओं और लड़कियों पर स्मार्टफोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध।

राजस्थान के जालोर जिले में स्थित 15 गांवों की पंचायत ने महिलाओं और लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर एक सख्त प्रतिबंध लगाने का फैसला

Dec 23, 2025 - 12:34
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राजस्थान के जालोर जिले में 15 गांवों की महिलाओं और लड़कियों पर स्मार्टफोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध।
राजस्थान के जालोर जिले में 15 गांवों की महिलाओं और लड़कियों पर स्मार्टफोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध।

राजस्थान के जालोर जिले में स्थित 15 गांवों की पंचायत ने महिलाओं और लड़कियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर एक सख्त प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जिसके तहत वे केवल कीपैड वाले फोन का उपयोग कर सकेंगी। यह निर्णय जिले के सुंधामाता पट्टी क्षेत्र में चौधरी समुदाय की ओर से लिया गया है, जहां पंचायत ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बहुओं और अविवाहित लड़कियों को कैमरा वाले मोबाइल फोन रखने या इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य घरों में बच्चों की आंखों की रोशनी को बचाना बताया गया है, क्योंकि पंचायत का मानना है कि महिलाओं के स्मार्टफोन इस्तेमाल से बच्चे उन फोनों का अत्यधिक उपयोग करते हैं, जिससे उनकी दृष्टि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पंचायत के इस फैसले के अनुसार, महिलाएं और लड़कियां सार्वजनिक समारोहों, शादियों, सामाजिक आयोजनों या पड़ोसियों के घर जाते समय किसी भी तरह का मोबाइल फोन अपने साथ नहीं ले जा सकेंगी। हालांकि, स्कूल या कॉलेज में पढ़ाई करने वाली लड़कियों को घर के अंदर केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए फोन इस्तेमाल करने की छूट दी गई है, लेकिन उन्हें भी फोन बाहर ले जाने की मनाही है।

यह नियम 26 जनवरी से लागू होने वाला है, और इसका पालन सुनिश्चित करने के लिए पंचायत ने समुदाय के सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रभावित गांवों की सूची में गाजीपुरा, पावली, कलड़ा, मनोजिया वास, राजीकवास, दतलावास, राजपुरा, कोड़ी, सिडरोड़ी, अलड़ी, रोपसी, खानदेवल, सावधर, भिनमाल की हथमी की ढाणी और खानपुर शामिल हैं, जहां चौधरी समुदाय की महिलाओं पर यह प्रतिबंध लागू होगा। पंचायत की बैठक गाजीपुर गांव में रविवार को आयोजित की गई थी, जिसमें 14 पट्टियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, और बैठक की अध्यक्षता सुजनाराम चौधरी ने की थी। प्रस्ताव देवाराम करनोल द्वारा पेश किया गया था, जिसे पंच हिम्मताराम ने पढ़कर सुनाया, और चर्चा के बाद इसे सर्वसम्मति से मंजूर किया गया। पंचायत ने इस फैसले को बच्चों के हित में आवश्यक कदम बताया है, क्योंकि उनके अनुसार महिलाएं घरेलू कामकाज के दौरान बच्चों को व्यस्त रखने के लिए फोन दे देती हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताते हैं और उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित होती है।

इस प्रतिबंध के तहत महिलाओं को केवल कॉलिंग के लिए कीपैड फोन इस्तेमाल करने की अनुमति है, जबकि कैमरा या इंटरनेट वाले फोन पूरी तरह से वर्जित हैं। पंचायत ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी 15 गांवों में एकसमान रूप से लागू होगा, और इसका उल्लंघन करने पर समुदाय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। जालोर जिले के इन गांवों में चौधरी समुदाय की बहुलता है, और पंचायत की ऐसी निर्णय प्रक्रिया पहले भी विवादास्पद मुद्दों पर देखी गई है, लेकिन इस बार फोकस महिलाओं के फोन उपयोग पर है। निर्णय के पीछे का तर्क यह है कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल से न केवल बच्चों की सेहत प्रभावित हो रही है, बल्कि यह घरेलू वातावरण को भी प्रभावित कर सकता है, हालांकि मुख्य जोर आंखों की रोशनी पर दिया गया है। पंचायत के सदस्यों ने बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की, और अंत में यह सहमति बनी कि 26 जनवरी से इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाएगा। प्रभावित महिलाओं में बहुएं और युवा लड़कियां शामिल हैं, जबकि पढ़ाई करने वाली लड़कियों को घरेलू सीमाओं के अंदर छूट दी गई है ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो। गांवों की सूची को ध्यान में रखते हुए, गाजीपुरा से लेकर खानपुर तक के क्षेत्र में यह नियम प्रभावी होगा, और समुदाय के नेता इसकी निगरानी करेंगे।

पंचायत ने यह भी स्पष्ट किया है कि फोन का उपयोग केवल संवाद के लिए सीमित रहेगा, और किसी भी प्रकार की सोशल मीडिया या कैमरा सुविधा वाले उपकरणों पर रोक लगाई गई है। इस फैसले की पृष्ठभूमि में समुदाय की चिंता है कि आधुनिक तकनीक बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है, विशेष रूप से जब महिलाएं फोन का इस्तेमाल करती हैं तो बच्चे उससे जुड़ जाते हैं। बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने इस प्रतिबंध को आवश्यक बताते हुए कहा कि इससे बच्चों की आंखों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। जालोर जिले के इन 15 गांवों में रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अब उन्हें पुराने स्टाइल के फोन पर निर्भर रहना पड़ेगा। पंचायत के अध्यक्ष ने बैठक के दौरान जोर दिया कि यह निर्णय समुदाय के हित में है और सभी को इसका पालन करना चाहिए।

गांवों के नामों को दोहराते हुए, पावली, कलड़ा, मनोजिया वास जैसे क्षेत्रों में यह नियम लागू होगा, जहां चौधरी समुदाय की महिलाएं मुख्य रूप से प्रभावित होंगी। प्रतिबंध के नियमों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि सार्वजनिक स्थलों पर फोन ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है, ताकि कोई उल्लंघन न हो। पंचायत ने इस फैसले को लागू करने के लिए कोई जुर्माना या सजा का प्रावधान नहीं बताया, लेकिन समुदाय स्तर पर अनुपालन की अपेक्षा की गई है। बच्चों की आंखों की रोशनी को बचाने के इस प्रयास में पंचायत ने महिलाओं के फोन उपयोग को सीधे जिम्मेदार ठहराया है। बैठक में प्रस्ताव पढ़ने वाले पंच ने सभी सदस्यों से सहमति मांगी, और इसे मंजूर किया गया। राजीकवास, दतलावास, राजपुरा जैसे गांवों में रहने वाली युवतियां अब कीपैड फोन तक सीमित रहेंगी। इस प्रतिबंध से जुड़ी चिंताएं मुख्य रूप से बच्चों के स्वास्थ्य पर केंद्रित हैं, और पंचायत ने इसे एक सकारात्मक कदम माना है। कोड़ी, सिडरोड़ी, अलड़ी गांवों में भी यही नियम लागू होंगे, जहां महिलाओं को फोन के इस्तेमाल पर सख्ती बरतनी होगी। पंचायत की बैठक में इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई, और अंत में 26 जनवरी की तारीख तय की गई। रोपसी, खानदेवल, सावधर जैसे क्षेत्रों में समुदाय के सदस्य इस फैसले का पालन करेंगे।

भिनमाल की हथमी की ढाणी और खानपुर गांव भी इस सूची में शामिल हैं, जहां प्रतिबंध प्रभावी होगा। पंचायत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के लिए घर में फोन इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन बाहर नहीं। इस निर्णय से जालोर जिले के इन गांवों में महिलाओं के दैनिक जीवन में बदलाव आएगा, क्योंकि स्मार्टफोन अब वर्जित होंगे। समुदाय के नेता ने बैठक में जोर दिया कि बच्चों की सेहत प्राथमिकता है, और यह प्रतिबंध उसी दिशा में है। पंचायत के इस कदम से 15 गांवों में एक नई व्यवस्था लागू होगी, जहां कीपैड फोन ही विकल्प रहेंगे। फैसले के तहत पड़ोसियों के घर जाते समय फोन ले जाना भी प्रतिबंधित है। जालोर जिले की पंचायत ने इस मुद्दे पर समुदाय की एकता दिखाई है। 26 जनवरी से शुरू होने वाला यह प्रतिबंध लंबे समय तक प्रभावी रहेगा। महिलाओं और लड़कियों के लिए फोन उपयोग की सीमाएं तय कर दी गई हैं। पंचायत ने बच्चों की आंखों की रोशनी को मुख्य कारण बताया है। यह फैसला गाजीपुर गांव की बैठक में लिया गया। समुदाय के सदस्यों ने इसे मंजूर किया।

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